ओडिशा के Rayagada में हिंसा भड़काने के आरोप में दो Tribal Rights Activists गिरफ्तार

ओडिशा के Rayagada में हिंसा भड़काने के आरोप में दो Tribal Rights Activists गिरफ्तार

ओडिशा के रायगढ़ा जिले में छह महीने पहले हुई झड़प के मामले में आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता डॉ. रैंडल सिक्वेरा और लक्ष्मण नाइक को गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई की एक नागरिक समाज संस्था ने निंदा करते हुए आरोप लगाया कि इसका मकसद अन्याय के खिलाफ होने वाले प्रदर्शनों को रोकना है। पुलिस ने मंगलवार को इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि दोनों ने अप्रैल में इलाके में खनन गतिविधियों के विरोध में प्रदर्शन के दौरान आदिवासियों को रायगढ़ा जिले के कांतामाल गांव में सुरक्षा कर्मियों पर हमला करने के लिए उकसाया था।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने 16 अक्टूबर की रात कालाहांडी जिले में सिक्वेरा और नाइक को उनके आवास से गिरफ्तार किया। उन्होंने बताया कि दोनों पर हत्या के प्रयास और दंगा करने सहित गंभीर आपराधिक आरोप लगाए गए हैं। उनके खिलाफ शस्त्र अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

नागरिक समाज समूह ‘कंसर्न्ड सिटिजन्स कमेटी, ओडिशा’ ने गिरफ्तारियों की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि दोनों को हिरासत में लेने का एकमात्र मकसद अन्याय के खिलाफ आदिवासियों की लड़ाई और जल, जंगल व जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर उनके अधिकारों के संघर्ष को विफल करना है। दक्षिण पश्चिम रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक अखिलेश्वर सिंह ने फोन पर पीटीआई-भाषा से कहा, “गिरफ्तार किए गए लोग निर्दोष नहीं थे। डॉ. रैंडल सिक्वेरा लोगों को चिकित्सा सेवाएं देने के बजाय आदिवासियों को राज्य सरकार के खिलाफ भड़काने में लगे थे।

नाइक भी लोगों को गुमराह कर रहे थे। पुलिस किसी निर्दोष व्यक्ति को, खासकर किसी चिकित्सक को, क्यों गिरफ्तार करेगी?”
अधिकारी ने कहा कि कालाहांडी और रायगढ़ा जिलों में कई चिकित्सक काम कर रहे हैं, लेकिन डॉ. सिक्वेरा को छोड़कर किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। सिंह ने गिरफ्तारी को सही ठहराते हुए कहा, “जो लोग उन्हें निर्दोष बता रहे हैं, उन्हें यह देखना चाहिए कि चिकित्सक लोगों को चिकित्सा सेवाएं दे रहे थे या उन्हें भड़का रहे थे।”
पुलिस द्वारा कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने के बारे में पूछे जाने पर पुलिस उपमहानिरीक्षक ने कहा, “उन्होंने अदालत में मजिस्ट्रेट के सामने ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया है।”
पुलिस ने बताया कि सिक्वेरा और नाइक को ओडिशा के रायगढ़ा जिले के कांतामाल गांव में अप्रैल में स्थानीय लोगों और पुलिसकर्मियों के बीच हुई झड़प से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया गया है।

भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने स्थानीय लोगों पर लाठीचार्ज किया था और आंसू गैस के गोले छोड़े थे। इस घटना में कई लोग और पुलिसकर्मी घायल हुए थे। एक अन्य अधिकारी ने कहा, “प्राथमिकी में रैंडल और नाइक के नाम नहीं थे, लेकिन बाद की जांच में इस मामले में उनकी संलिप्तता सामने आई।

उन्होंने कांतामाल के आदिवासी निवासियों को पुलिस बल पर हमला करने के लिए उकसाया था।”
नागरिक समाज समूह ने सभी लोकतांत्रिक और प्रगतिशील संगठनों से एकजुटता जताने और ‘जल, जंगल और जमीन’ के लिए ओडिशा के लोगों की लड़ाई लड़ रहे लोगों के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों को वापस लेने की मांग करने की अपील की। समूह ने आरोप लगाया कि अपनी जमीन, जंगल और जल संसाधनों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे आदिवासी और दलित समुदायों के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से दमन की कार्रवाई जारी है। नागरिक समाज संगठन ने दावा किया कि जन आंदोलनों का समर्थन कर रहे खनन विरोधी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा रहा है।

संगठन ने बताया कि नाइक ‘मा माटी माली सुरक्षा मंच’ और ‘समाजवादी जन परिषद’ के प्रमुख दलित कार्यकर्ता हैं, जबकि डॉ. सिक्वेरा कालाहांडी और रायगढ़ा जिलों में आदिवासी समुदायों के साथ काम कर रहे हैं। संगठन ने दावा किया कि दोनों खनन गतिविधियों और औद्योगिकीकरण से होने वाली परेशानियों के खिलाफ जन आंदोलनों का समर्थन करने और मानव बस्तियों की रक्षा के लिए समर्पित हैं।

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