केरलम में SMA दवाओं को लेकर विवाद के बीच मंत्री K Muraleedharan की बैठक पर सफाई

केरलम में SMA दवाओं को लेकर विवाद के बीच मंत्री K Muraleedharan की बैठक पर सफाई

‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी ’(एसएमए) से पीड़ित बच्चों के लिए किफायती भारतीय दवाओं के वितरण को लेकर जारी विवाद के बीच केरलम के स्वास्थ्य मंत्री के मुरलीधरन की एक घरेलू दवा कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात की तस्वीरें बृहस्पतिवार को सामने आईं। मुरलीधरन के कार्यालय में हुई इस हालिया मुलाकात की तस्वीरें कुछ टीवी चैनल द्वारा दिखाए जाने के बाद मंत्री ने पहले तो कंपनी के किसी भी प्रतिनिधि से मिलने की बात से इनकार किया, लेकिन बाद में कहा कि हो सकता है कि उन्होंने अपने कार्यालय में कई लोगों से मुलाकात की हो। मुरलीधरन ने कोझिकोड में संवाददाताओं के एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘इसका सरकार के (भारत में बनी एसएमए दवाएं उपलब्ध कराने के) फैसले से कोई लेना-देना नहीं है।’’
तस्वीरों में उन्हें कुछ दस्तावेज सौंपे जाते दिखने के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि लोग अक्सर उन्हें तरह-तरह के दस्तावेज और रिपोर्ट देते रहते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन सरकार विशेषज्ञों से चर्चा किए बिना कोई फैसला नहीं करेगी। विशेषज्ञों ने एसएमए दवाओं को लेकर सरकार के फैसले का समर्थन किया है।’’
मुरलीधरन ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी इस तरह की बीमारियों के इलाज के लिए दवाएं उपलब्ध नहीं होना शर्म की बात है। मंत्री ने बुधवार को कहा था कि किफायती भारतीय दवाएं एसएमए से पीड़ित बच्चों को एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर दी जा रही हैं।

उन्होंने बताया था कि इस समिति ने दवाओं की गुणवत्ता का आकलन किया था। मुरलीधरन ने कहा था कि यह प्रक्रिया पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी। उन्होंने कहा था कि सरकार ने एसएमए के लिए नयी दवा कम कीमत पर अधिक से अधिक लोगों को उपलब्ध कराने का फैसला किया है।

एसएमए के मरीजों को ‘डॉक्टर के लिए नमूने’ और ‘क्लीनिकल परीक्षण के लिए’ लेबल वाली दवाएं दिए जाने के मुद्दे पर मुरलीधरन ने कहा था कि इस संबंध में कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने हाल में एक फेसबुक पोस्ट में इस खबर पर हैरानी जताई थी कि एसएमए से पीड़ित बच्चों को उनके माता-पिता की सहमति के बिना ‘क्लीनिकल परीक्षण’ वाली प्रायोगिक दवाएं दी गईं। उन्होंने इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।

एसएमए एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जिसके कारण मांसपेशियों का लगातार क्षय होने लगता है। इस बीच, यहां सरकारी एसएटी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. रियास ने अस्पताल के बाल वार्ड की खराब हालत को सुधारने के लिए एक दवा कंपनी की ओर से दी गई मदद को नकारात्मक रूप में पेश करने की कोशिशों की आलोचना की। श्री अवित्तम तिरुनल अस्पताल (जो आमतौर पर एसएटी अस्पताल के नाम से जाना जाता है) में राज्य का पहला सरकारी ‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी’ क्लीनिक है।

एक बयान में डॉ. रियास ने कहा कि ‘चैरिटेबल सोसाइटीज एक्ट’ के तहत अस्पताल के एक हिस्से के रूप में काम कर रही सोसाइटी ‘एसएटीएचएचईएस’ मरीजों की देखभाल सुविधाओं को बेहतर बनाने और स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रम आयोजित करने के लिए विभिन्न एजेंसियों, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के संस्थानों तथा व्यक्तियों से कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व फंड प्राप्त करती है। उन्होंने कहा कि इस कोष का इस्तेमाल अस्पताल में मरीजों की देखभाल से संबंधित विकास गतिविधियों के लिए किया जाता है। बयान में कहा गया है कि स्थिति का जायजा लेने के लिए कंपनी प्रतिनिधियों के प्रत्यक्ष दौरे के बाद, दवा कंपनी ने 25 लाख रुपये की पहली किस्त ‘एसएटीएचएचईएस’ के खाते में डाली थी।

डॉ. रियास ने बताया कि इसके बाद अगस्त के पहले हफ्ते में कंपनी के प्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात की और इस संबंध में उन्हें एक प्रमाण पत्र सौंपा। उन्होंने बताया कि इस दौरे के दौरान भीड़ के बीच ली गई एक तस्वीर को अब इस तरह पेश किया जा रहा है, मानो एसएमए दवाओं को लेकर हुए विवाद के बाद मंत्री ने कंपनी के प्रतिनिधियों से मुलाकात की हो। डॉ. रियास ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए संबंधित लोगों से इस तरह के दुष्प्रचार अभियान बंद करने की अपील की।

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