Explainer: सऊदी अरब में बांग्लादेशी महिला-पुरुष को मृत्युदंड, Ta’zir Law क्या है? महिला के परिवार ने क्या कहा?

Explainer: सऊदी अरब में बांग्लादेशी महिला-पुरुष को मृत्युदंड, Ta’zir Law क्या है? महिला के परिवार ने क्या कहा?

नई दिल्ली। सऊदी अरब ने मक्का क्षेत्र में एक मस्जिद के भीतर ‘अशोभनीय कृत्य’ के मामले में दोषी ठहराए गए बांग्लादेशी महिला और पुरुष को 14 अक्टूबर को मृत्युदंड दे दिया। सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के अनुसार, अदालत ने उन्हे ‘ताजीर’ के तहत मौत की सजा सुनाई थी। ताजीर ऐसी सजा है, जिसमें अपराध और दंड का निर्धारण जज के विवेक पर निर्भर करता है। बांग्लादेश का कहना है कि सऊदी अरब ने उन्हें पहले से कोई जानकारी नहीं दी थी, और उन्होंने इस मामले की पूरी जानकारी मांगी है।

गल्फ न्यूज के अनुसार, सऊदी प्रेस एजेंसी की तरफ से जारी बयान में मंत्रायल ने इन दोनों की पहचान नजरुल इस्लाम अब्दुल बशीर और सिति अख्तर के रूप में बताई गई है। दोनों बांग्लादेश के नागरिक थे। हालांकि, अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में उनके नामों की वर्तनी अलग-अलग बताई गई है। कुछ रिपोर्टों में दोनों को दंपती बताया गया है, लेकिन उनके विवाहित होने की पुष्टि नहीं हुई है।

अदालत ने अपराध को गंभीर माना

सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के अनुसार, सुरक्षा अधिकारियों ने दोनों को गिरफ्तार किया था। जांच के बाद उनके खिलाफ आरोप लगाए गए और मामला अदालत में भेजा गया। अदालत ने आरोपों को साबित मानते हुए मृत्युदंड सुनाया। गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने अपराध की गंभीरता, मस्जिद की पवित्रता के उल्लंघन और घटना की परिस्थितियों को सजा का आधार बनाया। मंत्रालय ने समय और स्थान की पवित्रता का भी उल्लेख किया। संबंधित न्यायिक प्राधिकरण की ओर से फैसले की पुष्टि होने और शाही आदेश से मंजूरी मिलने के बाद सजा लागू की गई।

Saudi Arabia में Ta’zir Law क्या है? और Hadd Punishment में क्या अंतर है

सऊदी अरब के गृह मंत्रालय ने अपने बयान में किसी विशेष कानून या कानूनी धारा का उल्लेख नहीं किया। उसने केवल इतना बताया कि दोनों को इस्लामी कानून के तहत ताजीर के तहत सजा दी गई। इस्लामी कानून के तहत अपराधों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। ‘हद्द’ अपराधों के लिए निश्चित सजाएं तह हैं। ‘किसास’ में बदला लेने या प्रतिशोद से जुड़ी सजाए आती हैं, जैसे हत्या के मामले में। ताजीर के तहत ऐसे अपराध आते हैं, जिनकी सजा पहले से निश्चित नहीं होती। इनमें अपराध और दंड का निर्धारण जज करता है।

‘मेना राइट्स ग्रुप’ का कहना है कि सऊदी अरब में कोई लिखित दंड संहिता नहीं है। वहां जज इस्लामी कानून की अपनी व्याख्या के आधार पर अपराध और सजा तय करते हैं। ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ ने 2008 की एक रिपोर्ट में कहा था कि वहां ज्यादातर आपराधिक मामले ताजीर के अंतर्गत आते हैं और जज पुराने फैसलों से बंधे नहीं होते।

फरवरी 2021 में सऊदी अरब ने कहा था कि ‘ताजीर’ के तहत आने वाले अपराधों को स्पष्ट रुप से परिभाषित करने के लिए दंड संहिता तैयार कर रहा है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस प्रस्तावित संहिता के एक लीक हुए मसौदे का अध्ययन किया और कहा कि इससे मौत की सजा के इस्तेमाल पर कोई रोक नहीं लगेगी। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह संहिता लागू हुई है या नहीं।

बांग्लादेश का क्या कहना है?

‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश के जेद्दा स्थित महावाणिज्य दूतावास ने कहा कि उसे फांसी दिए जाने से पहले इसकी जानकारी नहीं दी गई थी। ‘प्रोथोम आलो’ रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश को दोनों की फांसी के बारे में मीडिया खबरों के जरिए पता चला। विदेश मंत्रायल के कुछ अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सऊदी अधिकारी आमतौर पर दो बांग्लादेशियों को इतनी जल्दी गिरफ्तार करके उन्हें फांसी नहीं देते।

बीबीसी के अनुसार, बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने बताया कि सरकार ने सऊदी अरब से उन अपराधों और कानूनी प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी है। उन्होंने कहा कि एक बार जानकारी मिल जाने के बाद, बांग्लादेश अपने अगले कदम तय करेगा, जिसमें शवों को वापस स्वदेश लाना भी शामिल है।

महिला के पिता और बड़ी बहन ने क्या बताया?

मृतक महिला की बड़ी बहन ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि बुधवार को एक सहेली के फोन और वीडियो भेजने के बाद उन्हें इस खबर का पता चला। उन्होंने बताया कि उनकी बहन सऊदी अरब से नियमित रूप से संपर्क करती थीं और उन्होंने परिवार को यह भी बताया था कि वह जेल में हैं।

परिवार के मुताबिक, महिला फरवरी 2023 में सऊदी अरब काम करने गई थी। करीब छह महीने बाद पता चला कि वह जेल में है। बहन ने बताया कि महिला मक्का शरीफ में सफाई का काम करने गई थी। उसने जेल में रहने की वजह बताते हुए कहा था कि कई लड़कियों को गाड़ियां खरीदने के आरोप में उनके मालिक ने गिरफ्तार करवा दिया था। उसने अधिक जानकारी देने से मना किया था।

महिला के पिता ने बताया कि तलाक के बाद वह काम के लिए सऊदी अरब गई थी। जेल जाने से पहले वह नियमित रूप से पैसे भेजती थी। उसकी भांजी के अनुसार, महिला ने मंगलवार को आखिरी बार फोन किया था, लेकिन मौत की सजा के बारे में कुछ नहीं बताया। परिवार को उस बांग्लादेशी पुरुष के बारे में भी जानकारी नहीं थी, जिसे उसके साथ सजा दी गई।

क्या था अपराध, अब तक स्पष्ट नहीं

‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के बयान में यह नहीं बताया गया कि मस्जिद के भीतर वास्तव में क्या कृत्य हुआ था। मस्जिद का नाम, दोनों की गिरफ्तारी की तारीख और मुकदमे की समय-सीमा भी सार्वजनिक नहीं की गई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि दोनों विवाहित थे या नहीं, उन्हें कानूनी सहायता मिली थी या नहीं और क्या उन्हें अपील का अवसर दिया गया था। बांग्लादेश सरकार अब सऊदी अरब के जवाब का इंतजार कर रही है। बीबीसी के अनुसार, सऊदी अरब में 30 लाख से अधिक बांग्लादेशी नागरिक रहते और काम करते हैं। इनमें से अधिकांश कम वेतन वाले कामों में लगे हैं। दोनों नागरिकों को मृत्युदंड दिए जाने की खबर से बांग्लादेश में चिंता पैदा हुई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *