जनता दल (यूनाइटेड) ने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के औचित्य पर बृहस्पतिवार को सवाल उठाया और कहा कि इसके घटक दल राज्य विधानसभा चुनावों में अक्सर एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते हैं और उनके बीच नेतृत्व, मुद्दों या मिलकर चुनाव लड़ने की योजना को लेकर कोई सहमति नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं की बृहस्पतिवार शाम को ऑनलाइन बैठक होने वाली है। सूत्रों ने बताया कि बैठक में ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शनों की रूपरेखा और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दबाव बनाने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इसमें एक नवंबर को दिल्ली में होने वाली ‘इंडिया’ गठबंधन की रैली की तैयारियों की भी समीक्षा की जाएगी। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ऐसी अटकलें हैं कि सरकार महिला आरक्षण अधिनियम को जल्द लागू करने के लिए परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के वास्ते संसद का सत्र बुला सकती है।
जद(यू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि विपक्षी नेता चाहे ऑनलाइन बैठक करें या आमने-सामने मिलें, आगामी चुनावों में उनके दल एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते दिखाई देंगे। उन्होंने कहा, ‘‘उनके बीच एक-दूसरे के खिलाफ मुकाबला, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ उनकी लड़ाई से कहीं अधिक मुश्किल होगा।’’
प्रसाद ने कहा, ‘‘पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस एक-दूसरे के खिलाफ लड़ेंगी। पश्चिम बंगाल में लोग पहले ही देख चुके हैं कि तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और वाम दल किस तरह एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे थे।’’
उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के बीच नेतृत्व, साझा मुद्दों और संयुक्त चुनावी रणनीति पर सहमति नहीं बन पाने से गठबंधन के उद्देश्य पर सवाल उठते हैं।
प्रसाद ने कहा, ‘‘जब नेतृत्व या मुद्दों पर कोई सहमति नहीं है और मिलकर चुनाव लड़ने की कोई योजना नहीं है, तो ऐसे गठबंधन का औचित्य क्या है? ‘इंडिया’ गुट को ऐसे गठबंधन के पीछे का तर्क स्पष्ट करना चाहिए।’’

