सोमनाथ में छह भोजनालयों के मालिकों ने इस मंदिर नगरी के कुछ क्षेत्रों में मांसाहारी भोजन की बिक्री और भंडारण पर रोक लगाने की गुजरात सरकार की अधिसूचना को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति निशा एम. ठाकोर की अदालत में हुई। अब इस पर अगली सुनवाई 19 अक्टूबर को होगी।
ये रेस्तरां इस साल अगस्त में जारी सरकारी अधिसूचना में निर्धारित छह प्रतिबंधित क्षेत्रों में से एक में स्थित हैं। अधिसूचना के तहत इन क्षेत्रों में मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री और भंडारण पर स्थायी रूप से रोक लगाई गई है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि अधिकारियों ने उन्हें अपने भोजनालय बंद करने के लिए मजबूर किया।
उन्होंने इस फैसले को इस आधार पर चुनौती दी है कि यह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) के तहत मिले उनके अधिकारों का उल्लंघन करता है। उनका कहना है कि अधिकारी बिना किसी उचित कारण के किसी व्यक्ति को व्यापार करने या आजीविका कमाने से नहीं रोक सकते। याचिकाकर्ताओं के वकील असरार मंसूरी ने कहा कि एक याचिकाकर्ता को पुलिस चौकी में इस आशय का इकबालिया बयान देने के लिए मजबूर किया गया कि वह भविष्य में मांसाहारी भोजन नहीं बेचेगा और केवल शाकाहारी खाद्य पदार्थों का कारोबार करेगा।
सोमनाथ नगर के छह क्षेत्रों में मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगाया गया है। इनमें सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे और धार्मिक महत्व वाले अन्य क्षेत्र शामिल हैं। यह फैसला इसलिए लिया गया है, ताकि तीर्थयात्रियों की धार्मिक भावनाएं आहत न हों।

