गाजी में शारदीय नवरात्र की षष्ठी तिथि पर दुर्गाबाड़ी में मां दुर्गा का पट भक्तों के लिए विधिवत खोल दिया गया है। इसी के साथ अगले चार दिनों तक चलने वाले इस महाउत्सव की भव्य और औपचारिक शुरुआत हो गई है। इस वर्ष का दुर्गा पूजा महोत्सव पूरे शहर में सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसके पीछे की बड़ी वजह इसका 95 वर्षों का गौरवशाली इतिहास और इस बार पूरी तरह महिलाओं के हाथों में इसकी कमान होना है। अपने 95 साल के सफर में यह पहला मौका है जब दुर्गाबाड़ी का पूरा आयोजन, प्रबंधन और व्यवस्था महिलाएं अपने मजबूत कंधों पर संभाल रही हैं। यह पहल न सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक नजरिए से, बल्कि महिला सशक्तीकरण के लिहाज से भी एक मील का पत्थर साबित हो रही है। जीवंत हुई बंगाल की संस्कृति मां का पट खुलते ही पूरा दुर्गाबाड़ी परिसर मां के जयकारों और शंख-घंटियों की गूंज से भक्तिमय हो गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर समिति से जुड़ी सभी महिलाएं एक ही रंग और एक जैसी पारंपरिक साड़ियों में नजर आईं, जो आपसी एकता और अनुशासन का अनूठा संदेश दे रही थी। सभी ने मिलकर पूरी श्रद्धा के साथ मां दुर्गा की षष्ठी पूजा-अर्चना की। यहां की भव्य सजावट, लाइटिंग और अनुष्ठानों में बंगाल की प्राचीन संस्कृति और लोक परंपराओं की जीवंत झलक देखने को मिल रही है। बंगाली शैली में हो रही मां की आराधना से पूरा माहौल पूरी तरह बंगाल के दुर्गाोत्सव जैसा प्रतीत हो रहा है। चार दिनों तक महाप्रसाद और भव्य भंडारे की व्यवस्था दुर्गाबाड़ी समिति की ओर से दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष और पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। आयोजन के तहत आज से लगातार चार दिनों तक भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा। इसके अलावा भव्य भंडारे की भी व्यवस्था की गई है, ताकि दूर-दराज से पहुंच रहे हर श्रद्धालु को मां का प्रसाद प्राप्त हो सके। बढ़ती भीड़ को देखते हुए पूजा समिति ने सुरक्षा और सुविधा के भी चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं, ताकि किसी को असुविधा न हो। नारी सशक्तीकरण और एकजुटता का मजबूत संदेश समिति के कोषाध्यक्ष अस्मिता चक्रवर्ती ने कहा कि दुर्गाबाड़ी का यह 95वां वर्ष हम सभी के लिए बेहद ऐतिहासिक है। इतने लंबे इतिहास में यह पहला अवसर है, जब पूजा की संपूर्ण बागडोर महिलाओं ने संभाली है। महिलाओं की यह सामूहिक भागीदारी नारी सशक्तीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। वहीं, समिति के सदस्य महुआ चटर्जी ने कहा कि हम सभी ने मिलकर इस आयोजन को भव्य रूप देने के लिए दिन-रात मेहनत की है। बंगाल की परंपरा के अनुसार पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद और भंडारे की विशेष व्यवस्था की गई है। गाजी में शारदीय नवरात्र की षष्ठी तिथि पर दुर्गाबाड़ी में मां दुर्गा का पट भक्तों के लिए विधिवत खोल दिया गया है। इसी के साथ अगले चार दिनों तक चलने वाले इस महाउत्सव की भव्य और औपचारिक शुरुआत हो गई है। इस वर्ष का दुर्गा पूजा महोत्सव पूरे शहर में सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसके पीछे की बड़ी वजह इसका 95 वर्षों का गौरवशाली इतिहास और इस बार पूरी तरह महिलाओं के हाथों में इसकी कमान होना है। अपने 95 साल के सफर में यह पहला मौका है जब दुर्गाबाड़ी का पूरा आयोजन, प्रबंधन और व्यवस्था महिलाएं अपने मजबूत कंधों पर संभाल रही हैं। यह पहल न सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक नजरिए से, बल्कि महिला सशक्तीकरण के लिहाज से भी एक मील का पत्थर साबित हो रही है। जीवंत हुई बंगाल की संस्कृति मां का पट खुलते ही पूरा दुर्गाबाड़ी परिसर मां के जयकारों और शंख-घंटियों की गूंज से भक्तिमय हो गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर समिति से जुड़ी सभी महिलाएं एक ही रंग और एक जैसी पारंपरिक साड़ियों में नजर आईं, जो आपसी एकता और अनुशासन का अनूठा संदेश दे रही थी। सभी ने मिलकर पूरी श्रद्धा के साथ मां दुर्गा की षष्ठी पूजा-अर्चना की। यहां की भव्य सजावट, लाइटिंग और अनुष्ठानों में बंगाल की प्राचीन संस्कृति और लोक परंपराओं की जीवंत झलक देखने को मिल रही है। बंगाली शैली में हो रही मां की आराधना से पूरा माहौल पूरी तरह बंगाल के दुर्गाोत्सव जैसा प्रतीत हो रहा है। चार दिनों तक महाप्रसाद और भव्य भंडारे की व्यवस्था दुर्गाबाड़ी समिति की ओर से दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष और पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। आयोजन के तहत आज से लगातार चार दिनों तक भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा। इसके अलावा भव्य भंडारे की भी व्यवस्था की गई है, ताकि दूर-दराज से पहुंच रहे हर श्रद्धालु को मां का प्रसाद प्राप्त हो सके। बढ़ती भीड़ को देखते हुए पूजा समिति ने सुरक्षा और सुविधा के भी चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं, ताकि किसी को असुविधा न हो। नारी सशक्तीकरण और एकजुटता का मजबूत संदेश समिति के कोषाध्यक्ष अस्मिता चक्रवर्ती ने कहा कि दुर्गाबाड़ी का यह 95वां वर्ष हम सभी के लिए बेहद ऐतिहासिक है। इतने लंबे इतिहास में यह पहला अवसर है, जब पूजा की संपूर्ण बागडोर महिलाओं ने संभाली है। महिलाओं की यह सामूहिक भागीदारी नारी सशक्तीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। वहीं, समिति के सदस्य महुआ चटर्जी ने कहा कि हम सभी ने मिलकर इस आयोजन को भव्य रूप देने के लिए दिन-रात मेहनत की है। बंगाल की परंपरा के अनुसार पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद और भंडारे की विशेष व्यवस्था की गई है।

