‘काम कराना है तो कमीशन दो, वरना CMO बात करेंगे’:सरकार बदलते ही कमीशन 3% से 10% किया, जाति देखकर ठेका देने वाले इंजीनियर की कहानी

‘काम कराना है तो कमीशन दो, वरना CMO बात करेंगे’:सरकार बदलते ही कमीशन 3% से 10% किया, जाति देखकर ठेका देने वाले इंजीनियर की कहानी

नारद कुमार दास। दिखने में एक सिंपल इंसान। घर और ऑफिस, दोनो जगहों पर इनका रहन-सहन बिल्कुल आम लोगों की तरह। लेकिन, ब्लैकमनी कमाने में नंबर-1। घूस लेने के लिए यह ठेकेदारों को बेखौफ डराता-धमकाता था। वो भी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) का नाम लेकर। नारद कुमार दास मुंगेर में योजना एवं विकास विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर था। 7 अक्टूबर को पटना में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया। 8 अक्टूबर को जब उसके ठिकानों पर छापेमारी की तो बंडल के बंडल नोट मिले। कैश गिनने के लिए पेट्रोल पम्प से मशीन मंगवानी पड़ी। आज संडे बिग स्टोरी में कहानी, नारद कुमार दास की काली कमाई की, डेपुटेशन पर मुंगेर में पोस्टिंग कराने और CMO के नाम पर ठेकेदारों को धमकाने की…। सम्राट की सरकार बनते ही बदला तेवर, बढ़ाया कमीशन विभागीय सूत्रों और मुंगेर में काम करने वाले एक ठेकेदार के मुताबिक, नारद कुमार दास ने राजनीतिक पैरवी के दम पर डेपुटेशन के तहत अपना ट्रांसफर योजना एवं विकास विभाग में कराया। इसके बाद मुंगेर में मनचाही पोस्टिंग कराई। ठेकेदार से ले लिया आधा पैसा नाम न छापने की शर्त पर एक ठेकेदार ने बताया, ‘बरियारपुर में 80 लाख रुपए से एक सड़क बनी थी। ठेका दूसरे ठेकेदार के पास था। बारिश और जल जमाव की वजह से काम देर से पूरा हुआ। जब रुपए पास करने की बारी आई तो टाइम एक्सटेंशन के नाम पर प्रोजेक्ट का 50% रुपये काट लिया।’ आरोप है कि 80 लाख में से 40 रुपए ही ठेकेदार को दिए। बाकी का 40 लाख नारद ने खुद ही रख लिया था। यह मामला चंद महीने ही पुराना है। ब्लैकमनी कमाने के नारद के 2 तरीके सूत्रों के मुताबिक, नारद ब्लैक मनी कमाने के लिए पर्दे के पीछे से दो तरह के खेल खेल रहे थे। नौकरी लगते ही कुछ महीनों में बन गए करोड़पति नारद कुमार दास भागलपुर के मूल निवासी हैं। तिलका मांझी के हनुमानपथ में पुश्तैनी घर है। बिहार इंजीनियरिंग सर्विस क्लास-2 के तहत 2014 में इनकी नौकरी जल संसाधन विभाग में बतौर असिस्टेंट इंजीनियर हुई थी। EOU की FIR के मुताबिक, सरकारी नौकरी से पहले इनके पास मात्र 9 लाख 64 हजार 800 रुपए की परिसंपत्तियां थीं। मगर, पिछले 12 सालों में इन्होंने जमकर भ्रष्टाचार किया। अपने पद और सरकारी नौकरी का दुरुपयोग कर खूब काली कमाई की। जहां भी रहे कमीशन में मोटी रकम की उगाही करते रहे। आज ये 2 करोड़ रुपए से अधिक की चल-अचल संपत्ति के मालिक हैं। हाउस वाइफ है सुष्मिता मुजफ्फरपुर के धरमपुर खरौना गांव की रहने वाली सुष्मिता सुमन से नारद कुमार दास की शादी हुई थी। पत्नी हाउस वाइफ हैं। इनके नाम के दो बैंक अकाउंट जांच एजेंसी को मिले थे। एक में 10 लाख 40 हजार तो दूसरे अकाउंट में 39 हजार रुपया जमा था। यही नहीं, जांच टीम ने इनके बैंक अकाउंट की ट्रांजक्शन हिस्ट्री खंगाली। पत्नी के अकाउंट में कई बार बड़ी और मोटी रकम आने के सबूत मिले। फिलहाल सभी अकाउंट्स फ्रिज करा दिए गए हैं। सर्किल रेट से भी कम दाम दिखाया काली कमाई करने वाले नारद ने सबसे बड़ा खेल प्रॉपर्टी खरीदने में किया है। FIR में कुल 4 प्रॉपर्टी की डिटेल्स है। इसमें भागलपुर के सबौर और मुजफ्फरपुर की प्रॉपर्टी अपने वाइफ के नाम खरीदी। तीसरी प्रॉपर्टी भागलपुर के तिलकामांझी में है। पर यह किसके नाम पर है, यह स्पष्ट नहीं है। यहां की जमीन पर इसने घर भी बनवाया है। चौथी और सबसे महंगी प्रॉपर्टी इसने पटना में दानापुर के रूपसपुर में अपनी सास वीणा विद्यार्थी के नाम खरीदी। 