बिहार के जमुई लोकसभा सीट से लोजपा(रा.) के सांसद अरुण भारती ने संयुक्त राष्ट्र में भारत का पक्ष रखा। उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में दुनिया में शांति बनाए रखने, देशों की जरूरतों के अनुसार मदद देने और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने पर जोर दिया। अपने संबोधन में कहा कि किसी भी देश में शांति स्थापित करने के लिए वहां की सरकार और जनता की प्राथमिकताओं का सम्मान करना जरूरी है। दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की मदद ऐसी होनी चाहिए, जिससे उस देश के अपने प्रयासों को मजबूती मिले। सांसद अरुण भारती 19 से 23 अक्टूबर तक अमेरिका के न्यूयॉर्क दौरे पर हैं। वह संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के लिए भारत के संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में वहां पहुंचे हैं। 22 अक्टूबर को उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति निर्माण आयोग और अफ्रीकी संघ की शांति एवं सुरक्षा परिषद की नौवीं वार्षिक बैठक में भारत का आधिकारिक वक्तव्य प्रस्तुत किया। शांति के लिए संबंधित देश की जरूरतों को समझना जरूरी अरुण भारती ने कहा कि किसी भी देश में शांति स्थापित करने की प्रक्रिया में उस देश की सरकार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। वहां की जरूरतों और प्राथमिकताओं को तय करने की जिम्मेदारी भी संबंधित देश की सरकार की है। दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से मिलने वाली मदद संबंधित देश की मांग और सहमति के आधार पर होनी चाहिए। मदद देते समय वहां की जरूरतों और प्राथमिकताओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। इसका उद्देश्य उस देश के प्रयासों को मजबूत करना होना चाहिए, न कि उसकी जगह खुद फैसले लेना। देशों के बीच सहयोग के लिए बनाए जाने वाले नियम लचीले होने चाहिए। हर देश की परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए सभी पर एक जैसा तरीका लागू करना सही नहीं होगा। भारत ने अफ्रीकी देशों के साथ सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर सांसद ने संयुक्त राष्ट्र और अफ्रीकी संघ के बीच सहयोग को मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि दोनों संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल से शांति स्थापित करने के प्रयासों को आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने वर्ष 2025 में संयुक्त राष्ट्र की शांति निर्माण व्यवस्था की समीक्षा का जिक्र किया। इस समीक्षा में दोनों संस्थाओं के बीच साझेदारी मजबूत करने और पहले हुई बैठकों में लिए गए फैसलों पर आगे काम करने की व्यवस्था बनाने पर जोर दिया गया था। शांति के लिए आर्थिक मदद का सही इस्तेमाल जरूरी अरुण भारती ने शांति स्थापित करने के लिए आर्थिक मदद के बेहतर इस्तेमाल पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के शांति निर्माण कोष, अफ्रीकी विकास बैंक और दूसरे सहयोगी संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी से मजबूत होगी शांति सांसद ने कहा कि शांति तभी लंबे समय तक कायम रह सकती है, जब विकास में समाज के सभी वर्गों को बराबर अवसर मिले। उन्होंने शांति स्थापित करने के प्रयासों में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। आधार, यूपीआई और डीबीटी का किया जिक्र अरुण भारती ने सरकारी सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में डिजिटल तकनीक की भूमिका पर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि डिजिटल सार्वजनिक व्यवस्था से सरकारी सेवाओं को अधिक आसान, प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा सकता है। इस संदर्भ में भारत की आधार व्यवस्था, यूपीआई और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया। इन माध्यमों से पहचान, डिजिटल भुगतान और सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने में मदद मिली है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना से काम करता है भारत अपने संबोधन में अरुण भारती ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना से प्रेरित है। इसका अर्थ है कि पूरी दुनिया एक परिवार है। अलग-अलग दलों के सांसद कर रहे भारत का प्रतिनिधित्व अरुण भारती ने इस अवसर के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के प्रति आभार जताया। केंद्र सरकार ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय सांसदों का प्रतिनिधिमंडल भेजने की परंपरा को फिर शुरू किया है। इसके तहत अलग-अलग राजनीतिक दलों और क्षेत्रों के सांसद अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के संसदीय लोकतंत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। बिहार