नवादा जिले में बुधवार की रात मां काली की प्रतिमा विसर्जन के दौरान अव्यवस्था को लेकर पूजा समिति और स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। विशाल प्रतिमा को रेलवे लाइन के पास लगी लोहे की ब्रैकेटिंग से पार कराने में श्रद्धालुओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। काली पूजा समिति के अध्यक्ष मुकेश कुमार ने आरोप लगाया कि प्रतिमा विसर्जन के लिए प्रशासन की ओर से जरूरी इंतजाम नहीं किए गए थे। इसके कारण प्रतिमा को आगे ले जाने में करीब ढाई घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी और सड़क पर जाम की स्थिति बन गई। ब्रैकेटिंग के कारण हुई परेशानी समिति के अध्यक्ष मुकेश कुमार के मुताबिक, मां काली की प्रतिमा जिले की सबसे बड़ी प्रतिमाओं में शामिल थी। रेलवे की लोहे की ब्रैकेटिंग के कारण प्रतिमा को आगे ले जाने में बाधा उत्पन्न हुई। ऐसी स्थिति में प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से निकालने के लिए जेसीबी या अन्य जरूरी संसाधनों की आवश्यकता थी। लेकिन, समिति का आरोप है कि मौके पर इसकी व्यवस्था नहीं की गई थी। इसके बाद श्रद्धालुओं और पूजा समिति के सदस्यों ने खुद जिम्मेदारी संभाली। प्रतिमा को नुकसान से बचाने के लिए सावधानीपूर्वक गाड़ी से उतारा गया और लोगों ने हाथों के सहारे उसे रेलवे लाइन के पार पहुंचाने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद करीब ढाई घंटे में प्रतिमा को आगे ले जाने में सफलता मिली। विसर्जन स्थल पर गंदगी होने का आरोप इसके बाद कादिरगंज स्थित सकरी नदी में मां काली की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। इस दौरान सफाई व्यवस्था को लेकर भी लोगों में नाराजगी देखने को मिली। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो के माध्यम से कुछ लोगों ने विसर्जन स्थल पर गंदगी होने का आरोप लगाया। श्रद्धालुओं ने पानी में उतरने के दौरान परेशानी होने और पैरों में चोट लगने की शिकायत भी की। लोगों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान रास्ते और विसर्जन स्थलों पर पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना न करना पड़े। पूजा समिति की ओर से प्रशासनिक इंतजामों पर नाराजगी जताए जाने के बाद अब व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आखिर विशाल प्रतिमा की ऊंचाई और विसर्जन मार्ग पर मौजूद बाधाओं का पहले से आकलन क्यों नहीं किया गया नवादा जिले में बुधवार की रात मां काली की प्रतिमा विसर्जन के दौरान अव्यवस्था को लेकर पूजा समिति और स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। विशाल प्रतिमा को रेलवे लाइन के पास लगी लोहे की ब्रैकेटिंग से पार कराने में श्रद्धालुओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। काली पूजा समिति के अध्यक्ष मुकेश कुमार ने आरोप लगाया कि प्रतिमा विसर्जन के लिए प्रशासन की ओर से जरूरी इंतजाम नहीं किए गए थे। इसके कारण प्रतिमा को आगे ले जाने में करीब ढाई घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी और सड़क पर जाम की स्थिति बन गई। ब्रैकेटिंग के कारण हुई परेशानी समिति के अध्यक्ष मुकेश कुमार के मुताबिक, मां काली की प्रतिमा जिले की सबसे बड़ी प्रतिमाओं में शामिल थी। रेलवे की लोहे की ब्रैकेटिंग के कारण प्रतिमा को आगे ले जाने में बाधा उत्पन्न हुई। ऐसी स्थिति में प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से निकालने के लिए जेसीबी या अन्य जरूरी संसाधनों की आवश्यकता थी। लेकिन, समिति का आरोप है कि मौके पर इसकी व्यवस्था नहीं की गई थी। इसके बाद श्रद्धालुओं और पूजा समिति के सदस्यों ने खुद जिम्मेदारी संभाली। प्रतिमा को नुकसान से बचाने के लिए सावधानीपूर्वक गाड़ी से उतारा गया और लोगों ने हाथों के सहारे उसे रेलवे लाइन के पार पहुंचाने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद करीब ढाई घंटे में प्रतिमा को आगे ले जाने में सफलता मिली। विसर्जन स्थल पर गंदगी होने का आरोप इसके बाद कादिरगंज स्थित सकरी नदी में मां काली की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। इस दौरान सफाई व्यवस्था को लेकर भी लोगों में नाराजगी देखने को मिली। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो के माध्यम से कुछ लोगों ने विसर्जन स्थल पर गंदगी होने का आरोप लगाया। श्रद्धालुओं ने पानी में उतरने के दौरान परेशानी होने और पैरों में चोट लगने की शिकायत भी की। लोगों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान रास्ते और विसर्जन स्थलों पर पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना न करना पड़े। पूजा समिति की ओर से प्रशासनिक इंतजामों पर नाराजगी जताए जाने के बाद अब व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आखिर विशाल प्रतिमा की ऊंचाई और विसर्जन मार्ग पर मौजूद बाधाओं का पहले से आकलन क्यों नहीं किया गया

