World Trauma Day: अक्सर बाथरूम के गीले फर्श पर पैर फिसलने या सीढ़ियों से उतरते वक्त अचानक लड़खड़ा जाने पर हम संभलकर उठ जाते हैं। कपड़े झाड़ते हैं, थोड़ा सा दर्द सहते हैं और सोचते हैं चलो, हड्डी तो नहीं टूटी, सब ठीक है। बाहर कहीं खून की एक बूंद भी नहीं दिखती, इसलिए घरवाले भी इसे मामूली नील पड़ना या सामान्य गुमचोट मानकर बात आई-गई कर देते हैं। लेकिन असली खतरा यहीं से शुरू होता है। शरीर के बाहर भले ही खरोंच तक न आई हो, लेकिन अंदर के अंगों पर लगा जोर का झटका आगे चलकर नुकसान कर सकता है।
कब और क्यों मनाया जाता है वर्ल्ड ट्रामा डे?
नेशनल डे कैलेंडर के अनुसार, हर साल 17 अक्टूबर को वर्ल्ड ट्रामा डे (World Trauma Day) मनाया जाता है। इस का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं, घरेलू हादसों में होने वाली मौतों के प्रति लोगों को जागरूक करना है। अक्सर लोग दुर्घटना के बाद शुरुआती समय में बरती जाने वाली सावधानियों से अनजान होते हैं, जिसके कारण मामूली चोट भी जानलेवा बन जाती है। यह दिन हमें यह सिखाता है कि किसी भी आपदा या चोट के समय सही समय पर सही कदम कैसे उठाए जाएं। 2026 के वर्ल्ड ट्रामा डे की थीम प्रिवेंशन, प्रिपेयर्डनेस एंड प्रोटेक्टिंग लाइव्स, स्ट्रेंथनिंग इमरजेंसी ट्रॉमा केयर (Prevention, Preparedness and Protecting Lives: Strengthening Emergency Trauma Care) है।
क्या है ‘गोल्डन ऑवर’?
विश्व स्वास्थ्य संघठन (WHO) के अनुसार, ट्रॉमा या गंभीर चोट लगने के बाद के शुरुआती 60 मिनट को गोल्डन ऑवर यानी स्वर्णिम घंटा कहा जाता है। यह वह समय होता है जब मरीज की जान बचाने की सबसे ज्यादा संभावना होती है। यदि इस दौरान शरीर के भीतर हो रहे ब्लीडिंग या गंभीर डैमेज को पहचानकर सही मेडिकल मदद मिल जाए, तो मरीज पूरी तरह सुरक्षित हो सकता है। इसके विपरीत, यदि ये 60 मिनट लापरवाही में निकल जाएं, तो अंदरूनी रक्तस्राव शॉक या मल्टी-ऑर्गन फेलियर का कारण बन सकता है।
इंटरनल इंजरी के 4 संकेत कौनसे हैं?
अगर शरीर के बाहर कोई घाव या खून नहीं दिख रहा है, तो इन 4 खतरनाक संकेतों को कभी नजरअंदाज न करें। ये अंदरूनी ब्लीडिंग के संकेत हैं;
- बेवजह चक्कर आना या बेहोशी।
- लगातार उल्टी या जी मिचलाना।
- सुस्ती और मानसिक भ्रम।
- पेट या सीने का कड़ा होना।
अस्पताल पहुंचने से पहले क्या करें?
जब तक मरीज को अस्पताल न पहुंचाया जाए, तब तक इन जरूरी बातों का ध्यान रखें;
- RICE प्रोटोकॉल अपनाएं- क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, चोट लगे हिस्से को आराम दें (Rest), उस पर तुरंत ठंडी बर्फ या ठंडे पानी की पट्टी रखें (Ice – ध्यान रहे बर्फ सीधी त्वचा पर न हो), हल्के दबाव वाली पट्टी बांधें (Compression), और उस हिस्से को दिल के स्तर से थोड़ा ऊपर उठाएं (Elevation)।
- मरीज की सही पोजीशन- अगर मरीज बेहोश है या उसे चक्कर आ रहे हैं, तो उसे जबरदस्ती सीधा न बिठाएं। उसे एक करवट लिटाएं (Recovery Position), ताकि सांस की नली साफ रहे और उल्टी फेफड़ों में न जाए।
- भीड़ न लगाएं- मरीज के आसपास हवा आने-जाने दें और तुरंत किसी पेशेवर एम्बुलेंस या नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से संपर्क करें।

इस वर्ल्ड ट्रामा डे पर यह संकल्प लें कि गुमचोट या अनजाने दर्द को कभी नजरअंदाज नहीं करेंगे, न ही बिना डॉक्टरी सलाह पेनकिलर खाने जैसी गलतियां करेंगे। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और अगर किसी भी लक्षण का अंदेशा हो, तो बिना समय गंवाए नजदीकी इमरजेंसी सेंटर पहुंचे।

