Maa Pitambara Peeth Datia: मां पीतांबरा पीठ देश में शक्ति उपासना, तंत्र साधना और ऐतिहासिक रहस्यों के एक प्रमुख केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है। पंडित नरेंद्र शास्त्री ने बताते हैं कि पीठ से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार पूज्यपाद स्वामीजी महाराज ने यहां महाविद्याओं की स्थापना की थी। 1935 में पीठ परिसर में मां बगलामुखी को विराजमान कराया था। मां बगलामुखी (पीतांबरा माई), मां धूमावती और मां महात्रिपुर सुंदरी विराजमान हैं। भक्तों को मां पीतांबरा और मां धूमावती के प्रत्यक्ष दर्शन होते हैं, जबकि मां महात्रिपुर सुंदरी की पूजा केवल यंत्र रूप में सीमित साधकों द्वारा की जाती है। मां बगलामुखी को शत्रुओं पर विजय और संकटों से मुक्ति की कामना से पूजा जाता है।
जानें डिटेल्स
इस मंदिर से जुड़ा सबसे ऐतिहासिक प्रसंग वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध का है, जब देश की रक्षा व विजय की कामना के लिए स्वामीजी महाराज के मार्गदर्शन में 51 विद्वान ब्राह्मणों ने सात दिन तक विशेष हवन-अनुष्ठान संपन्न किया था। माना जाता है कि इसके बाद चीनी सेना वापस लौट गई थी। नवरात्र के पावन अवसर पर यहां श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ता है। मंदिर की आरती, दर्शन के सख्त नियम और प्रसाद की अनूठी परंपराएं इसे बेहद खास बनाती हैं।
मंदिर को लेकर खास बातें
प्रसाद : मां पीतांबरा को मीठा प्रसाद और मां धूमावती को समोसा, कचौरी व नमकीन का प्रसाद अर्पित किया जाता है।
आरती व पट नियम : मां पीतांबरा की आरती सुबह 7 बजे, शाम 7 बजे और नवरात्र में रात 9:30 बजे होती है, जबकि मां धूमावती के पट सुबह-शाम 8 बजे केवल 10 मिनट के लिए खुलते हैं।
दर्शन : मंदिर में दर्शन नि:शुल्क हैं। वीआइपी दर्शन की कोई व्यवस्था नहीं है। सभी को समान रूप से दर्शन का अवसर मिलता है। हालांकि विशेष पूजा और अनुष्ठान के लिए शुल्क निर्धारित हैं।
ऐसे पहुंचें
सडक़ मार्ग: राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर पडऩे वाला दतिया ग्वालियर, झांसी, कानपुर, जयपुर, इंदौर आदि से सडक़ परिवहन से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।
रेल मार्ग: मां पीतांबरा पीठ दतिया रेलवे स्टेशन से महज लगभग 3 किलोमीटर दूर है।
हवाई मार्ग : निकटतम हवाई अड्डा ग्वालियर है। यहां से दतिया की दूरी लगभग 75 किलोमीटर है।

