विश्व बैंक समूह ने भारत में पिछले चार साल में विकास कार्यों के लिए 36 अरब डॉलर की निजी पूंजी जुटाने में मदद की है। इसमें सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए 9.6 अरब डॉलर शामिल हैं। समूह निजी क्षेत्र के नेतृत्व में आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के प्रयास तेज कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (आईएफसी) के दक्षिण एशिया विभाग के निदेशक मैनुअल रेयेस-रेटाना ने कहा कि समूह की ओर से जुटाई गई निजी पूंजी वित्त वर्ष 2021-22 के करीब तीन अरब डॉलर से लगभग पांच गुना होकर वित्त वर्ष 2025-26 में 14.5 अरब डॉलर हो गई। उन्होंने कहा कि इस बढ़ोतरी से विकास से जुड़े निवेश में निवेशकों की बढ़ती रुचि का पता चलता है। अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (आईएफसी) और बहुपक्षीय निवेश गारंटी एजेंसी (एमआईजीए) की गारंटी से निवेश जोखिम कम करने तथा निजी पूंजी आकर्षित करने में मदद मिल रही है।
रेयेस-रेटाना ने कहा कि संस्थागत निवेशक ऐसे साधनों में तेजी से रुचि ले रहे हैं, क्योंकि वे विश्व बैंक समूह के हामीदारी मानकों और संचालन संबंधी प्रक्रियाओं से परिचित हैं। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमें निजी क्षेत्र के निवेशकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और इस क्षेत्र में गतिविधियां बढ़ रही हैं। भारत समेत दुनियाभर के निवेशक अपने निवेश साधनों और परिसंपत्तियों में विविधता लाने के विकल्प तलाश रहे हैं।’’
निजी पूंजी जुटाने का मतलब विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए निजी निवेशकों से निवेश आकर्षित करना और सार्वजनिक वित्तपोषण को पूरक सहायता देना है।
इससे विकास परियोजनाओं में सार्वजनिक धन के साथ निजी निवेश का भी इस्तेमाल हो सकता है। गारंटी और जोखिम साझा करने की अन्य व्यवस्थाएं निवेश को अधिक आकर्षक बनाने में मदद करती हैं। विश्व बैंक समूह ने भारत के एमएसएमई के लिए वित्त तक पहुंच बेहतर बनाने की पहलों को भी समर्थन दिया है।
ये उद्यम रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन अक्सर उन्हें किफायती दरों पर ऋण हासिल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विश्व बैंक ने 43.6 करोड़ डॉलर के ‘एमएसएमई प्रदर्शन में सुधार एवं तेजी लाने’ (रैंप) संबंधी कार्यक्रम के तहत व्यापार प्राप्य बट्टाकरण प्रणाली (टीआरईडीएस) में सुधारों को समर्थन दिया। यह एक डिजिटल मंच है, जिसके जरिये कारोबार खरीदारों से भुगतान मिलने का इंतजार करने के बजाय बकाया ‘इनवॉइस’ के आधार पर धन जुटा सकते हैं।
विश्व बैंक समूह के अनुसार, इस पहल से 2.5 लाख से अधिक एमएसएमई को तेजी से पूंजी हासिल करने में मदद मिली है। वहीं, 30 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां इस मंच से जुड़ चुकी हैं जिससे ऋणदाताओं का दायरा बढ़ा है। समूह ने कहा कि महिलाओं के स्वामित्व वाले कारोबारों के लिए ऋण गारंटी की हिस्सेदारी दो साल में 14 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई।
इससे एक अरब डॉलर से अधिक की पूंजी जुटाने में मदद मिली। भारत के पहले हरित एमएसएमई गारंटी कोष से 4,000 से अधिक एमएसएमई को लाभ हुआ है। साथ ही हरित और संसाधन-कुशल अर्थव्यवस्था से जुड़ी गतिविधियों में चार करोड़ डॉलर के निवेश को समर्थन मिला है।
वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 के लिए अपनी देश साझेदारी रूपरेखा के तहत समूह 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को समर्थन देने के लिए समावेशी और सतत आर्थिक वृद्धि पर ध्यान दे रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘संस्थागत निवेशक इन गारंटी को महत्व देते हैं, क्योंकि वे विश्व बैंक समूह के मानकों एवं संचालन संबंधी प्रक्रियाओं से परिचित हैं। इसी वजह से संस्थागत निवेशकों की इन परिसंपत्तियों में दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है।’’
रेयेस-रेटाना ने कहा कि विश्व बैंक समूह वित्तपोषण, गारंटी और साझेदारियों के जरिये बाजारों को मजबूत करके, व्यवहार्य परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार करके और जोखिम कम करके सरकार की विकास प्राथमिकताओं तथा निजी निवेश के बीच सेतु का काम करता है।

