Punjab में नशा विरोधी कार्यकर्ता Parvinder Singh Jhota की हत्या की जांच CBI ने संभाली

Punjab में नशा विरोधी कार्यकर्ता Parvinder Singh Jhota की हत्या की जांच CBI ने संभाली

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पंजाब के मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच अपने हाथ में ले ली है और सभी पहलुओं की पड़ताल के लिए विशेषज्ञों की एक टीम राज्य पहुंच गई है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। इस बीच, कांग्रेस ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर नशीले पदार्थ की समस्या से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाया।

विपक्ष की बढ़ती आलोचना के बीच, आम आदमी पार्टी (आप) के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि हत्या के मामले के सिलसिले में बुधवार को एक पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) और एक ड्रग निरीक्षक को निलंबित कर दिया गया। निलंबन के संबंध में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी ने औषधि नियंत्रक, फॉरेंसिक विशेषज्ञों और वस्तु एंव सेवा कर (जीएसटी) अधिकारियों को शामिल करते हुए एक विशेष टीम का गठन किया है, जो मंगलवार रात मानसा पहुंची और पुलिस से मामले से जुड़े दस्तावेज सौंपने का औपचारिक अनुरोध किया।

उन्होंने बताया कि सीबीआई की टीम ने झोटा के घर पहुंचकर परिवार से मुलाकात की। प्रक्रिया के अनुसार, सीबीआई अपनी जांच शुरू करने से पहले राज्य पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी को फिर से दर्ज करती है। सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट उसकी जांच के निष्कर्षों पर आधारित होती है, जो आरोपों को सही ठहरा भी सकती है और नहीं भी।

अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई टीम झोटा के घर पहुंची और उनके परिवार से मुलाकात की। अधिकारियों ने बताया कि झोटा के शव का पोस्टमार्टम चंडीगढ़ स्थित स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) में विशेषज्ञों की टीम द्वारा किया जाएगा, जबकि मजिस्ट्रेट की ओर से चंडीगढ़ में पंचनामा भरा जाएगा। सीबीआई ने पंजाब सरकार के गृह विभाग की ओर से 20 अक्टूबर को सहमति दिए जाने के बाद मामले की जांच अपने हाथ में ली है।

झोटा की गोली मारकर हत्या किए जाने के एक हफ्ते से भी ज़्यादा समय बीत जाने के बाद भी, अभी तक उनका पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है। उनके परिवार वालों और समर्थकों ने न्याय मिलने तक अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है। वे मानसा में विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।

झोटा का शव पिछले आठ दिनों से मानसा सिविल अस्पताल के मुर्दाघर में रखा हुआ है। झोटा दवा की दुकानों पर नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जाने जाते थे। उनकी 13 अक्टूबर को मानसा के एक बाजार में स्थित दवा की दुकान के भीतर दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

झोटा की हत्या के मामले में दुकान मालिक अश्वनी कुमार को राजस्थान के सालासर से हिरासत में लिया गया। कुमार पर आरोप है कि जब झोटा ने एक बुजुर्ग व्यक्ति को नशीले पदार्थ बेचने को लेकर उससे सवाल किया, तो उसने झोटा पर गोली चला दी। इस घटना के बाद पंजाब में राजनीतिक घमासान शुरू हो गया।

पंजाब में अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं। विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने बुधवार को यहां झोटा के पिता भीम सिंह से मुलाकात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि कांग्रेस बृहस्पतिवार से शुरू हो रहे पंजाब विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएगी। पूर्व सैनिक भीम सिंह से मुलाकात के बाद मानसा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बाजवा ने कहा कि विपक्षी पार्टी सदन में मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग करेगी।

पंजाब भाजपा प्रमुख केवल सिंह ढिल्लों ने भी मान के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने दावा किया कि आप सरकार कई मोर्चों पर विफल रही है, जिनमें शासन, नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई और कानून-व्यवस्था शामिल हैं। कुमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों और शस्त्र अधिनियम, 1959 की धारा 25 तथा 27 के तहत हत्या, खतरनाक हथियारों से स्वेच्छा से चोट पहुंचाने, साझा इरादे से आपराधिक साजिश रचने और अवैध तरीके से हथियार रखने के आरोपों में मामला दर्ज किया गया था।

मान ने मंगलवार को घोषणा की थी कि इस घटना की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जाएगी। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘हम मादक पदार्थ के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले परविंदर सिंह झोटा के पिता और परिजन के साथ मजबूती से खड़े हैं। परिवार की मांग को स्वीकार करते हुए हम इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप रहे हैं।

मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ हमारी जंग पूरी ताकत से जारी है। पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए हमें जो भी कड़े कदम उठाने पड़ेंगे, हम उनसे पीछे नहीं हटेंगे।’’

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