Surat Crime: 12वीं पास बना MBBS डॉक्टर, खुद के क्लिनिक में करने लगा मरीजों का इलाज, SOG ने किया बड़ा खुलासा

Surat Crime: 12वीं पास बना MBBS डॉक्टर, खुद के क्लिनिक में करने लगा मरीजों का इलाज, SOG ने किया बड़ा खुलासा

Illegal Medical Clinic: सूरत जिले में मांगरोल तहसील के नवापरा और पलसाना में दो फर्जी चिकित्सकों को पुलिस ने पकड़ा है। दोनों आरोपी बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री या सक्षम संस्था के प्रमाण पत्र के धड़ल्ले से एलोपैथिक क्लिनिक संचालित कर लोगों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ कर रहे थे। पहले मामले में एसओजी शाखा के पुलिसकर्मी प्रकाश वालजीभाई की शिकायत के आधार पर मांगरोल तहसील के पालोद पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई।

छह साल तक कंपाउंडर के रूप में काम किया

पुलिस जांच में सामने आया कि पकड़ा गया 44 वर्षीय आरोपी संजय सुभाषभाई मुखर्जी, नवापरा में पायल कॉम्प्लेक्स के पास अवैध रूप से क्लिनिक चला रहा था। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी ने केवल 12वीं कक्षा तक ही पढ़ाई की है। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी ने पश्चिम बंगाल के नदिया स्थित एक अस्पताल में छह साल तक कंपाउंडर के रूप में काम किया था और उसी अनुभव के आधार पर उसने यहां क्लिनिक शुरू कर दिया था।

मनीष क्लीनिक पर छापा

क्लिनिक पर मारे गए छापे के दौरान पुलिस ने विभिन्न प्रकार की एलोपैथिक दवाएं, बीपी मापने की मशीन और स्टेथोस्कोप सहित कुल 5101 रुपए का मेडिकल साजो-सामान जब्त किया है। इस पूरे मामले में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ द गुजरात मेडिकल प्रैक्टिशनर एक्ट 1963 की धारा 30 और 35 के तहत मामला दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। वहीं दूसरे मामले में पलसाणा के पठान पार्क इलाके में एसओजी ने छापेमारी कर बिना मेडिकल डिग्री के मनीष क्लीनिक के नाम से एलोपैथिक दवाएं देकर लोगों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ करने वाले फर्जी चिकित्सक को पकड़ा है।

बिना डिग्री के क्लिनिक शुरू किया

जानकारी के अनुसार कणाव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी को साथ लेकर एसओजी ने पठान पार्क की दुकान नंबर-3 में जांच की थी। इस छापेमारी के दौरान क्लीनिक से मरीजों की जांच करने वाले उपकरणों के साथ-साथ विभिन्न एलोपैथिक दवाएं और इंजेक्शन सहित कुल 14,517 का माल जब्त किया गया। पुलिस जांच में आरोपी की पहचान पश्चिम बंगाल निवासी 35 वर्षीय मिथुन अमरेश बिश्वास के रूप में हुई है। पूछताछ में सामने आया कि वह पहले कड़ोदरा रोड स्थित एक क्लीनिक में कंपाउंडर के तौर पर काम करता था और उसी अनुभव के आधार पर उसने बिना डिग्री के अपना क्लिनिक शुरू कर दिया था।

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