Afghanistan Earthquake Today: हिमालय और तिब्बत पठार का इलाका फिर से हिल उठा। गुरुवार को तिब्बत में 7.0 तीव्रता का जोरदार भूकंप आया, जिसकी गहराई 173 किलोमीटर बताई गई। लगभग उसी समय अफगानिस्तान में भी 4.1 तीव्रता के झटके दर्ज हुए। ये घटनाएं उस वक्त हुईं जब नेपाल-तिब्बत सीमा पर अगस्त में आई बर्फ-चट्टान हिमस्खलन से बाढ़ के बाद राहत और बचाव का काम अभी चल रहा है। क्षेत्र की संवेदनशीलता एक बार फिर साफ नजर आ रही है।
Afghanistan Earthquake Today: अफगानिस्तान में 4.1 तीव्रता का भूकंप, सुबह-सुबह महसूस हुए झटके
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) के अनुसार शुक्रवार सुबह 5:54 बजे अफगानिस्तान में 4.1 तीव्रता का भूकंप आया। झटके हल्के थे, लेकिन क्षेत्र में हलचल साफ महसूस की गई।
Tibet Earthquake 7.0 Magnitude: तिब्बत में 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, 173 किलोमीटर थी गहराई
उधर तिब्बत में गुरुवार को कहीं ज्यादा शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया। भूकंपीय आंकड़ों के मुताबिक इसकी तीव्रता 7.0 और गहराई 173 किलोमीटर थी। इतनी गहराई वाले भूकंप आमतौर पर सतह पर कम नुकसान पहुंचाते हैं, फिर भी हिमालयी पट्टी में रहने वाले लोग चिंतित हैं।
तिब्बत में गुरुवार को आए 7.0 तीव्रता के भूकंप ने बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान पहुंचाया है। हादसे में 16 लोगों की मौत हुई, जबकि 32 अन्य घायल हो गए। 300 से अधिक मकान ढहने के बाद प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है। इस घटना ने एक बार फिर भूकंप-संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
यह भूकंप नेपाल में 8 सितंबर को आए पिछले झटके के बाद की बड़ी घटना है। सबसे चिंता की बात यह है कि ये झटके उस वक्त आए जब नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को बर्फ और चट्टान के हिमस्खलन से आई बाढ़ के बाद राहत कार्य अभी भी जारी हैं। उस आपदा में घर, सड़कें और पुल बह गए थे। कई जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुईं और हजारों लोग लापता बताए गए।
स्थानीय प्रशासन और विशेषज्ञ क्षेत्र की नाजुक स्थिति पर लगातार चेतावनी दे रहे हैं। अत्यधिक मौसम, ग्लेशियरों का पीछे हटना और बढ़ता तापमान यहां भविष्य के खतरों को बढ़ा रहा है। चीनी शोधकर्ताओं ने साफ कहा है कि जलवायु परिवर्तन के कारण चिंगहाई-तिब्बत पठार पर ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इससे आने वाले दिनों में और बड़ी आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है।
यह पठार ब्रह्मपुत्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय नदियों का उद्गम स्थल है। यहां पर्यावरण में कोई भी बड़ा बदलाव नीचे की ओर बसे इलाकों भारत, बांग्लादेश और अन्य देशों के लिए चिंता का विषय बन जाता है। पानी का प्रवाह, बाढ़ का खतरा और मिट्टी का कटाव सब प्रभावित हो सकते हैं।
भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील है हिमालय और तिब्बत का क्षेत्र
भूवैज्ञानिक लंबे समय से हिमालय और तिब्बत पठार को भूकंप के लिहाज से सक्रिय जोन मानते आए हैं। यहां दो बड़ी प्लेटों के टकराव से लगातार दबाव बनता रहता है। साथ ही जलवायु संकट ने इस क्षेत्र को और संवेदनशील बना दिया है।
एनसीएस और अंतरराष्ट्रीय भूकंपीय आंकड़ों पर आधारित इन घटनाओं से साफ है कि हिमालयी क्षेत्र में सतर्कता बरतने की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा है। बचाव तैयारियां, पूर्व चेतावनी प्रणाली और जलवायु अनुकूल उपाय अब सिर्फ चर्चा का विषय नहीं, बल्कि जरूरी कदम बन चुके हैं।
(स्रोत: नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी एवं भूकंपीय आंकड़े)

