अररिया में डांडिया की धूम,नेपाल में झिझिया ने मोहा मन:दुर्गा पूजा पर भारत-नेपाल सीमा के दोनों ओर दिखे लोकसंस्कृति के रंग, पारंपरिक नृत्य-संगीत से उत्सवी माहौल

अररिया में डांडिया की धूम,नेपाल में झिझिया ने मोहा मन:दुर्गा पूजा पर भारत-नेपाल सीमा के दोनों ओर दिखे लोकसंस्कृति के रंग, पारंपरिक नृत्य-संगीत से उत्सवी माहौल

दुर्गा पूजा के उल्लास के बीच सीमांचल से लेकर पड़ोसी देश नेपाल तक उत्सव और लोकसंस्कृति के विविध रंग देखने को मिल रहे हैं। अररिया में जहां डांडिया की धुन पर युवा-युवतियां और महिलाएं जमकर थिरकीं, वहीं नेपाल के विराटनगर में मिथिला की पारंपरिक लोककला झिझिया ने लोगों का ध्यान खींचा। दोनों जगहों पर नृत्य, संगीत और परंपरा के संगम ने दुर्गा पूजा के उत्सवी माहौल को खास बना दिया। आधुनिक अंदाज में डांडिया और सदियों पुरानी लोकपरंपरा झिझिया की प्रस्तुतियों ने सीमांचल और मिथिला की साझा सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई। अररिया में डांडिया की धुन पर थिरके युवा और महिलाएं दुर्गा पूजा के अवसर पर अररिया शहर के एक आवासीय होटल परिसर में डांडिया नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में युवा, युवतियां और महिलाएं शामिल हुईं। संगीत की धुन पर प्रतिभागियों ने पारंपरिक अंदाज में डांडिया खेला और उत्सव का आनंद लिया। आयोजन स्थल पर देर रात तक उत्साह और उमंग का माहौल बना रहा। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे प्रतिभागियों ने डांडिया की लय पर नृत्य कर कार्यक्रम को आकर्षक बना दिया। संगीत और नृत्य के बीच लोगों ने एक-दूसरे के साथ उत्सव की खुशियां साझा कीं। कार्यक्रम में शामिल लोगों के बीच दुर्गा पूजा को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। शहर में पहले से ही दुर्गा पूजा को लेकर चहल-पहल है। विभिन्न पूजा पंडालों में अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। मां दुर्गा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। पूजा-पंडालों की सजावट और धार्मिक आयोजनों के बीच डांडिया कार्यक्रम ने उत्सव में एक अलग रंग जोड़ दिया है। पूरा शहर भक्ति और उल्लास में डूबा नजर आ रहा है। विराटनगर में झिझिया की पारंपरिक प्रस्तुति ने खींचा ध्यान इधर, नेपाल के विराटनगर में महेंद्र चौक के समीप मिथिला की पारंपरिक लोककला झिझिया की मनमोहक प्रस्तुति देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं ने सिर पर मटका रखा, जिसमें जलता हुआ दीपक था। मटके के ऊपर ढक्कन पर जलती आग के साथ महिलाओं ने पारंपरिक शैली में नृत्य प्रस्तुत किया। इस अनूठे दृश्य को देखने के लिए सड़क पर लोगों की भीड़ जुट गई। झिझिया मिथिलांचल का पारंपरिक लोकनृत्य है, जिसका संबंध दुर्गा पूजा और लोक आस्था से माना जाता है। इस नृत्य में पारंपरिक वेशभूषा, लयबद्ध कदम और सिर पर दीपक से सजे मटके को संतुलित रखने की कला विशेष आकर्षण होती है। इसकी प्रस्तुति के जरिए महिलाएं मिथिला की सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत रखती हैं। विराटनगर में झिझिया की प्रस्तुति ने यह भी दिखाया कि मिथिला की लोकसंस्कृति भारत की सीमा तक सीमित नहीं है। नेपाल के तराई क्षेत्र में भी इस सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलती है। लोकनृत्य के प्रति लोगों की दिलचस्पी ने आयोजन को खास बना दिया। सीमा के पार भी जीवंत है मिथिला की विरासत अररिया में डांडिया की मस्ती और विराटनगर में झिझिया की प्रस्तुति ने दुर्गा पूजा के उत्सव को सांस्कृतिक विविधता से जोड़ दिया। एक ओर डांडिया ने आधुनिक उत्सवी आयोजनों के बीच लोगों को नृत्य और संगीत के जरिए जोड़ा, तो दूसरी ओर झिझिया ने पारंपरिक लोककला और लोकआस्था की विरासत को सामने रखा। भारत-नेपाल सीमा के दोनों ओर दुर्गा पूजा के दौरान दिखाई देने वाले ये सांस्कृतिक रंग साझा परंपराओं और आपसी जुड़ाव की झलक पेश करते हैं। आधुनिक आयोजनों के साथ लोककलाओं