(फाइल फोटो के साथ)
बेंगलुरु, 20 अक्टूबर कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से कहा कि वह 25 अक्टूबर को प्रस्तावित अपने ‘विजयादशमी पथ संचलन’ के लिए अधिकृत प्रशासन से औपचारिक अनुमति ले क्योंकि गृह विभाग को केवल सूचित करना या सहयोग मांगना, अनुमति लेने के बराबर नहीं है। प्रियांक खरगे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि इन पथ संचलन के सिलसिले में पुलिस को कर्मियों की तैनाती, परिवहन, भोजन, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं की योजना बनाने के लिए पर्याप्त समय चाहिए क्योंकि ऐसे मार्च में सार्वजनिक संसाधनों का इस्तेमाल होता है। उन्होंने कहा, ‘‘गृह विभाग को केवल सूचित करना, या उनसे सहयोग करने या आवश्यक इंतजाम करने के लिए कहना, अनुमति लेने के बराबर नहीं है।’’
प्रियांक खरगे ने आरएसएस से अपील की है कि वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन जमा करे और औपचारिक मंजूरी का इंतजार करे।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक खरगे ने आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 का हवाला दिया जिसमें कर्नाटक भर में 562 पथ संचलन का उल्लेख है तथा उनमें वर्दी पहने 2,21,963 लोगों ने हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा, ‘‘अब, जब आपमें से लाखों लोग एक ही दिन और एक ही समय पर कर्नाटक की सड़कों पर मार्च करने की योजना बना रहे हैं, तो पुलिस विभाग को काफी तैयारियां करनी होंगी।’’
मंत्री ने संघ से कहा कि वह कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने से पहले निर्धारित आवेदन फॉर्म भरें और जरूरी विवरण उपलब्ध कराएं। उन्होंने बेंगलुरु के थानों को आरएसएस की इकाइयों द्वारा सौंपे गए पत्र भी पोस्ट किए, जिनमें 25 अक्टूबर के लिए योजनाबद्ध विजयादशमी रूट मार्च का जिक्र है।
प्रियांक खरगे का आरोप है कि आरएसएस एक अपंजीकृत संगठन है, जिसका मतलब है कि यह भारत में गैर-कानूनी तरीके से काम कर रहा है। उन्होंने इसके आय और व्यय का विवरण भी मांगा था। आरएसएस का कहना है कि भारत में कई चीजें बिना पंजीकरण के होती हैं और हर चीज का पंजीकरण होना जरूरी नहीं है।

