Donald Trump on Iran: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन से पहले कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ाने की हर संभव कोशिश कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि तेहरान तेल बाजार में अस्थिरता पैदा करने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फर्जी हमले करवा रहा है और सुरक्षा से जुड़े झूठे दावे कर रहा है। ट्रंप ने कहा कि इन दावों के बावजूद हकीकत यह है कि संघर्ष शुरू होने से पहले की तुलना में अभी होर्मुज जलडमरूमध्य से कहीं अधिक तेल गुजर रहा है।
ट्रंप ने ईरान को दुष्ट शासन बताया
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी प्रशासन को एक दुष्ट शासन बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरानी अधिकारी प्रदर्शनकारियों और उनके रास्ते में आने वाले किसी भी व्यक्ति की सुनियोजित तरीके से हत्या कर रहे हैं। ट्रंप ने दावा किया कि सात महीने से भी कम समय में लगभग 75,000 प्रदर्शनकारियों की जान जा चुकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिकी जनता और बाकी दुनिया इस शासन की असली क्रूरता को समझ पाएगी।
इसके अलावा, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह बेहद चौंकाने वाली बात है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी, दोनों ही इस खून-खराबे और मानवाधिकारों के लगातार हो रहे उल्लंघन को लेकर पूरी तरह उदासीन और बेपरवाह बने हुए हैं।
परमाणु हथियारों पर ट्रंप का सख्त रुख
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका के रुख को दोहराते हुए ट्रंप ने कड़ी चेतावनी दी कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं कर सकता और कभी कर भी नहीं पाएगा।
ईरान की कमर तोड़ दी है- ट्रंप
इधर, व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर एक बार फिर सैन्य हमला करने के सीधे संकेत दिए। तेहरान पर हाल ही में हुए हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान की कमर तोड़ दी है और अगर जरूरत पड़ी, तो वे इन कार्रवाइयों को और तेज करने के लिए तैयार हैं।
जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या ईरान के साथ इस युद्ध का असर मिडटर्म चुनाव से पहले अमेरिकी मतदाताओं के मूड पर असर डाल रहा है, तो ट्रंप ने कहा कि एक तरह से लोग इसका समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि वे ऐसे कदम उठा रहे हैं जो पिछले राष्ट्रपतियों को बहुत पहले ही उठा लेने चाहिए थे। हालांकि उन्होंने माना कि इस सैन्य रुख की एक राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है, लेकिन उन्होंने कहा कि किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

