फुटपाथ और डिवाइडर पर लगे यूनिपोल पर हाईकोर्ट सख्त:अनुमति और सुरक्षा मानकों पर उठाए सवाल; 103 की सूची का सत्यापन करेगा इंदौर निगम

फुटपाथ और डिवाइडर पर लगे यूनिपोल पर हाईकोर्ट सख्त:अनुमति और सुरक्षा मानकों पर उठाए सवाल; 103 की सूची का सत्यापन करेगा इंदौर निगम

इंदौर में सड़क डिवाइडरों, मीडियन और पैदल यात्रियों के फुटपाथों पर लगे विज्ञापन यूनिपोल का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। जनहित याचिका में शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थापित करीब 103 यूनिपोल की सूची पेश की गई है। इनमें 58 यूनिपोल सड़क डिवाइडरों और मीडियन पर, जबकि 45 फुटपाथों पर होने का दावा किया गया है। मामले में हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए इंदौर नगर निगम को याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सूची का सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी। याचिकाकर्ता मनीष गडकर और अनिल नायडू की ओर से अधिवक्ता अभिनव पी. धनोतकर ने पैरवी की। याचिका के साथ यूनिपोल की लोकेशन और उनकी भौतिक स्थिति दर्शाने वाले फोटो भी पेश कए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने इन विज्ञापन संरचनाओं की वास्तविक स्थिति की जांच कराने और संबंधित दस्तावेजों का मिलान करने की मांग की है। नियमों के पालन और अनुमति पर सवाल याचिका में मध्य प्रदेश आउटडोर एडवरटाइजमेंट मीडिया रूल्स, 2017 का हवाला देते हुए यूनिपोल की स्थापना में निर्धारित नियमों और स्थान संबंधी मानकों के पालन पर सवाल उठाए गए हैं। विशेष रूप से नियम 28 और नियम 13 के संदर्भ में इन संरचनाओं की वैधानिकता और सुरक्षा मानकों की जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि विज्ञापन यूनिपोल ऐसी जगह नहीं होने चाहिए, जहां से वाहन चालकों की दृश्यता प्रभावित हो या यातायात संकेत देखने में बाधा आए। साथ ही, फुटपाथों पर पैदल यात्रियों के सुरक्षित आवागमन के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध रहनी चाहिए। फुटपाथ पर जगह घटने और हादसों की आशंका याचिका में आशंका जताई गई है कि फुटपाथों पर बड़े आकार के लोहे के यूनिपोल लगाए जाने से पैदल चलने के लिए उपलब्ध जगह कम हो सकती है। इससे बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और दिव्यांगजनों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसी तरह, सड़क डिवाइडरों और प्रमुख चौराहों के आसपास लगी विज्ञापन संरचनाओं से वाहन चालकों की दृश्यता और यातायात संकेतों को देखने में बाधा आने की आशंका भी जताई गई है। याचिकाकर्ताओं ने इन पहलुओं की जांच कर नियमों के अनुसार कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। एमआर-10 से विजय नगर तक की लोकेशन शामिल याचिका में एमआर-10 ब्रिज, लवकुश चौराहा, मारिमाता चौराहा, लालबाग, रेडिसन चौराहा, रोबोट चौराहा, भंवरकुआं, टावर चौराहा, रीगल चौराहा, पलासिया, पिपल्याहाना और विजय नगर सहित शहर के कई प्रमुख स्थानों का उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने इन स्थानों पर लगे यूनिपोल की वास्तविक लोकेशन, स्वीकृत अनुमति, निर्धारित दूरी और संबंधित अभिलेखों का मिलान कराने की मांग की है। इसके लिए स्थलीय निरीक्षण और जीपीएस निर्देशांकों के आधार पर सत्यापन का सुझाव दिया गया है। अनुमति, टेंडर और राजस्व रिकॉर्ड की जांच की मांग याचिका में विज्ञापन संरचनाओं से संबंधित अनुमतियों, निविदा की शर्तों, राजस्व वसूली और स्थान परिवर्तन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग भी की गई है। अब नगर निगम की ओर से सूची के सत्यापन के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि बताए गए यूनिपोल वास्तव में संबंधित स्थानों पर स्थापित हैं या नहीं और उनके संबंध में निर्धारित नियमों तथा अनुमति संबंधी शर्तों का पालन किया गया है या नहीं।

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