के जमुई लोकसभा सीट से लोजपा(रा.) के सांसद अरुण भारती ने संयुक्त राष्ट्र में भारत का पक्ष रखा। उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में दुनिया में शांति बनाए रखने, देशों की जरूरतों के अनुसार मदद देने और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने पर जोर दिया। अपने संबोधन में कहा कि किसी भी देश में शांति स्थापित करने के लिए वहां की सरकार और जनता की प्राथमिकताओं का सम्मान करना जरूरी है। दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की मदद ऐसी होनी चाहिए, जिससे उस देश के अपने प्रयासों को मजबूती मिले। सांसद अरुण भारती 19 से 23 अक्टूबर तक अमेरिका के न्यूयॉर्क दौरे पर हैं। वह संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के लिए भारत के संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में वहां पहुंचे हैं। 22 अक्टूबर को उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति निर्माण आयोग और अफ्रीकी संघ की शांति एवं सुरक्षा परिषद की नौवीं वार्षिक बैठक में भारत का आधिकारिक वक्तव्य प्रस्तुत किया। शांति के लिए संबंधित देश की जरूरतों को समझना जरूरी अरुण भारती ने कहा कि किसी भी देश में शांति स्थापित करने की प्रक्रिया में उस देश की सरकार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। वहां की जरूरतों और प्राथमिकताओं को तय करने की जिम्मेदारी भी संबंधित देश की सरकार की है। दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से मिलने वाली मदद संबंधित देश की मांग और सहमति के आधार पर होनी चाहिए। मदद देते समय वहां की जरूरतों और प्राथमिकताओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। इसका उद्देश्य उस देश के प्रयासों को मजबूत करना होना चाहिए, न कि उसकी जगह खुद फैसले लेना। देशों के बीच सहयोग के लिए बनाए जाने वाले नियम लचीले होने चाहिए। हर देश की परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए सभी पर एक जैसा तरीका लागू करना सही नहीं होगा। भारत ने अफ्रीकी देशों के साथ सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर सांसद ने संयुक्त राष्ट्र और अफ्रीकी संघ के बीच सहयोग को मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि दोनों संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल से शांति स्थापित करने के प्रयासों को आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने वर्ष 2025 में संयुक्त राष्ट्र की शांति निर्माण व्यवस्था की समीक्षा का जिक्र किया। इस समीक्षा में दोनों संस्थाओं के बीच साझेदारी मजबूत करने और पहले हुई बैठकों में लिए गए फैसलों पर आगे काम करने की व्यवस्था बनाने पर जोर दिया गया था। शांति के लिए आर्थिक मदद का सही इस्तेमाल जरूरी अरुण भारती ने शांति स्थापित करने के लिए आर्थिक मदद के बेहतर इस्तेमाल पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के शांति निर्माण कोष, अफ्रीकी विकास बैंक और दूसरे सहयोगी संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी से मजबूत होगी शांति सांसद ने कहा कि शांति तभी लंबे समय तक कायम रह सकती है, जब विकास में समाज के सभी वर्गों को बराबर अवसर मिले। उन्होंने शांति स्थापित करने के प्रयासों में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। आधार, यूपीआई और डीबीटी का किया जिक्र अरुण भारती ने सरकारी सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में डिजिटल तकनीक की भूमिका पर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि डिजिटल सार्वजनिक व्यवस्था से सरकारी सेवाओं को अधिक आसान, प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा सकता है। इस संदर्भ में भारत की आधार व्यवस्था, यूपीआई और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया। इन माध्यमों से पहचान, डिजिटल भुगतान और सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने में मदद मिली है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना से काम करता है भारत अपने संबोधन में अरुण भारती ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना से प्रेरित है। इसका अर्थ है कि पूरी दुनिया एक परिवार है। अलग-अलग दलों के सांसद कर रहे भारत का प्रतिनिधित्व अरुण भारती ने इस अवसर के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के प्रति आभार जताया। केंद्र सरकार ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय सांसदों का प्रतिनिधिमंडल भेजने की परंपरा को फिर शुरू किया है। इसके तहत अलग-अलग राजनीतिक दलों और क्षेत्रों के सांसद अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के संसदीय लोकतंत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

