पूर्व सीएम गहलोत बोले- प्रदेश में पानी-चारे का संकट:कहा- सरकार अभी से करे तैयारी, दूसरे राज्यों से करें व्यवस्था

पूर्व सीएम गहलोत बोले- प्रदेश में पानी-चारे का संकट:कहा- सरकार अभी से करे तैयारी, दूसरे राज्यों से करें व्यवस्था

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सोमवार को जोधपुर दौरे पर रहे। जोधपुर से जयपुर जाते समय उन्होंने एयरपोर्ट पर मीडिया बात करते हुए सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की कोशिश की। गहलोत ने प्रदेश में संभावित जल संकट, चारे की कमी और रोजगार के संकट को लेकर राज्य सरकार को अभी से सचेत होने की सलाह दी है। उन्होंने कहा- इस बार हालात चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। बांधों में पानी की आवक नहीं हुई है। फसलें प्रभावित हुई हैं और चारे का भी पर्याप्त उत्पादन नहीं हुआ है। ऐसे में पशुधन को बचाना और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के लिए रोजगार की व्यवस्था करना सरकार के सामने बड़ी चुनौती होगी। गहलोत ने कहा- जोधपुर में अभी से पानी की समस्या सामने आने लगी है। आने वाले समय में प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी स्थिति बिगड़ सकती है, क्योंकि कई क्षेत्रों में सूखे जैसे हालात हैं। उन्होंने कहा- सरकार को पेयजल संकट से निपटने के लिए अभी से पूरी योजना तैयार करनी चाहिए। साथ ही दूसरे राज्यों से पानी और चारे की व्यवस्था करने सहित सभी जरूरी विकल्पों पर काम शुरू करना चाहिए। चारा डिपो खोलने और पशु शिविर लगाने की मांग गहलोत ने कहा- सूखे के हालात से निपटने के लिए पहले प्रभावित तहसीलों और गांवों की पहचान कर उन्हें अकालग्रस्त घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। इसके बाद चारा डिपो खोलने, चारे की व्यवस्था करने और पशुओं के लिए शिविर लगाने की योजना बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा- चारे की कीमतें बढ़ने से पशुपालकों की परेशानी और बढ़ सकती है। ऐसे में सरकार को अनुदान और अन्य राहत उपायों पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा- जब तक सरकार पूरी तैयारी नहीं करेगी, तब तक प्रभावित लोगों और पशुपालकों को समय पर राहत देना मुश्किल होगा। इसलिए पेयजल, चारा और पशुधन संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। फसल खराब होने से ग्रामीण रोजगार पर असर पूर्व मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के मुद्दे पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा- इस बार फसलें प्रभावित हुई हैं। जिन गरीब परिवारों के पास अपनी जमीन नहीं है और जो मजदूरी करके जीवनयापन करते हैं। उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है। गहलोत ने मनरेगा का जिक्र करते हुए कहा- इसके बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की समस्या और गंभीर हो सकती है। उन्होंने राज्य सरकार से सवाल किया कि फसल खराब होने और मजदूरी के अवसर कम होने की स्थिति में ग्रामीण गरीबों को रोजगार कैसे मिलेगा। पंचायत चुनाव के बीच सरकार को किया सचेत पंचायत चुनाव का जिक्र करते हुए गहलोत ने नगर निगम चुनाव में कथित अनियमितताओं और पुलिस की भूमिका पर भी गहलोत ने सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि जोधपुर और जयपुर सहित कुछ जगहों पर कांग्रेस को अधिक वोट मिलने के बावजूद बोर्ड गठन की स्थिति अलग रही। उन्होंने ग्रामीणों से पंचायत और जिला परिषद चुनावों में मजबूती से भाग लेने तथा अपने प्रतिनिधियों को चुनने की अपील भी की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को खुद धरने पर बैठना पड़ा, यह सरकार की कार्यशैली पर सवाल गहलोत ने प्रदेश में मामले में एफआईआर दर्ज करने में देरी को लेकर सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि शिकायत मिलने के बाद समय पर एफआईआर दर्ज कर ली जाती तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती और कांग्रेस को धरना देने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। गहलोत ने कहा- इस मामले में ऐसी स्थिति बन गई कि कांग्रेस नेताओं को धरना देना पड़ा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को खुद धरने पर बैठना पड़ा। उन्होंने इसे सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाने वाला घटनाक्रम बताया।

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