गुमला में हाथी ने ग्रामीण को कुचलकर मारा:हाथियों को भगाने निकला था, आधा किमी दूर ले जाकर कुचला; मौत से भड़के लोग

गुमला में हाथी ने ग्रामीण को कुचलकर मारा:हाथियों को भगाने निकला था, आधा किमी दूर ले जाकर कुचला; मौत से भड़के लोग

गुमला के कामडारा थाना क्षेत्र के बुरुहातु गांव में हाथी के हमले में 40 वर्षीय ग्रामीण निकोलस तोपनो की दर्दनाक मौत हो गई। घटना सोमवार की देर रात सरिता पंचायत के सुकरा टांड़ में हुई। निकोलस हाथियों के झुंड को भगाने के लिए घर से निकले थे। इसी दौरान एक हाथी ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। हाथी ने निकोलस को सूंड़ में लपेटा और करीब आधा किलोमीटर दूर तक घसीटकर ले गया। इसके बाद उन्हें पटककर कुचल दिया। हमले में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हाथी ने शव को भी बुरी तरह क्षत-विक्षत कर दिया। घटना की खबर मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया। मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। हाथियों के झुंड की मौजूदगी से आसपास के गांवों में भी दहशत फैल गई है। हादसे के बाद की तस्वीरें देखें…. रात एक बजे हाथियों को भगाने निकले थे ग्रामीण जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में कई दिनों से हाथियों का झुंड घुम रहा है। बताया गया कि झुंड में 23 हाथी शामिल हैं। सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात करीब एक बजे हाथियों को भगाने के लिए ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकले थे। इसी दौरान निकोलस तोपनो हाथी के सामने आ गए। हाथी ने उन पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला। हाथी उन्हें सूंड़ में लपेटकर दूर ले गया और कुचलकर मार डाला। घटना के बाद ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों है। लोगों का कहना है कि हाथियों का झुंड कई दिनों से गांव के आसपास घूम रहा था। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका। हाथियों ने खेतों में लगी धान, केला, ईख, आलू, फूलगोभी और शकरकंद की फसलों को भी नुकसान पहुंचाया है। वन विभाग पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। सोमवार सुबह वन विभाग के कर्मी भी घटनास्थल पर पहुंचे। इस दौरान ग्रामीणों का गुस्सा वन विभाग के कर्मचारियों पर फूट पड़ा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हाथियों का झुंड कई दिनों से गांव में प्रवेश कर रहा था, लेकिन उसे भगाने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। लोगों ने कहा कि समय रहते कार्रवाई होती तो शायद यह हादसा टल सकता था। हाथियों के लगातार घुमने से ग्रामीणों की जान और फसलें दोनों खतरे में हैं। घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर ले जाने की मांग की है। परिवार को मिली एक लाख की सहायता वन विभाग की ओर से मृतक के परिजनों को तत्काल एक लाख रुपए की सहायता राशि दी गई है। अधिकारियों ने एक सप्ताह के भीतर शेष मुआवजा देने की बात कही है। ग्रामीणों को मुआवजे से संबंधित फॉर्म, टॉर्च और पटाखे भी उपलब्ध कराए गए हैं। विभाग की ओर से हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। झुंड को सारंडा जंगल की ओर भेजने का प्रयास किया जा रहा है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे हाथियों के करीब न जाएं और उन्हें भगाने के लिए खुद जोखिम न उठाएं। रात के समय अकेले बाहर निकलने से बचें। गुमला के कामडारा थाना क्षेत्र के बुरुहातु गांव में हाथी के हमले में 40 वर्षीय ग्रामीण निकोलस तोपनो की दर्दनाक मौत हो गई। घटना सोमवार की देर रात सरिता पंचायत के सुकरा टांड़ में हुई। निकोलस हाथियों के झुंड को भगाने के लिए घर से निकले थे। इसी दौरान एक हाथी ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। हाथी ने निकोलस को सूंड़ में लपेटा और करीब आधा किलोमीटर दूर तक घसीटकर ले गया। इसके बाद उन्हें पटककर कुचल दिया। हमले में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हाथी ने शव को भी बुरी तरह क्षत-विक्षत कर दिया। घटना की खबर मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया। मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। हाथियों के झुंड की मौजूदगी से आसपास के गांवों में भी दहशत फैल गई है। हादसे के बाद की तस्वीरें देखें…. रात एक बजे हाथियों को भगाने निकले थे ग्रामीण जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में कई दिनों से हाथियों का झुंड घुम रहा है। बताया गया कि झुंड में 23 हाथी शामिल हैं। सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात करीब एक बजे हाथियों को भगाने के लिए ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकले थे। इसी दौरान निकोलस तोपनो हाथी के सामने आ गए। हाथी ने उन पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला। हाथी उन्हें सूंड़ में लपेटकर दूर ले गया और कुचलकर मार डाला। घटना के बाद ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों है। लोगों का कहना है कि हाथियों का झुंड कई दिनों से गांव के आसपास घूम रहा था। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका। हाथियों ने खेतों में लगी धान, केला, ईख, आलू, फूलगोभी और शकरकंद की फसलों को भी नुकसान पहुंचाया है। वन विभाग पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। सोमवार सुबह वन विभाग के कर्मी भी घटनास्थल पर पहुंचे। इस दौरान ग्रामीणों का गुस्सा वन विभाग के कर्मचारियों पर फूट पड़ा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हाथियों का झुंड कई दिनों से गांव में प्रवेश कर रहा था, लेकिन उसे भगाने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। लोगों ने कहा कि समय रहते कार्रवाई होती तो शायद यह हादसा टल सकता था। हाथियों के लगातार घुमने से ग्रामीणों की जान और फसलें दोनों खतरे में हैं। घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर ले जाने की मांग की है। परिवार को मिली एक लाख की सहायता वन विभाग की ओर से मृतक के परिजनों को तत्काल एक लाख रुपए की सहायता राशि दी गई है। अधिकारियों ने एक सप्ताह के भीतर शेष मुआवजा देने की बात कही है। ग्रामीणों को मुआवजे से संबंधित फॉर्म, टॉर्च और पटाखे भी उपलब्ध कराए गए हैं। विभाग की ओर से हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। झुंड को सारंडा जंगल की ओर भेजने का प्रयास किया जा रहा है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे हाथियों के करीब न जाएं और उन्हें भगाने के लिए खुद जोखिम न उठाएं। रात के समय अकेले बाहर निकलने से बचें।  

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