East Delhi में फटे नोट के विवाद में पिटाई के बाद Delivery Boy समीर हुसैन ने की खुदकुशी

East Delhi में फटे नोट के विवाद में पिटाई के बाद Delivery Boy समीर हुसैन ने की खुदकुशी

पूर्वी दिल्ली में फटे नोट को लेकर दो लोगों द्वारा पीटे जाने से आहत होकर सामान पहुंचाने वाली कंपनी के प्रतिनिधि ने कथित रूप से जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया और 24वें जन्मदिन से एक दिन पहले उसने अस्पताल में दमतोड़ दिया। उसने एक वीडियो रिकॉर्ड किया था जिसमें उसने 10 रुपये के फटे नोट को लेकर सार्वजनिक रूप से आत्मसम्मान को ठेस पहुंचने की बात कही। पुलिस के अनुसार, समीर हुसैन 21 अक्टूबर को 24 वर्ष का होने वाला था।

उसपर चार अक्टूबर की रात ईस्ट विनोद नगर के दो निवासियों ने तब हमला कर दिया जब उसने उनसे फटा हुआ नोट बदलने या ऑर्डर रद्द करने का अनुरोध किया था। अधिकारियों ने बताया कि 20 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि दो आरोपियों, राकेश उर्फ बंटी (30) और रामपाल सिंह (65) को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस के मुताबिक, चार अक्टूबर को रात 11 बजकर तीन मिनट पर इस घटना के संबंध में पुलिस नियंत्रण कक्ष (पीसीआर) को फोन आया था। हुसैन ने सूचना दी थी कि आरोपियों ने फटे नोट को लेकर उस पर हमला किया है। पुलिस ने बताया कि इसके बाद देर रात हुसैन की चिकित्सकीय-कानूनी रिपोर्ट (एमएलसी) तैयार की गई और उसी दिन कल्याणपुरी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।

पुलिस को बाद में सूचना मिली कि हुसैन ने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था और उसे पांच अक्टूबर को लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 20 अक्टूबर को उसकी मृत्यु हो गई, जिसके बाद प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 जोड़ दी गई जो आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित है। ज़हर खाने से पहले रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में, हुसैन ने खुद को एक ऐसे शख्स बताया जो ईमानदारी की कमाई में विश्वास रखता था।

उसने कहा कि वह साइकिल पर ऑर्डर की आपूर्ति करता था क्योंकि उसके पास कोई गाड़ी नहीं थी। वीडियो में उसने कहा, “मैं कड़ी मेहनत करने में विश्वास रखता हूं। मेरे पास कोई गाड़ी नहीं है, इसलिए मैं साइकिल पर आपूर्ति करता हूं।

मेरा मानना है कि कम खाऊंगा लेकिन अपनी मेहनत का खाऊंगा।”
चार अक्टूबर की घटना का जिक्र करते हुए हुसैन ने कहा कि ग्राहक ने लगभग 150 रुपये मूल्य के कॉफी ऑर्डर के लिए नकदी की व्यवस्था करने में करीब 15 मिनट लगा दिए। उसने कहा कि उसने देरी पर कोई आपत्ति नहीं जताई, लेकिन ग्राहक से 10 रुपये का फटा नोट बदलने का अनुरोध किया। हुसैन ने कहा, “मैंने उससे विनम्रतापूर्वक कहा, ‘अंकल, कृपया इसे बदल दें’, लेकिन वह बदतमीजी करने लगा।

उसने कहा, ‘मेरे पास यही है, लेना है तो लो वरना यहां से जाओ’।”
उसने आरोप लगाया कि इसके बाद व्यक्ति ने उसे तीन थप्पड़ मारे। उसने कहा कि उसने कोई पलटवार नहीं किया, लेकिन अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर अपमानित किए जाने से उसे गहरा दुख पहुंचा। उसने वीडियो में पूछा, “क्या गरीब होना कोई गाली है?” उसने कहा कि उसने कभी अपने पिता से पैसे नहीं मांगे क्योंकि वह अपने आप कमाना चाहता था।

हुसैन ने यह डर भी व्यक्त किया कि पैसे की कमी के कारण उसे न्याय नहीं मिलेगा और हिंसा का सामना करने पर आपूर्ति कर्मचारियों को मिलने वाले समर्थन पर सवाल उठाया। उसने वीडियो में कहा, “मैं आत्महत्या कर लूंगा, क्योंकि बीच सड़क पर वैसे भी मेरा स्वाभिमान धूमिल हो चुका है।”
अपनी मां को संबोधित करते हुए उसने कहा कि वह खुद को मजबूत मानता था लेकिन उसे डर था कि परिस्थितियां उसे शांति से जीने नहीं देंगी। उसने कहा कि थप्पड़ ने उसे गहराई से ठेस पहुंचाई है।

उसके चाचा मोहम्मद समीर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि हुसैन चार अक्टूबर को रात करीब 10.30 बजे ईस्ट विनोद नगर में कॉफी का ऑर्डर देने गया था, तभी फटे नोट को लेकर विवाद हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि रामपाल ने हुसैन को कई थप्पड़ मारे, जिसके बाद उसका पोता राकेश उर्फ बंटी आया और लोहे की छड़ से उस पर हमला किया। उसके चाचा ने दावा किया कि कथित हमले के बाद, हुसैन अपने कार्यालय लौट आया और अपने प्रबंधक को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद कुछ लोगों को आरोपियों के निवास पर भेजा गया।

उन्होंने आरोप लगाया, “वे नीचे नहीं आए और अपने घर से चिल्लाए कि तुम दूसरे समुदाय के हो और हम किसी से नहीं डरते।”
उन्होंने बताया कि इसके बाद परिवार ने कल्याणपुरी थाने में शिकायत दर्ज कराई। उसके चाचा ने दावा किया कि परिवार को यह नहीं पता था कि घटना के बाद हुसैन को फिर से धमकी दी गई थी या नहीं, लेकिन उन्होंने कहा कि बाद में उसने कॉकरोच मारने के लिए इस्तेमाल होने वाले जहर का सेवन कर लिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हुसैन ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया था जिसमें उसने दोनों आरोपियों के नाम लिए थे और हमले का विवरण दिया था।

समीर ने कहा, “उसने यह भी कहा कि अगर मुझे जीते जी न्याय नहीं मिल रहा है, तो मुझे उम्मीद है कि मरने के बाद मिलेगा। हम उसके लिए न्याय की मांग करते हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि आपूर्ति प्रतिनिधि का प्रबंधक परिवार को धमकी दे रहा था और दावा कर रहा था कि हुसैन उस समय ड्यूटी पर नहीं था। उन्होंने बताया कि हुसैन एक प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनी के लिए काम करता था।

हुसैन की मां कलीमा ने कहा कि बहस के दौरान उनके बेटे को कथित तौर पर अपमानित किया गया था, और आरोपियों ने दावा किया था कि उनके राजनीतिक संबंध हैं और वे किसी भी बात से बच सकते हैं। उन्होंने पूछा, “जब उसने उनसे फटा हुआ नोट बदलने के लिए कहा, तो उन्होंने उससे बहुत सी बातें कहीं, जैसे कि तुम गरीब हो, मैं तुम्हारे साथ कुछ भी करूंगा, मेरा कुछ नहीं होगा, मेरे राजनीतिक संबंध हैं। क्या गरीब होना अपराध है?”
उन्होंने कहा, “मैं सरकार से कहना चाहती हूं कि मैंने एक जवान बेटा खो दिया है।

वह 21 अक्टूबर को 24 साल का होने वाला था।”

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