Akhilesh Yadav Azam Khan Meeting: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की आज (गुरुवार) रामपुर जेल में होने वाली मुलाकात को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। अखिलेश यादव आजम खान की तबीयत का हाल जानने के लिए उनसे मुलाकात करेंगे। हालांकि, इस मुलाकात में आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति, संभावित प्रत्याशियों और चुनावी मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से आजम खान के खिलाफ एक और FIR दर्ज किए जाने के बाद इस मुलाकात के राजनीतिक मायने बढ़ गए हैं। पश्चिमी यूपी में आजम खान का प्रभाव समाजवादी पार्टी (SP) के लिए महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में आगामी चुनाव को देखते हुए क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियों और पार्टी की तैयारियों पर बातचीत होने की अटकलें हैं।
पश्चिमी यूपी की सीटों पर आजम खान की राय अहम
समाजवादी पार्टी में आजम खान की भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण से लेकर चुनाव संचालन तक अखिलेश यादव ने उनकी राय को तरजीह दी थी। पश्चिमी यूपी में सपा की चुनावी रणनीति तैयार करने में भी आजम खान का प्रभाव माना जाता रहा है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 126 सीटों में से सपा-राष्ट्रीय लोकदल गठबंधन ने 41 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इनमें 33 सीटें समाजवादी पार्टी के खाते में आई थीं।
मुरादाबाद मंडल की 27 विधानसभा सीटों में से सपा ने 17 पर जीत हासिल की थी। मुरादाबाद की छह में से पांच, रामपुर की 5 में से 3, संभल की 4 में से 3, अमरोहा की 4 में से 2 और बिजनौर की 8 में से 4 सीटों पर पार्टी को सफलता मिली थी। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सपा और भाजपा संभावित प्रत्याशियों की पहचान के लिए सर्वे करा रही हैं। ऐसे में अखिलेश और आजम खान की मुलाकात में पश्चिमी यूपी की सीटों पर मजबूत उम्मीदवारों के चयन और क्षेत्रीय समीकरणों पर चर्चा होने की संभावना है।
जौहर विश्वविद्यालय और आजम खान से जुड़े मामले बन सकते हैं चुनावी मुद्दे
आगामी चुनाव में समाजवादी पार्टी आजम खान और उनके ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों को प्रमुखता दे सकती है। विश्वविद्यालय पर जांच एजेंसियों की कार्रवाई और इससे जुड़े घटनाक्रम को पार्टी चुनावी विमर्श का हिस्सा बना सकती है। इसके अलावा संभल में हरिहर मंदिर और जामा मस्जिद से जुड़े मुकदमे के बाद हुई हिंसा तथा हाल ही में सदन में पेश न्यायिक जांच रिपोर्ट भी संभावित चुनावी मुद्दों में शामिल हो सकती है। इसको लेकर भी चर्चा के कयास लगाए जा रहे हैं। इन मुद्दों के जरिए सपा पश्चिमी यूपी में अपनी राजनीतिक रणनीति को धार देने की कोशिश कर सकती है। हालांकि, अखिलेश यादव और आजम खान के बीच इन विषयों पर चर्चा होगी या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सपा के मुरादाबाद प्रभारी और शिक्षक MLC चुनाव में पार्टी के नेता फिरोज खान की माने तो अखिलेश यादव और आजम खान दोनों वरिष्ठ नेता हैं। ऐसे में मुलाकात के दौरान राजनीतिक चर्चा होना स्वाभाविक है। हालांकि, किन मुद्दों पर बातचीत होगी, इसकी जानकारी दोनों नेताओं या उनके परिवार को ही है।
सपा-कांग्रेस गठबंधन और सीट बंटवारे पर भी नजर
अखिलेश यादव और आजम खान की मुलाकात के संभावित राजनीतिक एजेंडे में आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान गठबंधन की स्थिति और सीटों के बंटवारे का मुद्दा भी शामिल हो सकता है। मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के साथ आने की संभावना जताई जा रही है। अगर दोनों दल गठबंधन करते हैं तो पश्चिमी यूपी की सीटों पर बंटवारा महत्वपूर्ण विषय होगा।
कांग्रेस लंबे समय से उत्तर प्रदेश की सत्ता से बाहर है, लेकिन पश्चिमी यूपी की कई विधानसभा सीटों पर पार्टी के नेता अपनी मजबूत दावेदारी पेश करते रहे हैं। ऐसे में सपा और कांग्रेस के बीच सीटों का तालमेल बैठाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सीटों के बंटवारे के साथ-साथ चुनाव प्रचार, स्थानीय नेतृत्व और चुनाव संचालन को लेकर भी दोनों दलों के बीच समन्वय जरूरी होगा। पश्चिमी यूपी में सपा की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और आजम खान के प्रभाव को देखते हुए इस क्षेत्र की रणनीति पर पार्टी का विशेष ध्यान रह सकता है।
मुलाकात पर टिकी पश्चिमी यूपी की सियासत की नजर
अखिलेश यादव और आजम खान की मुलाकात ऐसे समय हो रही है, जब राजनीतिक दल आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं। प्रत्याशियों के चयन, क्षेत्रीय समीकरणों और चुनावी मुद्दों को लेकर पार्टियां अपनी रणनीति तैयार कर रही हैं। ऐसे में इस मुलाकात को केवल आजम खान की तबीयत का हाल जानने तक सीमित नहीं माना जा रहा। हालांकि, चुनावी रणनीति, संभावित प्रत्याशियों और गठबंधन को लेकर चर्चा होने की बातें फिलहाल अटकलों पर आधारित हैं। मुलाकात के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों नेताओं के बीच किन विषयों पर बातचीत हुई।

