सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ 29 लाख रुपए के जाली भारतीय नोट मिलने के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अपनी जांच तेज कर दी है। इस सिलसिले में एजेंसी ने दो और आरोपितों को अरेस्ट किया है। इनमें अजय कुमार को हरियाणा के अंबाला से और हरीश रौंटा को हिमाचल प्रदेश के मनाली से पकड़ा गया है। दोनों को पहले गिरफ्तार किए जा चुके करेंसी चेस्ट के संविदा ड्राइवर आदेश चौधरी का करीबी बताया जा रहा है। दो नई गिरफ्तारियों के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। एनआईए अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट कहां तैयार किए गए, उन्हें किन लोगों और माध्यमों से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया गया और बैंक की करेंसी चेस्ट में उनकी मौजूदगी कैसे सामने आई। एजेंसी का जोर इस पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों के बीच संपर्क और कथित साजिश की भूमिका स्पष्ट करने पर है। सात लाख रुपए के नकली नोटों से शुरू हुई थी जांच मामले की शुरुआत 29 अगस्त को हुई थी। उस दिन पीएनबी के मेरठ मंडल के मुख्य प्रबंधक अरुण कुमार चौबे ने सहारनपुर के सदर बाजार थाना पुलिस को घंटाघर स्थित सोफिया मार्केट की करेंसी चेस्ट में सात लाख रुपये के नकली नोट मिलने की जानकारी दी थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। शुरुआत में सामने आई जाली मुद्रा की मात्रा सात लाख रुपये बताई गई थी, लेकिन मुख्यालय के निर्देश पर नोटों की जांच आगे बढ़ने के साथ मामला गंभीर होता चला गया। विस्तृत जांच में जाली नोटों की कुल राशि बढ़कर 17 करोड़ 29 लाख रुपये तक पहुंच गई। इतनी बड़ी रकम के नकली नोट मिलने से बैंकिंग व्यवस्था और जाली मुद्रा की संभावित सप्लाई चेन को लेकर जांच एजेंसियों की सक्रियता बढ़ गई। इस मामले में करेंसी चेस्ट से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जगाधरी करेंसी चेस्ट के प्रबंधक अमित कुमार, सहारनपुर मंडल के प्रबंधक रवि कांसे और सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट के प्रबंधक सुशील कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। तीन सितंबर को एनआईए ने संभाली जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सितंबर को राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने जांच अपने हाथ में ले ली। इसके बाद जांच केवल बैंक में मिले नकली नोटों तक सीमित नहीं रही, बल्कि जाली मुद्रा के संभावित स्रोत, उसकी आपूर्ति और इस काम में शामिल लोगों के नेटवर्क की पड़ताल भी शुरू की गई। एनआईए यह जानने की कोशिश कर रही है कि जाली नोटों की खेप तैयार करने से लेकर उन्हें बैंक की करेंसी चेस्ट तक पहुंचाने के बीच कौन-कौन लोग सक्रिय थे। साथ ही, ये भी जांच की जा रही है कि करेंसी चेस्ट में तैनात कर्मचारियों और अन्य आरोपितों के बीच किस तरह के संपर्क थे और इस पूरे मामले में प्रत्येक व्यक्ति की कथित भूमिका क्या रही। पहले पांच आरोपितों की हो चुकी है गिरफ्तारी इस प्रकरण में एनआईए इससे पहले पांच लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें जगाधरी करेंसी चेस्ट के प्रबंधक अमित कुमार, संविदा पर ड्राइवर के पद पर तैनात आदेश चौधरी, मुकेश कुमार, राजेंद्र और नीतू शामिल हैं। अब अजय कुमार और हरीश रौंटा की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपितों की संख्या सात हो गई है। जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों नए आरोपित पहले गिरफ्तार किए गए लोगों के संपर्क में थे। आदेश चौधरी से उनकी नजदीकी को देखते हुए उनके संबंधों और कथित साजिश में उनकी भूमिका की पड़ताल की जा रही है। अजय कुमार को 16 अक्टूबर को अंबाला से गिरफ्तार किया गया, जबकि हरीश रौंटा की गिरफ्तारी 22 अक्टूबर को हिमाचल प्रदेश के मनाली से हुई। अलग-अलग राज्यों से हुई इन गिरफ्तारियों के बाद एजेंसी अब आरोपितों के आपसी संपर्कों और जाली नोटों की आवाजाही से जुड़े संभावित रास्तों की जांच कर रही है। छपाई से परिवहन तक नेटवर्क की तलाश एनआईए की जांच का सबसे अहम पहलू यह पता लगाना है कि 17.29 करोड़ रुपये की जाली मुद्रा तैयार करने और उसे बैंक की करेंसी चेस्ट तक पहुंचाने के पीछे कौन-सा नेटवर्क काम कर रहा था। एजेंसी जाली नोटों की छपाई, उनके परिवहन, सप्लाई और संबंधित लोगों के बीच संपर्कों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच में यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि नकली नोट कहां तैयार हुए और उन्हें किन माध्यमों से संबंधित स्थानों तक पहुंचाया गया। इसके अलावा, इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोटों का बैंक की करेंसी चेस्ट तक पहुंचना किन परिस्थितियों में संभव हुआ, इसकी भी पड़ताल की जा रही है। अजय कुमार और हरीश रौंटा की गिरफ्तारी को इसी जांच का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, उनकी कथित भूमिका और अन्य आरोपितों के साथ उनके संबंधों के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। संदिग्धों की पहचान के प्रयास जारी एनआईए इस मामले में व्यापक साजिश का पता लगाने के लिए अन्य सह-आरोपितों और संदिग्धों की पहचान करने में जुटी है। एजेंसी उन संपर्कों को खंगाल रही है, जिनके जरिए जाली नोटों की खेप तैयार होने से लेकर उसके परिवहन और करेंसी चेस्ट तक पहुंचने की प्रक्रिया पूरी हुई हो सकती है। ताजा गिरफ्तारियों के बाद जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण आरोपितों के बीच संपर्कों की पुष्टि करना और कथित सप्लाई चेन का पता लगाना है। एजेंसी यह भी जानने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क में अन्य कौन लोग शामिल हो सकते हैं और उनकी क्या भूमिका रही है। पीएनबी की करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ 29 लाख रुपए के जाली नोट मिलने का यह मामला अब कई राज्यों से जुड़े संभावित नेटवर्क की जांच तक पहुंच गया है। एनआईए की कार्रवाई का उद्देश्य जाली मुद्रा के स्रोत से लेकर बैंक तक उसकी पहुंच के पूरे घटनाक्रम का खुलासा करना है। फिलहाल जांच जारी है और एजेंसी अन्य संदिग्धों की भूमिका का पता लगाने में जुटी हुई है।