की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि बदलते समय में भी पारंपरिक संस्कृति लोगों के जीवन का अहम हिस्सा बनी हुई है। दुर्गा पूजा के उल्लास के बीच सीमांचल से लेकर पड़ोसी देश नेपाल तक उत्सव और लोकसंस्कृति के विविध रंग देखने को मिल रहे हैं। अररिया में जहां डांडिया की धुन पर युवा-युवतियां और महिलाएं जमकर थिरकीं, वहीं नेपाल के विराटनगर में मिथिला की पारंपरिक लोककला झिझिया ने लोगों का ध्यान खींचा। दोनों जगहों पर नृत्य, संगीत और परंपरा के संगम ने दुर्गा पूजा के उत्सवी माहौल को खास बना दिया। आधुनिक अंदाज में डांडिया और सदियों पुरानी लोकपरंपरा झिझिया की प्रस्तुतियों ने सीमांचल और मिथिला की साझा सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई। अररिया में डांडिया की धुन पर थिरके युवा और महिलाएं दुर्गा पूजा के अवसर पर अररिया शहर के एक आवासीय होटल परिसर में डांडिया नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में युवा, युवतियां और महिलाएं शामिल हुईं। संगीत की धुन पर प्रतिभागियों ने पारंपरिक अंदाज में डांडिया खेला और उत्सव का आनंद लिया। आयोजन स्थल पर देर रात तक उत्साह और उमंग का माहौल बना रहा। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे प्रतिभागियों ने डांडिया की लय पर नृत्य कर कार्यक्रम को आकर्षक बना दिया। संगीत और नृत्य के बीच लोगों ने एक-दूसरे के साथ उत्सव की खुशियां साझा कीं। कार्यक्रम में शामिल लोगों के बीच दुर्गा पूजा को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। शहर में पहले से ही दुर्गा पूजा को लेकर चहल-पहल है। विभिन्न पूजा पंडालों में अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। मां दुर्गा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। पूजा-पंडालों की सजावट और धार्मिक आयोजनों के बीच डांडिया कार्यक्रम ने उत्सव में एक अलग रंग जोड़ दिया है। पूरा शहर भक्ति और उल्लास में डूबा नजर आ रहा है। विराटनगर में झिझिया की पारंपरिक प्रस्तुति ने खींचा ध्यान इधर, नेपाल के विराटनगर में महेंद्र चौक के समीप मिथिला की पारंपरिक लोककला झिझिया की मनमोहक प्रस्तुति देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं ने सिर पर मटका रखा, जिसमें जलता हुआ दीपक था। मटके के ऊपर ढक्कन पर जलती आग के साथ महिलाओं ने पारंपरिक शैली में नृत्य प्रस्तुत किया। इस अनूठे दृश्य को देखने के लिए सड़क पर लोगों की भीड़ जुट गई। झिझिया मिथिलांचल का पारंपरिक लोकनृत्य है, जिसका संबंध दुर्गा पूजा और लोक आस्था से माना जाता है। इस नृत्य में पारंपरिक वेशभूषा, लयबद्ध कदम और सिर पर दीपक से सजे मटके को संतुलित रखने की कला विशेष आकर्षण होती है। इसकी प्रस्तुति के जरिए महिलाएं मिथिला की सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत रखती हैं। विराटनगर में झिझिया की प्रस्तुति ने यह भी दिखाया कि मिथिला की लोकसंस्कृति भारत की सीमा तक सीमित नहीं है। नेपाल के तराई क्षेत्र में भी इस सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलती है। लोकनृत्य के प्रति लोगों की दिलचस्पी ने आयोजन को खास बना दिया। सीमा के पार भी जीवंत है मिथिला की विरासत अररिया में डांडिया की मस्ती और विराटनगर में झिझिया की प्रस्तुति ने दुर्गा पूजा के उत्सव को सांस्कृतिक विविधता से जोड़ दिया। एक ओर डांडिया ने आधुनिक उत्सवी आयोजनों के बीच लोगों को नृत्य और संगीत के जरिए जोड़ा, तो दूसरी ओर झिझिया ने पारंपरिक लोककला और लोकआस्था की विरासत को सामने रखा। भारत-नेपाल सीमा के दोनों ओर दुर्गा पूजा के दौरान दिखाई देने वाले ये सांस्कृतिक रंग साझा परंपराओं और आपसी जुड़ाव की झलक पेश करते हैं। आधुनिक आयोजनों के साथ लोककलाओं की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि बदलते समय में भी पारंपरिक संस्कृति लोगों के जीवन का अहम हिस्सा बनी हुई है।  

​

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *