झज्जर हादसे में महिला की मौत पर MACT का फैसला:परिवार को मिलेंगे 14.33 लाख,रीढ़ की हड्डी में चोट के बाद दिव्यांग हुई थी महिला

झज्जर हादसे में महिला की मौत पर MACT का फैसला:परिवार को मिलेंगे 14.33 लाख,रीढ़ की हड्डी में चोट के बाद दिव्यांग हुई थी महिला

झज्जर जिले के गांव छारा में कार हादसे में घायल महिला की मौत के मामले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने मृतका के परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने पति और बच्चों सहित कानूनी वारिसों को 14 लाख 33 हजार 792 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस राशि पर याचिका दायर करने की तारीख से सात प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा। अदालत ने माना कि हादसे में रीढ़ की हड्डी में लगी गंभीर चोटों के कारण महिला 100 प्रतिशत दिव्यांग हो गई थी और इन्हीं चोटों के चलते उसकी मौत हुई। छह साल पुराने मामले में आया फैसला मामला तीन सितंबर 2018 का है। छारा निवासी राकेश अपने बेटे अंकुर के साथ कार में सवार होकर झज्जर जा रही थीं। सुबह करीब 7:15 बजे छारा वाटर टैंक के पास कार खड्डे में गिरकर पलट गई। हादसे में राकेश की रीढ़ की हड्डी और पीठ में गंभीर चोटें आईं। मामले में चार सितंबर को थाना सदर बहादुरगढ़ में कार चालक पवन कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। हादसे के बाद राकेश का लंबे समय तक उपचार चला, लेकिन वह बिस्तर पर रहने को मजबूर हो गईं। 16 मई 2020 को उनकी मौत हो गई। इसके बाद पति अनिल कुमार, बेटियों प्रियंका व प्रीति और बेटे अंकुर ने अदालत में 50 लाख रुपये मुआवजे का दावा किया। मौत हादसे के डेढ़ साल बाद हुई, अदालत में यह बना अहम सवाल मामले में महिला की मौत दुर्घटना के तुरंत बाद नहीं हुई थी। ऐसे में हादसे में लगी चोटों और मृत्यु के बीच संबंध अहम था। अधिकरण के पीठासीन अधिकारी सुखप्रीत सिंह ने मेडिकल रिपोर्ट, अस्पताल के डिस्चार्ज कार्ड, दिव्यांगता प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों का आकलन किया। चिकित्सीय साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माना कि महिला की मौत का संबंध हादसे में लगी चोटों से था। बीमा कंपनी ने उठाई आपत्ति, चालक-मालिक को किया एकतरफा बीमा कंपनी आईसीआईसीआई लोम्बार्ड ने एफआईआर दर्ज कराने में एक दिन की देरी और वाहन को गलत तरीके से मामले में शामिल किए जाने सहित आपत्तियां उठाईं। चालक पवन कुमार और वाहन मालिक सतीश कुमार ने भी शुरुआत में दुर्घटना से इनकार किया, लेकिन बाद में अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण उन्हें एकतरफा घोषित कर दिया गया। ऐसे तय हुआ 14.33 लाख रुपये मुआवजा अधिकरण ने मृतका की मासिक आय 8,500 रुपये मानकर भविष्य की संभावित आय वृद्धि के लिए 25 प्रतिशत जोड़ा और व्यक्तिगत खर्च की कटौती की। 41 वर्ष की उम्र के आधार पर 14 का मल्टीप्लायर लगाते हुए आय के नुकसान के मद में 13 लाख 38 हजार 792 रुपये तय किए गए। उपचार, देखभाल, विशेष आहार, परिवहन, दर्द व पीड़ा, संपत्ति के नुकसान और अंतिम संस्कार के खर्च को जोड़कर कुल मुआवजा 14 लाख 33 हजार 792 रुपये निर्धारित किया गया। पहले भुगतान करेगी बीमा कंपनी, फिर चालक-मालिक से वसूलेगी रकम अधिकरण ने बीमा शर्तों के उल्लंघन और चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होने के आधार पर बीमा कंपनी को ‘पे एंड रिकवर’ का अधिकार दिया है। इसके तहत कंपनी पहले मृतका के कानूनी वारिसों को मुआवजा देगी और बाद में चालक पवन कुमार तथा वाहन मालिक सतीश कुमार से रकम वसूल सकेगी। मुआवजे पर याचिका दायर करने की तारीख से सात प्रतिशत सालाना ब्याज भी देय होगा।

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