19 सितंबर 2026 को इसकी रजिस्ट्री भी करवाई। पटना की इस महंगी प्रॉपर्टी को इसने ऑन पेपर मात्र 50 लाख रुपए में ही खरीदा है। जबकि, सरकार की तरफ से तय सर्किल रेट भी इससे अधिक है, जो 68 लाख 41 हजार रुपए है। वहीं, इसका बाजार भाव डेढ़ करोड़ रुपए से भी अधिक का है। सूत्रों के मुताबिक, बाकी प्रॉपर्टी खरीदने में भी इसी तरह का खेल किया। जमीन महंगी थीं और पेपर पर खरीदारी का रेट बेहद कम का दिखाया। इस पॉइंट पर भी EOU जांच कर रही है। नारद पर शिकंजा कसा कैसे? मुंगेर में रहकर नारद कुमार दास ब्लैकमनी कमाने के लिए दबंगई पर उतर आए थे। किसी ने इसकी लिखित शिकायत EOU को की थी। जानकारी दी कि वो मुख्यमंत्री कार्यालय का नाम लेकर ठेकेदारों का शोषण कर रहा है। इसके बाद एक टीम बनाई गई। टीम ने शिकायतों की जांच की। हर एक पॉइंट को खंगाला। जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद एक-एक प्रॉपर्टी और बैंक डिटेल्स खंगाले। इस दौरान पता चला कि बड़े स्तर पर कैश इसने अपने ससुराल में छिपा रखा है। यही वजह थी कि वहां भी छापेमारी हुई थी और 50.50 लाख रुपया कैश बरामद भी हुआ था। EOU ने 7 दिनों में पूछताछ के लिए बुलाया अब सबसे बड़ा सवाल है कि आगे क्या होगा? इस पर जांच एजेंसी का कहना है कि इस मामले में उनकी जांच जारी है। कई सवाल हैं, जिनके जवाब नारद कुमार दास को देने हैं। सवालों की लंबी लिस्ट तैयार है। नोटिस भेजकर 7 दिन में पूछताछ के लिए बुलाया गया है। जिसमें यह सवाल पूछे जा सकते हैं… 8 अक्टूबर को 5 ठिकानों पर पड़ा छापा छापेमारी में मिला 52 लाख कैश नारद कुमार दास। दिखने में एक सिंपल इंसान। घर और ऑफिस, दोनो जगहों पर इनका रहन-सहन बिल्कुल आम लोगों की तरह। लेकिन, ब्लैकमनी कमाने में नंबर-1। घूस लेने के लिए यह ठेकेदारों को बेखौफ डराता-धमकाता था। वो भी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) का नाम लेकर। नारद कुमार दास मुंगेर में योजना एवं विकास विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर था। 7 अक्टूबर को पटना में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया। 8 अक्टूबर को जब उसके ठिकानों पर छापेमारी की तो बंडल के बंडल नोट मिले। कैश गिनने के लिए पेट्रोल पम्प से मशीन मंगवानी पड़ी। आज संडे बिग स्टोरी में कहानी, नारद कुमार दास की काली कमाई की, डेपुटेशन पर मुंगेर में पोस्टिंग कराने और CMO के नाम पर ठेकेदारों को धमकाने की…। सम्राट की सरकार बनते ही बदला तेवर, बढ़ाया कमीशन विभागीय सूत्रों और मुंगेर में काम करने वाले एक ठेकेदार के मुताबिक, नारद कुमार दास ने राजनीतिक पैरवी के दम पर डेपुटेशन के तहत अपना ट्रांसफर योजना एवं विकास विभाग में कराया। इसके बाद मुंगेर में मनचाही पोस्टिंग कराई। ठेकेदार से ले लिया आधा पैसा नाम न छापने की शर्त पर एक ठेकेदार ने बताया, ‘बरियारपुर में 80 लाख रुपए से एक सड़क बनी थी। ठेका दूसरे ठेकेदार के पास था। बारिश और जल जमाव की वजह से काम देर से पूरा हुआ। जब रुपए पास करने की बारी आई तो टाइम एक्सटेंशन के नाम पर प्रोजेक्ट का 50% रुपये काट लिया।’ आरोप है कि 80 लाख में से 40 रुपए ही ठेकेदार को दिए। बाकी का 40 लाख नारद ने खुद ही रख लिया था। यह मामला चंद महीने ही पुराना है। ब्लैकमनी कमाने के नारद के 2 तरीके सूत्रों के मुताबिक, नारद ब्लैक मनी कमाने के लिए पर्दे के पीछे से दो तरह के खेल खेल रहे थे। नौकरी लगते ही कुछ महीनों में बन गए करोड़पति नारद कुमार दास भागलपुर के मूल निवासी हैं। तिलका मांझी के हनुमानपथ में पुश्तैनी घर है। बिहार इंजीनियरिंग सर्विस क्लास-2 के तहत 2014 में इनकी नौकरी जल संसाधन विभाग में बतौर असिस्टेंट इंजीनियर हुई थी। EOU की FIR के मुताबिक, सरकारी नौकरी से पहले इनके पास मात्र 9 लाख 64 हजार 800 रुपए की परिसंपत्तियां थीं। मगर, पिछले 12 सालों में इन्होंने जमकर भ्रष्टाचार किया। अपने पद और सरकारी नौकरी का दुरुपयोग कर खूब काली कमाई की। जहां भी रहे कमीशन में मोटी रकम की उगाही करते रहे। आज ये 2 करोड़ रुपए से अधिक की चल-अचल संपत्ति के मालिक हैं। हाउस वाइफ है सुष्मिता मुजफ्फरपुर के धरमपुर खरौना गांव की रहने वाली सुष्मिता सुमन से नारद कुमार दास की शादी हुई थी। पत्नी हाउस वाइफ हैं। इनके नाम के दो बैंक अकाउंट जांच एजेंसी को मिले थे। एक में 10 लाख 40 हजार तो दूसरे अकाउंट में 39 हजार रुपया जमा था। यही नहीं, जांच टीम ने इनके बैंक अकाउंट की ट्रांजक्शन हिस्ट्री खंगाली। पत्नी के अकाउंट में कई बार बड़ी और मोटी रकम आने के सबूत मिले। फिलहाल सभी अकाउंट्स फ्रिज करा दिए गए हैं। सर्किल रेट से भी कम दाम दिखाया काली कमाई करने वाले नारद ने सबसे बड़ा खेल प्रॉपर्टी खरीदने में किया है। FIR में कुल 4 प्रॉपर्टी की डिटेल्स है। इसमें भागलपुर के सबौर और मुजफ्फरपुर की प्रॉपर्टी अपने वाइफ के नाम खरीदी। तीसरी प्रॉपर्टी भागलपुर के तिलकामांझी में है। पर यह किसके नाम पर है, यह स्पष्ट नहीं है। यहां की जमीन पर इसने घर भी बनवाया है। चौथी और सबसे महंगी प्रॉपर्टी इसने पटना में दानापुर के रूपसपुर में अपनी सास वीणा विद्यार्थी के नाम खरीदी। 19 सितंबर 2026 को इसकी रजिस्ट्री भी करवाई। पटना की इस महंगी प्रॉपर्टी को इसने ऑन पेपर मात्र 50 लाख रुपए में ही खरीदा है। जबकि, सरकार की तरफ से तय सर्किल रेट भी इससे अधिक है, जो 68 लाख 41 हजार रुपए है। वहीं, इसका बाजार भाव डेढ़ करोड़ रुपए से भी अधिक का है। सूत्रों के मुताबिक, बाकी प्रॉपर्टी खरीदने में भी इसी तरह का खेल किया। जमीन महंगी थीं और पेपर पर खरीदारी का रेट बेहद कम का दिखाया। इस पॉइंट पर भी EOU जांच कर रही है। नारद पर शिकंजा कसा कैसे? मुंगेर में रहकर नारद कुमार दास ब्लैकमनी कमाने के लिए दबंगई पर उतर आए थे। किसी ने इसकी लिखित शिकायत EOU को की थी। जानकारी दी कि वो मुख्यमंत्री कार्यालय का नाम लेकर ठेकेदारों का शोषण कर रहा है। इसके बाद एक टीम बनाई गई। टीम ने शिकायतों की जांच की। हर एक पॉइंट को खंगाला। जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद एक-एक प्रॉपर्टी और बैंक डिटेल्स खंगाले। इस दौरान पता चला कि बड़े स्तर पर कैश इसने अपने ससुराल में छिपा रखा है। यही वजह थी कि वहां भी छापेमारी हुई थी और 50.50 लाख रुपया कैश बरामद भी हुआ था। EOU ने 7 दिनों में पूछताछ के लिए बुलाया अब सबसे बड़ा सवाल है कि आगे क्या होगा? इस पर जांच एजेंसी का कहना है कि इस मामले में उनकी जांच जारी है। कई सवाल हैं, जिनके जवाब नारद कुमार दास को देने हैं। सवालों की लंबी लिस्ट तैयार है। नोटिस भेजकर 7 दिन में पूछताछ के लिए बुलाया गया है। जिसमें यह सवाल पूछे जा सकते हैं… 8 अक्टूबर को 5 ठिकानों पर पड़ा छापा छापेमारी में मिला 52 लाख कैश  

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