भारत की शीतल देवी और तोमन कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बृहस्पतिवार को यहां एशियाई पैरा खेलों की तीरंदाजी प्रतियोगिता की कंपाउंड मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता, जबकि स्वाति चौधरी ने महिला डब्ल्यू1 श्रेणी में रजत पदक जीतकर इतिहास रचा। शीतल और तोमन ने मौजूदा खेलों में तीरंदाजी में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया। इससे पहले शीतल ने महिला कंपाउंड युगल स्पर्धा में पायल नाग के साथ मिलकर रजत पदक जीता था।शीतल का यह एशियाई पैरा खेलों में मिश्रित टीम वर्ग में लगातार दूसरा स्वर्ण पदक है। इससे पहले उन्होंने 2023 के हांगझोउ खेलों में राकेश कुमार के साथ मिलकर खिताब जीता था। शीतल और तोमन ने फाइनल में इंडोनेशिया की तेओडोरा ऑडी आयुडिया फेरेली और केन स्वागुमिलंग को 151-148 से हराया।क्वालीफाइंग राउंड में विश्व रिकार्ड बनाने वाली शीर्ष वरीयता प्राप्त भारतीय जोड़ी ने फाइनल में शुरू से लेकर आखिर तक अपनी बढ़त बनाए रखी। भारतीय टीम ने पहले सेट में 38-37 से बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद उन्होंने दूसरे सेट में भी अच्छा प्रदर्शन किया और 77-73 के अंतर से अपनी बढ़त चार अंक की कर दी।इस दौरान उन्होंने केवल एक अंक गंवाया। इंडोनेशियाई टीम ने तीसरे सेट में एक अंक से जीत हासिल की, लेकिन भारतीय टीम ने तीन अंकों की बढ़त बनाए रखी। अंतिम सेट में दोनों टीमों ने 38 अंक बनाए, जो भारत को तीन अंकों की जीत के साथ स्वर्ण पदक दिलाने के लिए पर्याप्त थे।शीतल और तोमन ने सेमीफाइनल में चीनी ताइपे की जोड़ी ली युन-ह्सिएन और यांग जून-काई को संघर्षपूर्ण मुकाबले में 142-141से हराया था। शीतल और तोमन ने क्वालीफाइंग राउंड में 1402 अंक बनाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया था। शीतल जन्म से ही भुजाहीन है।वह धनुष को सही स्थिति में रखने के लिए अपने पैरों का इस्तेमाल करती हैं और डोरी को खींचने और छोड़ने के लिए अपने कंधे और जबड़े का उपयोग करती हैं। छत्तीसगढ़ के बलोद जिले के नवागांव के रहने वाले 31 वर्षीय तोमन सीआरपीएफ में कार्यरत हैं। उन्होंने फरवरी 2022 में झारखंड के लोहरदगा जिले में माओवादियों के खिलाफ संयुक्त तलाशी अभियान के दौरान एक आईईडी विस्फोट में अपना बायां पैर गंवा दिया था।इस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनका पैर काटना पड़ा था। इससे पहले स्वाति ने डब्ल्यू1 श्रेणी में महिला व्यक्तिगत फाइनल में चीन की सेन मेंगकन से हारने के बाद रजत पदक हासिल किया। मेरठ की गुरुकुल तीरंदाजी अकादमी में एथेंस ओलंपिक खेलों में भाग ले चुके सत्यदेव प्रसाद के मार्गदर्शन में अभ्यास करने वाली शीर्ष वरीयता प्राप्त भारतीय खिलाड़ी ने उतार-चढ़ाव भरे फाइनल में 4-2 की बढ़त गंवा दी और 4-6 से हार गई।चीन की तीरंदाज ने शानदार वापसी की और स्वाति को 25-17, 21-22, 22-21, 20-30, 21-28 से हार का सामना करना पड़ा। पिछले महीने अहमदाबाद में विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज में कांस्य पदक जीतने वाली स्वाति ने शानदार शुरुआत करते हुए पहला सेट 25-17 से जीत लिया। चीन की खिलाड़ी ने दूसरा सेट जीता लेकिन स्वाति ने तीसरा सेट जीत कर वापसी की।चीन की खिलाड़ी ने चौथे सेट में तीन परफेक्ट 10 के साथ 30 का स्कोर बनाकर सेट 30-20 से जीत लिया और मैच को 4-4 से बराबर कर दिया। सेन ने निर्णायक सेट में अपना धैर्य बनाए रखा तथा स्वाति के 21 अंकों के मुकाबले 28 अंक बनाकर एशियाई पैरा खेलों में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता। मेरठ की 37 वर्षीय स्वाति को भले ही स्वर्ण पदक नहीं मिला लेकिन वह इस वर्ग में पदक जीतने वाली पहली भारतीय तीरंदाज बन गई।डब्ल्यू1 श्रेणी में गंभीर शारीरिक अक्षमता वाले खिलाड़ी भाग लेते हैं। इस वर्ग में टेट्राप्लेजिया जैसी स्थितियों से ग्रस्त एथलीट शामिल हैं, जिनमें मांसपेशियों की शक्ति और अंगों के कार्य में समान रूप से कमी होती है।
