फेसबुक पर नौकरी का झांसा देकर थाईलैंड भेजा:बंदूक की नोक पर काम कराने का आरोप, नदी पार करा म्यांमार पहुंचाया

फेसबुक पर नौकरी का झांसा देकर थाईलैंड भेजा:बंदूक की नोक पर काम कराने का आरोप, नदी पार करा म्यांमार पहुंचाया

बेतिया के आबिद शाह विदेश में नौकरी के झांसे में ठगी का शिकार हुए हैं। परिवार का आरोप है कि फेसबुक पर नौकरी का प्रस्ताव देकर उसे दिल्ली बुलाकर थाईलैंड भेजा। बैंकॉक पहुंचने के कुछ दिन बाद उसे म्यांमार के साइबर ठगी केंद्र ले जाया गया। आबिद के पिता मोहम्मद शहाबुद्दीन का दावा है कि बेटे का पासपोर्ट छीनकर बंदूक की नोक पर उससे तीन साल तक काम कराने के लिए समझौता कराया गया है। उन्होंने केंद्र सरकार से बेटे को सुरक्षित वापस लाने की गुहार लगाई है। नदी पार करा म्यांमार पहुंचा दिया शहाबुद्दीन के अनुसार, आबिद को फेसबुक पर थाईलैंड की टेक एशिया कंपनी में नौकरी का प्रस्ताव मिला था। दिल्ली में इंटरव्यू के बाद उसे टिकट और वीजा भेजे गए। वह 3 तारीख को दिल्ली से बैंकॉक पहुंचा। पिता का आरोप है कि कुछ दिन होटल में रहने के बाद आधी रात को दो लोग उसे गाड़ी से ले गए, जहां करीब पांच घंटे के सफर के दौरान मंजिल पूछने पर उसे पिस्तौल दिखाकर धमकाया गया। फिर नदी पार कराकर म्यांमार पहुंचा दिया गया। पासपोर्ट छीनने और प्रताड़ित करने का आरोप शहाबुद्दीन का दावा है कि आबिद से रात एक बजे से सुबह 11 बजे तक काम कराया जाता है। उसे दिन में केवल दो बार खाना दिया जाता है। काम करने से इनकार करने पर प्रताड़ित किया जाता है। पिता के मुताबिक, आबिद लगातार मैसेज और लोकेशन भेजकर मदद मांग रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि कैंप में भारत समेत अन्य देशों के 400 से 500 युवक फंसे हो सकते हैं। हालांकि, इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आबिद की मौजूदा स्थिति और उसके बताए गए स्थान की भी आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे से मांगी मदद शहाबुद्दीन के अनुसार, उन्होंने केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे से मुलाकात कर बेटे की सुरक्षित वापसी के लिए सहायता मांगी है। उनके मुताबिक, मंत्री ने सहयोग का आश्वासन दिया है। बेटे को वापस लाने की उम्मीद में वह सप्तक्रांति एक्सप्रेस से दिल्ली जा रहे हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया के विभिन्न देशों में नौकरी का झांसा देकर युवाओं को साइबर ठगी केंद्रों तक पहुंचाने के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे गिरोह आकर्षक वेतन का लालच देकर युवाओं को फंसाते हैं और बाद में उनसे जबरन ठगी कराने की शिकायतें सामने आती हैं। फिलहाल आबिद का परिवार उसकी सुरक्षा को लेकर चिंतित है। परिजनों ने केंद्र सरकार से आबिद समेत वहां फंसे अन्य भारतीयों को सुरक्षित निकालने की मांग की है। SDPO सदर वन अजीत कुमार ने बताया कि, ‘कोई भी व्यक्ति मिसिंग होता हैं तो उसकी जानकारी स्थानीय थाने को दी जाती हैं। लेकिन अभी तक इस मामले में पुलिस को जानकारी नहीं है। अगर इस तरह के मामला है तो उसकी लोकेशन जांच कर सुरक्षित वापस लाने का प्रयास किया जाएगा।’ बेतिया के आबिद शाह विदेश में नौकरी के झांसे में ठगी का शिकार हुए हैं। परिवार का आरोप है कि फेसबुक पर नौकरी का प्रस्ताव देकर उसे दिल्ली बुलाकर थाईलैंड भेजा। बैंकॉक पहुंचने के कुछ दिन बाद उसे म्यांमार के साइबर ठगी केंद्र ले जाया गया। आबिद के पिता मोहम्मद शहाबुद्दीन का दावा है कि बेटे का पासपोर्ट छीनकर बंदूक की नोक पर उससे तीन साल तक काम कराने के लिए समझौता कराया गया है। उन्होंने केंद्र सरकार से बेटे को सुरक्षित वापस लाने की गुहार लगाई है। नदी पार करा म्यांमार पहुंचा दिया शहाबुद्दीन के अनुसार, आबिद को फेसबुक पर थाईलैंड की टेक एशिया कंपनी में नौकरी का प्रस्ताव मिला था। दिल्ली में इंटरव्यू के बाद उसे टिकट और वीजा भेजे गए। वह 3 तारीख को दिल्ली से बैंकॉक पहुंचा। पिता का आरोप है कि कुछ दिन होटल में रहने के बाद आधी रात को दो लोग उसे गाड़ी से ले गए, जहां करीब पांच घंटे के सफर के दौरान मंजिल पूछने पर उसे पिस्तौल दिखाकर धमकाया गया। फिर नदी पार कराकर म्यांमार पहुंचा दिया गया। पासपोर्ट छीनने और प्रताड़ित करने का आरोप शहाबुद्दीन का दावा है कि आबिद से रात एक बजे से सुबह 11 बजे तक काम कराया जाता है। उसे दिन में केवल दो बार खाना दिया जाता है। काम करने से इनकार करने पर प्रताड़ित किया जाता है। पिता के मुताबिक, आबिद लगातार मैसेज और लोकेशन भेजकर मदद मांग रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि कैंप में भारत समेत अन्य देशों के 400 से 500 युवक फंसे हो सकते हैं। हालांकि, इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आबिद की मौजूदा स्थिति और उसके बताए गए स्थान की भी आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे से मांगी मदद शहाबुद्दीन के अनुसार, उन्होंने केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे से मुलाकात कर बेटे की सुरक्षित वापसी के लिए सहायता मांगी है। उनके मुताबिक, मंत्री ने सहयोग का आश्वासन दिया है। बेटे को वापस लाने की उम्मीद में वह सप्तक्रांति एक्सप्रेस से दिल्ली जा रहे हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया के विभिन्न देशों में नौकरी का झांसा देकर युवाओं को साइबर ठगी केंद्रों तक पहुंचाने के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे गिरोह आकर्षक वेतन का लालच देकर युवाओं को फंसाते हैं और बाद में उनसे जबरन ठगी कराने की शिकायतें सामने आती हैं। फिलहाल आबिद का परिवार उसकी सुरक्षा को लेकर चिंतित है। परिजनों ने केंद्र सरकार से आबिद समेत वहां फंसे अन्य भारतीयों को सुरक्षित निकालने की मांग की है। SDPO सदर वन अजीत कुमार ने बताया कि, ‘कोई भी व्यक्ति मिसिंग होता हैं तो उसकी जानकारी स्थानीय थाने को दी जाती हैं। लेकिन अभी तक इस मामले में पुलिस को जानकारी नहीं है। अगर इस तरह के मामला है तो उसकी लोकेशन जांच कर सुरक्षित वापस लाने का प्रयास किया जाएगा।’  

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