(जीवन प्रकाश शर्मा)
नयी दिल्ली, 24 अक्टूबर रेलवे बोर्ड को अभी यह तय करना बाकी है कि क्या रक्त में कुछ मात्रा में अल्कोहल पाए जाने पर भी कोई लोको पायलट ट्रेन परिचालन के लिए उपयुक्त माना जा सकता है या नहीं, जबकि मौजूदा नीति के तहत रक्त में अल्कोहल की मौजूदगी बिल्कुल भी नहीं होनी चाहिए, और इस मामले में जल्द से जल्द कोई फैसला लिया जाना चाहिए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। यह मुद्दा उस वक्त और महत्वपूर्ण हो गया जब रेलवे सुरक्षा आयुक्त की जांच रिपोर्ट में यह सामने आया कि 2025 में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुई दो ट्रेनों की टक्कर के मामले में, ट्रेनों के चालक दल सदस्यों की रक्त जांच में प्रति 100 मिलीलीटर (मिली) रक्त में 3 से 10 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर तक अल्कोहल की मात्रा पाई गई।
बिलासपुर के पास गेवरा-बिलासपुर मेमू पैसेंजर ट्रेन 4 नवंबर 2025 को एक खड़ी मालगाड़ी के पिछले हिस्से से टकरा गई थी। इस हादसे में पैसेंजर ट्रेन के लोको पायलट समेत 12 लोगों की मौत हो गई और करीब 20 अन्य घायल हो गए। रेलवे सुरक्षा आयुक्त की जांच में पाया गया कि पैसेंजर ट्रेन एक लाल सिग्नल को पार कर गई थी।
साथ ही, यह भी पता चला कि लोको पायलट पहले एक अनिवार्य ‘एप्टीट्यूड टेस्ट’ में सफल नहीं हुआ था, इसलिए उसे मेमू सेवा में तैनात नहीं किया जाना चाहिए था। इस घटना की रेलवे सुरक्षा आयुक्त जांच के मुख्य निष्कर्षों में से एक यह था कि, हालांकि ट्रेन का परिचालन करने वाले चालक दल के सदस्यों के ‘ब्रेथलाइज़र टेस्ट’ में अल्कोहल की मात्रा शून्य पाई गई, लेकिन उनके रक्त के नमूनों में एथेनॉल की सांद्रता 10 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर तक पाई गई। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के प्रधान मुख्य चिकित्सा निदेशक, जिनके अधिकार क्षेत्र में दुर्घटना स्थल आता है, ने रेलवे सुरक्षा आयुक्त को सूचित किया था कि सूचीबद्ध निजी प्रयोगशाला 3 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम अल्कोहल की मात्रा का सटीक आकलन नहीं कर सकती, और 10 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम के स्तर को नेगेटिव माना जाता है।
उत्तरी रेलवे सहित कई अन्य रेलवे जोन ने भी इस मुद्दे को उठाया है। उनका कहना है कि ज़्यादातर जोन में रेलवे से जुड़ी या रेलवे की अपनी प्रयोगशालाओं में अल्कोहल की जो न्यूनतम मात्रा पता लगाई जा सकती है, वह 10 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से अधिक है। रेलवे सुरक्षा आयुक्त की टिप्पणी के जवाब में, रेलवे बोर्ड ने उस समय कहा था कि इस मामले की समीक्षा उसके स्वास्थ्य निदेशालय द्वारा की जा रही है।
संपर्क करने पर, रेलवे बोर्ड ने इस मामले पर कोई अद्यतन जानकारी नहीं दी। रेलवे के एक वरिष्ठ जोनल अधिकारी ने कहा, ‘‘इतने महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाए हुए लगभग एक साल हो चुका है, लेकिन यह अभी भी रेलवे बोर्ड के पास लंबित है और इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।’’ उन्होंने बोर्ड से इस पर जल्द फैसला लेने का आग्रह किया। भारतीय रेलवे चिकित्सा नियमावली के प्रावधानों के तहत, रक्त में अल्कोहल का स्तर शून्य होना चाहिए।
लोको पायलटों के संगठन, ‘ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन’ ने वैज्ञानिक अध्ययनों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि कई कारणों से रक्त में एथेनॉल की बहुत कम मात्रा पाई जा सकती है। यहां तक कि जिस व्यक्ति ने शराब नहीं पी है, उसके रक्त में भी अल्कोहल का स्तर 10 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर तक या उससे भी अधिक हो सकता है।

