प्रयागराज के हिंदी के वरिष्ठ गीतकार पं. दयाशंकर पांडेय का मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया। वह करीब 90 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से साहित्य जगत में शोक की लहर है। उन्होंने अपने गीतों और कविताओं के जरिए हिंदी साहित्य में खास पहचान बनाई। साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा। पं. दयाशंकर पांडेय का जन्म 7 अगस्त 1939 को तत्कालीन इलाहाबाद के मेजा क्षेत्र स्थित शुक्लपुर गांव में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए और एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वह एजी ऑफिस, उत्तर प्रदेश में सेवा में रहे। वरिष्ठ लेखाधिकारी के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद वह प्रयागराज के अल्लापुर क्षेत्र में रहने लगे थे। तीन प्रमुख काव्य-संग्रहों से मिली पहचान पं. दयाशंकर पांडेय की साहित्यिक पहचान एक संवेदनशील गीतकार के रूप में थी। उनकी रचनाओं में भावनाओं और जीवन के अनुभवों की झलक देखने को मिलती थी। उनके प्रमुख काव्य-संग्रहों में सुधियों की परतें (2001), परछाइयां (2004) और प्रतीक्षा के पहर (2014) शामिल हैं। उनके संग्रह परछाइयां का दूसरा संस्करण भी वर्ष 2014 में प्रकाशित हुआ था। उनकी रचनाएं हिंदी की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। इसके अलावा उनकी कविताओं को कई कविता-संकलनों में भी जगह मिली। आकाशवाणी और दूरदर्शन के इलाहाबाद केंद्र से भी उनका साहित्यिक जुड़ाव रहा। इसके माध्यम से भी वह साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े रहे। सेवाकाल में भी रहे सक्रिय साहित्य के साथ-साथ पं. दयाशंकर पांडेय अपने सेवाकाल में भी सक्रिय रहे। वह एजी ऑफिस ब्रदरहुड में अखिल भारतीय स्तर पर सक्रिय पदाधिकारी के रूप में काम करते रहे। नौकरी और साहित्य, दोनों क्षेत्रों में उनकी भागीदारी उनके व्यक्तित्व का अहम हिस्सा रही। उनके निधन से प्रयागराज ने हिंदी साहित्य से जुड़े एक वरिष्ठ रचनाकार को खो दिया है। उनके साहित्यिक योगदान और रचनाओं के जरिए उनकी यादें पाठकों के बीच बनी रहेंगी।

