लखनऊ के महानगर में चल रही श्री रामलीला के तीसरे दिन शुक्रवार को रामायण के भावुक प्रसंगों का मंचन किया गया। दशरथ-कैकई संवाद से लेकर राम वनगमन, केवट प्रसंग, सुमंत विलाप और दशरथ देहावसान तक के दृश्यों ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। पूरे परिसर में जय श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे। मंथरा के कहने पर कैकई कोप भवन में चली जाती हैं। राजा दशरथ के पहुंचने पर वह उन्हें पुराने दो वरदानों की याद दिलाती हैं। कैकई राम को 14 वर्ष के वनवास और भरत को राजगद्दी देने का वर मांगती हैं। यह सुनकर दशरथ व्याकुल हो जाते हैं। वे कैकई से राम को वन न भेजने की गुहार लगाते हैं। मंचन के दौरान भावुक हुए दर्शक मंचन के दौरान दशरथ का संवाद ‘अरी तू क्यों मारे है पापिन, मोहे राम हृदय से हैं प्यारे’ सुनकर दर्शक भावुक हो उठे। इसके बाद राम पिता के वचन को निभाने के लिए वन जाने को तैयार हो जाते हैं। माता सीता भी उनके साथ चलने का निर्णय लेती हैं। राम के वन जाने की खबर सुनकर लक्ष्मण भी उनके साथ जाने की जिद करते हैं। वे प्रभु की सेवा को अपना धर्म बताते हैं। तीनों के वन प्रस्थान का दृश्य देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं। गंगा किनारे पहुंचे राम, सीता और लक्ष्मण से केवट ने प्रभु के चरण पखारने की अनुमति मांगी। भक्ति से भरा संवाद मंचन का प्रमुख आकर्षण केवट के प्रेम और भक्ति से भरा संवाद मंचन का प्रमुख आकर्षण रहा। चरण पखारने के बाद उसने भगवान को नाव से गंगा पार कराया। इसके बाद सुमंत के विलाप और दशरथ के देहावसान का मार्मिक मंचन किया। लीला में राम की भूमिका यशी लोहुमी, लक्ष्मण फाल्गुनी लोहुमी, सीता अनुराधा मिश्रा, दशरथ कुणाल पन्त, कैकई आशा रावत, सुमंत कमल पंत, कौशल्या भारती जोशी कांडपाल और निषादराज/केवट की भूमिका महेंद्र पन्त ने निभाई।

