गुना शहर के एक निजी स्कूल में फैंसी ड्रेस कार्यक्रम के दौरान नाबालिग छात्रा से कथित तौर पर विवादित राजनीतिक संदेशों वाली प्रस्तुति कराने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है। आयोग ने मध्यप्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, गुना कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई प्रतिवेदन मांगा है। आयोग के अनुसार, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि स्कूल प्रबंधन ने नाबालिग विद्यार्थियों का वैचारिक और राजनीतिक संदेशों के लिए इस्तेमाल किया। आयोग ने मामले को प्रथम दृष्टया मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा प्रतीत होने वाला मानते हुए संबंधित अधिकारियों से जांच और कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। फैंसी ड्रेस कार्यक्रम में छात्रा की प्रस्तुति पर विवाद मंगलवार को शहर के एक निजी स्कूल में कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों के लिए फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। इसमें बच्चों ने अलग-अलग पोशाकों में हिस्सा लिया। इसी दौरान एक छात्रा स्कूल यूनिफॉर्म में मंच पर पहुंची। उसके मुंह पर पट्टी बंधी थी और हाथ में एक तख्ती थी। तख्ती पर ‘सरकार की पाठशाला’ और ‘अटेंडेंस शीट’ लिखा था। इसके नीचे बेरोजगारी, नफरत, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, महंगाई, गरीबी, वोट चोरी, पेपर लीक और घोटाले जैसे शब्दों के साथ ‘प्रेजेंट सर’ लिखा था, जबकि लोकतंत्र के सामने ‘एब्सेंट सर’ लिखा था। छात्रा की पीठ पर लटकी दूसरी तख्ती पर लोकतंत्र, सवाल पूछने और जागरूकता से जुड़ा संदेश लिखा था। इस प्रस्तुति को लेकर विवाद शुरू हो गया। ABVP और हिंदू समाज ने किया प्रदर्शन प्रस्तुति के विरोध में गुरुवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने प्रदर्शन किया। परिषद के सदस्यों ने स्कूल के प्रिंसिपल को ज्ञापन सौंपकर स्पष्टीकरण मांगा। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्टीकरण जारी किया और जिम्मेदारी अभिभावकों पर डाली। शुक्रवार को हिंदू समाज के लोगों ने भी स्कूल के सामने प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपा। इस घटनाक्रम के बाद मामला और चर्चा में आ गया। 15 अक्टूबर को मिली शिकायत, 16 अक्टूबर को जारी हुआ पत्र आयोग के विधि प्रभाग की ओर से 16 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र के अनुसार, मामले की शिकायत 15 अक्टूबर को आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गई थी। शिकायत की जांच के बाद आयोग ने प्रथम दृष्टया इसे पीड़ित के मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा प्रतीत होने वाला मामला माना। शिकायत में आरोप लगाया गया कि स्कूल प्रबंधन ने नाबालिग छात्र-छात्राओं का कथित रूप से वैचारिक और राजनीतिक संदेशों के लिए इस्तेमाल किया। इसमें एक नाबालिग छात्रा से विवादित राजनीतिक संदेशों वाली प्रस्तुति कराने का आरोप भी शामिल है। प्रमुख सचिव, कलेक्टर और DEO से मांगा कार्रवाई प्रतिवेदन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत मामले का संज्ञान लिया है। आयोग ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, गुना कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कराने और की गई कार्रवाई का प्रतिवेदन दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने रिपोर्ट की एक प्रति निर्धारित ई-मेल पर भेजने को भी कहा है। अब संबंधित अधिकारियों की जांच और कार्रवाई रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे की प्रक्रिया तय होगी।

