दिल्ली में सूचना के अधिकार (RTI) से मिली जानकारी के मुताबिक, कैबिनेट सचिवालय ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की शिकायत पर वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। दोनों आयुक्तों ने 29 जुलाई को कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखकर गर्ग के कामकाज पर सवाल उठाए थे। हालांकि, कैबिनेट सचिवालय का मानना था कि ये पत्र पूरे चुनाव आयोग की आधिकारिक शिकायत नहीं थे। ऐसे में कार्रवाई करना संवैधानिक संस्था के काम में दखल माना जा सकता था। RTI कार्यकर्ता और रिटायर्ड कमोडोर लोकेश के. बत्रा को मिले जवाब से यह जानकारी सामने आई है। गर्ग को 2 सितंबर 2024 को कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) के जरिए चुनाव आयोग में तैनात किया गया था। शिकायतों में आरोप लगाया गया कि उन्होंने आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के कामकाज में बदलाव करने का आदेश जारी किया, जबकि इस बारे में न तो आयोग से चर्चा की गई और न ही संबंधित अधिकारियों की मंजूरी ली गई। EC ने कहा- पत्र मनीष गर्ग की रिजॉइनिंग से जुड़े थे कैबिनेट सचिवालय का शिकायत रिकॉर्ड में रखने का फैसला कैबिनेट नोट में 2023 के कानून की धारा 18 का जिक्र किया गया। इसके मुताबिक, चुनाव आयोग को सर्वसम्मति से फैसले लेने की कोशिश करनी चाहिए और मतभेद होने पर बहुमत से निर्णय लिया जा सकता है। नोट में कहा गया कि मनीष गर्ग के कामकाज और आचरण से जुड़े मामलों पर चुनाव आयोग के नियमों के तहत विचार होना चाहिए। 3 अगस्त को तैयार एक नोट में मुख्य चुनाव आयुक्त से इस मामले पर राय लेने का सुझाव दिया गया था। हालांकि, अगले दिन के नोट में कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों की शिकायत को पूरे आयोग की आधिकारिक शिकायत नहीं माना जा सकता। कैबिनेट सचिवालय के मुताबिक, चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उसके कामकाज में कार्यपालिका का हस्तक्षेप उचित नहीं होगा। कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने 5 अगस्त 2026 को दोनों पत्र मिलने की पुष्टि की थी। शिकायतों की प्रतियां कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), स्थापना अधिकारी और मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय को भेजी गईं। कैबिनेट सचिव के हस्ताक्षर वाले नोट में शिकायतों को रिकॉर्ड पर रखने का फैसला किया गया, ताकि भविष्य में संबंधित अधिकारी के बारे में निर्णय लेते समय उन पर विचार किया जा सके।
चुनाव आयोग अधिकारी पर कामकाज में दखल देने का आरोप:सुखबीर संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव से शिकायत की थी, कार्रवाई नहीं हुई

