World Polio Day 2026: जब आपका बच्चा अचानक पैर में हल्का सा दर्द या कमजोरी महसूस करे, या आप सोचें कि बचपन के वे शुरुआती टीके क्यों इतने जरूरी हैं, तो इसके पीछे पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षा का चक्र होता है। पोलियो (पॉलियोमाइलाइटिस) एक ऐसा वायरस है जो सीधे नसों पर हमला करता है और कुछ ही घंटों में इंसान को हमेशा के लिए अपंग यानी लकवाग्रस्त कर सकता है। इस जानलेवा बीमारी से लड़ने का सबसे अचूक और सुरक्षित हथियार है इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन (IPV), यानी निष्क्रिय पोलियो का टीका। यह टीका बच्चों और बड़ों को इस खतरनाक वायरस से दूर रखता है। आइए इस पोलियो डे पर जानते हैं इसके बारे में जरुरी बातें।
आईपीवी (IPV) क्या है और यह शरीर में कैसे काम करता है?
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, आईपीवी मूल रूप से एक इंजेक्टेबल वैक्सीन है, जिसे डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी बच्चे की मांसपेशी या त्वचा के नीचे लगाते हैं। इसमें पोलियो वायरस मृत (इनएक्टिव) रूप में होता है, इसलिए यह खुद बीमारी नहीं फैला सकता। इसके बजाय, यह टीका शरीर के अंदर जाते ही इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को ट्रेन करता है। जब असली पोलियो वायरस कभी शरीर पर हमला करने की कोशिश करता है, तो शरीर का डिफेंस सिस्टम पहले से तैयार होकर उसे तुरंत हरा देता है। यह किसी भी व्यक्ति को पोलियो से होने वाले गंभीर संकट से बचाता है।
यह टीका किसे और कब लगवाना चाहिए?
सीडीसी के मुताबिक, यह वैक्सीन मुख्य रूप से बचपन में ही शुरू कर दी जाती है। बच्चों को इसके पूरे फायदे के लिए आमतौर पर तीन या उससे ज्यादा खुराकें (डोज) दी जाती हैं। डॉक्टरों की सलाह के मुताबिक, समय पर इसका पूरा शेड्यूल पूरा करना बहुत जरूरी है ताकि शरीर में मजबूत सुरक्षा कवच बन सके। यदि बीच में कोई खुराक छूट जाए, तो अपनी मर्जी से फैसला लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और कैच-अप शेड्यूल फॉलो करें। इसके अलावा, जिन वयस्कों को पहले कभी टीका नहीं लगा है या जो किसी ऐसे इलाके में यात्रा कर रहे हैं जहां पोलियो का खतरा है, उन्हें भी डॉक्टर की सलाह पर यह टीका लग सकता है।
वैक्सीन लगवाने से पहले किन बातों का ख्याल रखें?
वैक्सीन लगवाने जाने से पहले डॉक्टर को अपने या अपने बच्चे की सेहत के बारे में खुलकर बताना बहुत जरूरी है। अगर किसी को तेज बुखार है, कोई गंभीर बीमारी है, या पहले कभी किसी टीके या दवाई से गंभीर रिएक्शन (एलर्जी) हुआ हो, तो डॉक्टर को जरूर बताएं। इसके अलावा, जो लोग कैंसर का इलाज करवा रहे हैं, स्टेरॉयड दवाएं खा रहे हैं, या जिनकी इम्युनिटी (रोग से लड़ने की ताकत) कमजोर है, वे डॉक्टर से पूछे बिना यह टीका बिल्कुल न लगवाएं। जो महिलाएं गर्भवती हैं या बच्चे को दूध पिलाती हैं, उन्हें भी डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही आगे बढ़ना चाहिए।
ओपीवी (OPV) क्या है और यह कैसे काम करती है?
ओपीवी (OPV) का पूरा नाम ओरल पोलियो वैक्सीन (Oral Polio Vaccine) है। यह वही जानी-मानी “दो बूंद जिंदगी की” है, जो बच्चों को सीधे मुंह से पिलाई जाती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पोलियो का वायरस कमजोर (अजीवित जैसा) रूप में होता है, लेकिन मारा हुआ नहीं होता। जब यह दवा बच्चे के पेट और आंतों में जाती है, तो वहां यह अपना असर दिखाकर शरीर के अंदर ही पोलियो के खिलाफ मजबूत सुरक्षा चक्र तैयार कर देती है। इस वैक्सीन का एक बहुत बड़ा फायदा यह भी है कि जिन बच्चों को यह पिलाई जाती है, वे आसपास के माहौल में मल या पानी के जरिए इस कमजोर वायरस को थोड़ा-बहुत बाहर छोड़ते हैं, जिससे उनके आस-पास के दूसरे बच्चों को भी बिना टीका लगे नेचुरल तरीके से थोड़ी सुरक्षा मिल जाती है। हालांकि, बहुत ही दुर्लभ मामलों में (लाखों में किसी एक बच्चे को) इस कमजोर वायरस से हल्की समस्या या वैक्सीन-जनित पोलियो का खतरा हो सकता है, इसीलिए आज के समय में डॉक्टर आईपीवी (इंजेक्शन) और ओपीवी (दो बूंद) दोनों के मेल को सबसे सुरक्षित मानते हैं।
ओपीवी (OPV) और आईपीवी (IPV) की खुराक कब-कब दी जाती है?


