Age Regression: डर, तनाव या पुराने सदमे से जुड़ा हो सकता है बचपन जैसा व्यवहार, क्लीवलैंड क्लिनिक से जानिए एज रिग्रेशन के संकेत

Age Regression: डर, तनाव या पुराने सदमे से जुड़ा हो सकता है बचपन जैसा व्यवहार, क्लीवलैंड क्लिनिक से जानिए एज रिग्रेशन के संकेत

Age Regression Symptoms: अचानक बिना किसी बड़ी वजह के रोने लगना, बात करते-करते हकलाने या बच्चों जैसी आवाज (Baby Talk) निकालने लगना, या किसी तनाव भरे पल में अंगूठा चूसने जैसा मन करना, ये ऐसी चीजें हैं जो रोजमर्रा की जिंदगी में अचानक देखने को मिल सकती हैं। जब कोई वयस्क या बड़ा बच्चा तनाव के माहौल में अचानक अपने से बहुत छोटी उम्र के बच्चे जैसा व्यवहार करने लगे, तो चिकित्सा विज्ञान में इसे एज रिग्रेशन (Age Regression) कहा जाता है। यह कोई नाटक या बहाना नहीं है, बल्कि मन और दिमाग का एक सुरक्षा कवच (Defence Mechanism) है। आइए जानते हैं कि Age Regression क्या होता है और इसके लक्षण क्या होते हैं?

एज रिग्रेशन क्या है और यह क्यों होता है?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, जब जिंदगी का दबाव, डर या कोई पुराना सदमा बर्दाश्त से बाहर होने लगता है, तो इंसान का दिमाग अनजाने में ही सही, उस उम्र के बर्ताव में लौट जाता है जहां उसे सबसे ज्यादा सुरक्षित और बेफिक्र महसूस होता था। यह दो तरीकों से हो सकता है;

  • इच्छा से (Voluntary)- जब कोई व्यक्ति खुद को शांत करने या तनाव से राहत पाने के लिए खुद बच्चों वाले खिलौनों, टेडी बियर या बच्चों वाले खेलों का सहारा लेता है।
  • अनजाने में (Involuntary)- जब दिमाग पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और व्यक्ति बिना अपनी इच्छा के बच्चों जैसा व्यवहार करने लगता है।

रोजमर्रा में दिखने वाले मुख्य संकेत और लक्षण

हेल्थलाइन के मुताबिक, अगर आपके आसपास या परिवार में कोई व्यक्ति तनाव के समय अचानक नीचे दिए गए बदलाव दिखाए, तो इसे ध्यान से समझने की जरूरत है;

  • बात-बात पर बच्चों की तरह ज़िद करना, चीखना-चिल्लाना या गुस्से में पैर पटकना।
  • डर या घबराहट में अंगूठा चूसना, शरीर को आगे-पीछे झुलाना या सॉफ्ट टॉय को कसकर पकड़े रहना।
  • अचानक तुतलाकर बोलना, अपनी बात साफ न कह पाना या रोते हुए बात करना।
  • बड़े बच्चों या वयस्कों का अचानक बिस्तर गीला कर देना (Bedwetting)।

Age Regression के पीछे की मुख्य वजहें

यह सिर्फ आम तनाव की वजह से भी हो सकता है और किसी अंदरूनी मानसिक स्थिति का संकेत भी। मुख्य वजहों में शामिल हैं;

  • अत्यधिक तनाव या डर।
  • बचपन में हुआ कोई हादसा, शारीरिक या मानसिक शोषण, जिसके ज़ख्म मन में अब भी हरे हों।
  • एंग्जायटी (Anxiety), डिप्रेशन, या पीटीएसडी (PTSD) जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों में यह लक्षण ज्यादा देखने को मिलता है।

कब सतर्क हों और डॉक्टर से कब मिलें?

बच्चों में कभी-कभार ऐसा बर्ताव होना विकास का एक हिस्सा हो सकता है। लेकिन अगर किसी वयस्क में यह समस्या हफ्ते-दर-हफ्ते बनी रहे, काम-काज पर असर डाले, या उनके आपसी रिश्तों को प्रभावित करने लगे, तो डॉक्टर या थेरेपिस्ट (Mental Health Professional) से परामर्श लेना बहुत जरूरी है। इसे डांटकर या शर्मिंदा करके ठीक नहीं किया जा सकता। थेरेपी (जैसे टॉकिंग थेरेपी) और सही सपोर्ट के ज़रिए व्यक्ति को यह सिखाया जाता है कि तनाव से बच्चों की तरह भागने के बजाय उसका सामना कैसे किया जाए।

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