भारत की शीतल देवी और तोमन कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बृहस्पतिवार को यहां एशियाई पैरा खेलों की तीरंदाजी प्रतियोगिता की कंपाउंड मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता, जबकि स्वाति चौधरी ने महिला डब्ल्यू1 श्रेणी में रजत पदक जीतकर इतिहास रचा। शीतल और तोमन ने मौजूदा खेलों में तीरंदाजी में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया। इससे पहले शीतल ने महिला कंपाउंड युगल स्पर्धा में पायल नाग के साथ मिलकर रजत पदक जीता था।
शीतल का यह एशियाई पैरा खेलों में मिश्रित टीम वर्ग में लगातार दूसरा स्वर्ण पदक है। इससे पहले उन्होंने 2023 के हांगझोउ खेलों में राकेश कुमार के साथ मिलकर खिताब जीता था। शीतल और तोमन ने फाइनल में इंडोनेशिया की तेओडोरा ऑडी आयुडिया फेरेली और केन स्वागुमिलंग को 151-148 से हराया।
क्वालीफाइंग राउंड में विश्व रिकार्ड बनाने वाली शीर्ष वरीयता प्राप्त भारतीय जोड़ी ने फाइनल में शुरू से लेकर आखिर तक अपनी बढ़त बनाए रखी। भारतीय टीम ने पहले सेट में 38-37 से बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद उन्होंने दूसरे सेट में भी अच्छा प्रदर्शन किया और 77-73 के अंतर से अपनी बढ़त चार अंक की कर दी।
इस दौरान उन्होंने केवल एक अंक गंवाया। इंडोनेशियाई टीम ने तीसरे सेट में एक अंक से जीत हासिल की, लेकिन भारतीय टीम ने तीन अंकों की बढ़त बनाए रखी। अंतिम सेट में दोनों टीमों ने 38 अंक बनाए, जो भारत को तीन अंकों की जीत के साथ स्वर्ण पदक दिलाने के लिए पर्याप्त थे।
शीतल और तोमन ने सेमीफाइनल में चीनी ताइपे की जोड़ी ली युन-ह्सिएन और यांग जून-काई को संघर्षपूर्ण मुकाबले में 142-141से हराया था। शीतल और तोमन ने क्वालीफाइंग राउंड में 1402 अंक बनाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया था। शीतल जन्म से ही भुजाहीन है।
वह धनुष को सही स्थिति में रखने के लिए अपने पैरों का इस्तेमाल करती हैं और डोरी को खींचने और छोड़ने के लिए अपने कंधे और जबड़े का उपयोग करती हैं। छत्तीसगढ़ के बलोद जिले के नवागांव के रहने वाले 31 वर्षीय तोमन सीआरपीएफ में कार्यरत हैं। उन्होंने फरवरी 2022 में झारखंड के लोहरदगा जिले में माओवादियों के खिलाफ संयुक्त तलाशी अभियान के दौरान एक आईईडी विस्फोट में अपना बायां पैर गंवा दिया था।
इस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनका पैर काटना पड़ा था। इससे पहले स्वाति ने डब्ल्यू1 श्रेणी में महिला व्यक्तिगत फाइनल में चीन की सेन मेंगकन से हारने के बाद रजत पदक हासिल किया। मेरठ की गुरुकुल तीरंदाजी अकादमी में एथेंस ओलंपिक खेलों में भाग ले चुके सत्यदेव प्रसाद के मार्गदर्शन में अभ्यास करने वाली शीर्ष वरीयता प्राप्त भारतीय खिलाड़ी ने उतार-चढ़ाव भरे फाइनल में 4-2 की बढ़त गंवा दी और 4-6 से हार गई।
चीन की तीरंदाज ने शानदार वापसी की और स्वाति को 25-17, 21-22, 22-21, 20-30, 21-28 से हार का सामना करना पड़ा। पिछले महीने अहमदाबाद में विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज में कांस्य पदक जीतने वाली स्वाति ने शानदार शुरुआत करते हुए पहला सेट 25-17 से जीत लिया। चीन की खिलाड़ी ने दूसरा सेट जीता लेकिन स्वाति ने तीसरा सेट जीत कर वापसी की।
चीन की खिलाड़ी ने चौथे सेट में तीन परफेक्ट 10 के साथ 30 का स्कोर बनाकर सेट 30-20 से जीत लिया और मैच को 4-4 से बराबर कर दिया। सेन ने निर्णायक सेट में अपना धैर्य बनाए रखा तथा स्वाति के 21 अंकों के मुकाबले 28 अंक बनाकर एशियाई पैरा खेलों में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता। मेरठ की 37 वर्षीय स्वाति को भले ही स्वर्ण पदक नहीं मिला लेकिन वह इस वर्ग में पदक जीतने वाली पहली भारतीय तीरंदाज बन गई।
डब्ल्यू1 श्रेणी में गंभीर शारीरिक अक्षमता वाले खिलाड़ी भाग लेते हैं। इस वर्ग में टेट्राप्लेजिया जैसी स्थितियों से ग्रस्त एथलीट शामिल हैं, जिनमें मांसपेशियों की शक्ति और अंगों के कार्य में समान रूप से कमी होती है।
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