सिद्धार्थनगर में ग्राम पंचायतों में हर्षिता इंटरप्राइजेज को किए गए भुगतानों की जांच की मांग उठी है। भीमापार निवासी अधिवक्ता प्रशस्त उपाध्याय ने 15 अक्टूबर को प्रमुख सचिव, जिलाधिकारी और राज्य कर आयुक्त से शिकायत कर फर्म के कारोबार, खरीदारी और सरकारी धन के इस्तेमाल की जांच कराने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिले के कई विकासखंडों में बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए फर्म को भुगतान किया गया। खुनियांव ब्लॉक की गौरडीह ग्राम पंचायत में फॉगिंग मशीनों की खरीद को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। संबंधित विभाग और फर्म का पक्ष सामने आने पर मामले की स्थिति और स्पष्ट होगी। कई ग्राम पंचायतों में भुगतान की शिकायत अधिवक्ता प्रशस्त उपाध्याय के मुताबिक, जिले के लगभग सभी विकासखंडों की ग्राम पंचायतों से हर्षिता इंटरप्राइजेज को भुगतान किए जाने की जानकारी मिली है। शिकायतकर्ता ने शोहरतगढ़ विकासखंड की अतरी और महमुदुल्लाह ग्रांट समेत कई ग्राम पंचायतों में हुए भुगतानों के दस्तावेज होने का दावा किया है। उन्होंने भुगतान की कुल रकम और खरीदी गई वस्तुओं का ब्योरा सार्वजनिक जांच के जरिए सामने लाने की मांग की है। खुनियांव ब्लॉक की गौरडीह ग्राम पंचायत में फॉगिंग मशीनों की खरीद पर खास तौर से सवाल उठाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, चार मशीनों की आपूर्ति के नाम पर भुगतान किया गया, जबकि शिकायतकर्ता का दावा है कि वहां केवल एक मशीन की आपूर्ति होनी चाहिए थी। बाजार में करीब 12 हजार रुपए कीमत वाली मशीन के लिए 45 से 50 हजार रुपए तक भुगतान किए जाने का भी आरोप है। वास्तविक संख्या, कीमत और आपूर्ति के रिकॉर्ड की जांच से ही इसकी पुष्टि हो सकेगी।
भुगतान मंजूर करने वाले अधिकारियों की भूमिका पर सवाल शिकायत में पंचायती राज विभाग के अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है। यह पता लगाने पर जोर दिया गया है कि खरीदारी के लिए निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं और भुगतान मंजूर करने से पहले बिलों तथा सामान की आपूर्ति का सत्यापन किया गया था या नहीं। अधिवक्ता ने भुगतान की प्रक्रिया और सरकारी धन के इस्तेमाल की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। जीएसटी और टैक्स भुगतान की भी जांच मांगी अधिवक्ता ने राज्य कर आयुक्त से फर्म के जीएसटी बिलों, टैक्स भुगतान और सरकारी खजाने में जमा रकम की पड़ताल कराने की मांग की है। शिकायत में यह भी जांचने को कहा गया है कि बिलों में दिखाई गई जीएसटी राशि के अनुसार टैक्स जमा हुआ या नहीं और टीडीएस समेत अन्य वैधानिक कटौतियों का पालन किया गया या नहीं। बिल, भुगतान विवरण और आपूर्ति संबंधी रिकॉर्ड की जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

