(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, 19 अक्टूबर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने सोमवार को कहा कि अमेरिका, भारत के साथ एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के ‘बेहद करीब’ है। इसके साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि रूसी तेल खरीदने पर शुल्क से छूट इस फैसले से जुड़ी हुई है। उज्बेकिस्तान के समरकंद में रूबियो ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम इस समय भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं।
हम ऐसा करने के बेहद करीब हैं। लिहाजा, जब राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा छूट और इस तरह के मामलों पर कोई निर्णय लेते हैं, तो यह उन बातों में से एक है जिसे हम ध्यान में रखते हैं।’’
रूबियो जल्द ही भारत की यात्रा पर आने वाले हैं, जहां वह ऊर्जा, व्यापार, रक्षा, महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों और द्विपक्षीय सहयोग के अन्य प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा करने के लिए मुंबई में विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात करेंगे। रूबियो भारत के रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखने के कारणों को स्वीकार करते नजर आए।
अमेरिका ने सितंबर में ‘रूस एवं ईरान प्रतिबंध अधिनियम’ पारित किया था, जिसके बाद यह विषय उनके और जयशंकर के बीच बातचीत के केंद्र में रहा है। रूबियो ने कहा, ‘‘आप किसी एक मुख्य मुद्दे के कारण दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था को भी पटरी से नहीं उतार सकते। इसलिए इन सभी चीजों के बीच संतुलन साधना एक जटिल काम है।’’
उन्होंने कहा कि प्रत्येक देश के सामने जटिल कारकों का एक दायरा होता है जिसे उन्हें ध्यान में रखना पड़ता है, जैसे कि भौगोलिक स्थिति।
कुछ देशों के लिए वैकल्पिक स्रोतों से ऊर्जा प्राप्त करना बहुत कठिन होता है। रूबियो ने कहा, ‘‘यह कोई बहाना नहीं है, लेकिन जब आप विदेश नीति बनाते हैं तो इन सभी पहलुओं में संतुलन बनाना पड़ता है। बेशक, अमेरिका की विदेश नीति रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के घटनाक्रमों को ध्यान में रखती है, लेकिन यह केवल इसी से संचालित नहीं होती।’’
उन्होंने आगे कहा, ‘‘इसमें कई अन्य कारकों को भी शामिल करना होता है, जिनमें अन्य देशों के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंध और वे अपनी ऊर्जा आपूर्ति के मामले में वास्तविक रूप से क्या कर सकते हैं, यह देखना भी शामिल है।’’
माना जा रहा है कि जयशंकर ने रूबियो को स्पष्ट किया है कि भारत की तेल रिफाइनरियां मुख्य रूप से मध्यम सोर (सल्फ्यूरिक) कच्चे तेल का शोधन कर सकती हैं, जिसकी आपूर्ति पश्चिम एशियाई देशों और रूस द्वारा की जाती है।
उन्होंने रूबियो को यह भी बताया कि वेनेजुएला भारी श्रेणी के कच्चे तेल की आपूर्ति करता है और अमेरिका के पास हल्की श्रेणी का कच्चा तेल है, जिसका भारत की रिफाइनरी में उपयोग करने से पहले मिश्रण करना आवश्यक होगा। ईरान युद्ध के कारण पश्चिम एशियाई देशों से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने के बीच भारत अर्थव्यवस्था की गति बनाए रखने के लिए रूसी तेल पर निर्भर है।

