ईरान के राष्ट्रपति का अमेरिका पर हमला, बोले- बातचीत बिगाड़ दी, अब फिर हो समझौते की कोशिश

ईरान के राष्ट्रपति का अमेरिका पर हमला, बोले- बातचीत बिगाड़ दी, अब फिर हो समझौते की कोशिश

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका पर शांति को लेकर अंतरिम समझौते को नाकाम करने का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने बातचीत का रास्ता बंद करने के बजाय एक बार फिर समझौते की कोशिश करने की अपील की है।

ईरान के सरकारी टेलीविजन पर शनिवार को एक इंटरव्यू के दौरान पेजेशकियान ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही थी, लेकिन अमेरिका ने पूरी प्रक्रिया को बिगाड़ दिया। उन्होंने आगे कहा कि दोनों पक्षों को फिर से बातचीत करनी चाहिए और समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश करनी चाहिए।

तनाव खत्म को ईरान तैयार

इस बयान से अब साफ है कि ईरान पुराने मतभेदों और आरोप-प्रत्यारोप के बावजूद तनाव को खत्म करने के लिए तैयार है। इसके लिए वह खुद बातचीत की पेशकश कर रहा है।

पेजेशकियान ने अपने बयान में अमेरिकी रवैये पर नाराजगी जाहिर की। हालांकि, उन्होंने यह खुलकर यह नहीं बताया कि बातचीत के दौरान किस मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी या किस कदम के कारण समझौते की कोशिश नाकाम हुई।

अंतरिम समझौते पर फिर क्यों बढ़ी उम्मीद?

ईरान और अमेरिका के बीच अंतरिम समझौते को लेकर पहले भी बातचीत की खबरें सामने आ चुकी हैं। एक सितंबर 2026 को पेजेशकियान ने कहा था कि अगर अमेरिका अंतरिम समझौते की शर्तों का सम्मान करता है, तो ईरान भी उसी के अनुसार जवाब देगा।

अब उनके ताजा बयान में फिर से समझौते की कोशिश करने पर जोर दिया गया है। इससे संकेत मिलता है कि ईरान बातचीत की संभावना को पूरी तरह छोड़ने के पक्ष में नहीं है।

हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा कब शुरू होगी, इसके लिए कोई नई पहल की गई है या नहीं और क्या दोनों पक्ष किसी साझा शर्त पर सहमत हो पाएंगे।

क्यों नहीं हो पा रहा अमेरिका-ईरान का समझौता?

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधा परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से रोक दे, यूरेनियम संवर्धन कम करे और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को जांच का मौका दे। अमेरिका का मानना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने तैयारी में है।

हालांकि, ईरान इन आरोपों से इनकार करता रहा है और अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों से जोड़ता है। वहीं, अमेरिका इसे खतरा मानता है, यही वजह है कि दोनों के बीच आज तक शांति पर सहमति नहीं बन पाई।

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