बैतूल के बोरदेही में स्वामित्व योजना के तहत आबादी की जमीन के मालिकाना हक और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नामों को लेकर विवाद सिविल कोर्ट पहुंच गया है। मामले में कोर्ट ने संबंधित पटवारी और नायब तहसीलदार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। दोनों अधिकारियों को 27 अक्टूबर 2026 को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा गया है। हालांकि, अभी किसी अधिकारी की गलती या लापरवाही साबित नहीं हुई है। बाजार चौक की जमीन को लेकर विवाद विवाद बोरदेही बाजार चौक की आबादी भूमि के स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नामों से जुड़ा है। अधिवक्ता शिवम उपाध्याय ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 1 नियम 10 के तहत संबंधित राजस्व अधिकारियों को भी मामले में पक्षकार बनाने के लिए आवेदन दिया है। विवादित जमीन के संबंध में संरक्षण देने की मांग भी की गई है। 27 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आ सकता है। कोर्ट की ओर से नोटिस जारी होना और किसी अधिकारी का दोष साबित होना अलग-अलग बातें हैं। पटवारियों की भूमिका को लेकर पहले भी विरोध स्वामित्व योजना के तहत दस्तावेज तैयार करने में पटवारियों की भूमिका को लेकर प्रदेश में पहले भी विरोध हो चुका है। पटवारियों की चिंता है कि जमीन से जुड़े विवाद सामने आने पर उन्हें भी कानूनी मामलों में पक्षकार बनाया जा सकता है और आरोपों का सामना करना पड़ सकता है। बैतूल पटवारी संघ के अध्यक्ष मोहनलाल धुर्वे के अनुसार, जिले में अब तक करीब 7 से 8 हजार रजिस्ट्रियां हुई हैं, जबकि लक्ष्य 1.15 लाख रजिस्ट्रियों का है। पटवारियों को आशंका है कि भविष्य में जमीन से जुड़े विवादों में उन्हें भी पक्षकार बनाया जा सकता है। ग्रामीणों के लिए भी महत्वपूर्ण है मामला गांवों में जमीन की पुरानी सीमाओं, पारिवारिक बंटवारे, कब्जे और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नामों को लेकर विवाद सामने आते रहते हैं। स्वामित्व योजना के तहत दस्तावेज मिलने से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति के अधिकार संबंधी रिकॉर्ड मिल सकते हैं। हालांकि, दस्तावेजों में गलती या जमीन पर पहले से विवाद होने की स्थिति में कानूनी प्रक्रिया की जरूरत पड़ सकती है।

