नालंदा विश्वविद्यालय बना इसरो के आईआईआरएस का नोडल सेंटर:छात्रों को मिलेंगे फ्री ऑनलाइन कोर्स; रिमोट सेंसिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे विषयों में दक्षता हासिल करेंगे स्टूडेंट्स

नालंदा विश्वविद्यालय बना इसरो के आईआईआरएस का नोडल सेंटर:छात्रों को मिलेंगे फ्री ऑनलाइन कोर्स; रिमोट सेंसिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे विषयों में दक्षता हासिल करेंगे स्टूडेंट्स

अंतरिक्ष विज्ञान और आधुनिक भू-स्थानिक तकनीक के क्षेत्र में विद्यार्थियों की दक्षता बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के घटक संस्थान ‘भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान’, देहरादून ने नालंदा विश्वविद्यालय को अपना नोडल सेंटर नामित किया है। इस साझेदारी के तहत विश्वविद्यालय के सभी संकायों और विषयों के विद्यार्थियों को रिमोट सेंसिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी और ज्योग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम जैसे अत्याधुनिक विषयों में निःशुल्क ऑनलाइन पाठ्यक्रम करने का सीधा अवसर मिलेगा। ई-क्लास प्लेटफॉर्म से जुड़ेंगे छात्र आईआईआरएस-इसरो के डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम के तहत संचालित होने वाले इन विशेष पाठ्यक्रमों के लिए विद्यार्थियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान इसरो के ई-क्लास प्लेटफॉर्म के माध्यम से विशेषज्ञ वैज्ञानिकों द्वारा लाइव इंटरैक्टिव कक्षाएं ली जाएंगी और उच्च स्तरीय अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी। वर्ष 2026 में संचालित होने वाले विभिन्न सत्रों और उनके शेड्यूल की विस्तृत जानकारी आईआईआरएस-इसरो के आधिकारिक कोर्स कैलेंडर पर जारी कर दी गई है। शोध और अंतर्विषयक शिक्षा को नई रफ्तार विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य छात्रों में तकनीकी कौशल विकसित करने के साथ-साथ अंतर्विषयक (इंटरडिसिप्लिनरी) शिक्षा और उच्च स्तरीय शोध को बढ़ावा देना है। पर्यावरण, भूगोल, इतिहास या मानविकी से जुड़े छात्र भी आधुनिक सैटेलाइट डेटा और भू-स्थानिक विश्लेषण का उपयोग अपने प्रोजेक्ट्स में कर सकेंगे। प्रो. दीपक कुमार बने समन्वयक नोडल सेंटर के जरिए पाठ्यक्रमों में पंजीकरण की मंजूरी और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं के समन्वय के लिए स्कूल ऑफ इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट स्टडीज के प्रोफेसर दीपक कुमार को कार्यक्रम समन्वयक नियुक्त किया गया है। इच्छुक विद्यार्थी पंजीकरण प्रक्रिया व कोर्स विवरण के लिए उनसे संपर्क कर सकते हैं। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इसे आधुनिक तकनीक के शैक्षणिक उपयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान में मील का पत्थर बताया है। अंतरिक्ष विज्ञान और आधुनिक भू-स्थानिक तकनीक के क्षेत्र में विद्यार्थियों की दक्षता बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के घटक संस्थान ‘भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान’, देहरादून ने नालंदा विश्वविद्यालय को अपना नोडल सेंटर नामित किया है। इस साझेदारी के तहत विश्वविद्यालय के सभी संकायों और विषयों के विद्यार्थियों को रिमोट सेंसिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी और ज्योग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम जैसे अत्याधुनिक विषयों में निःशुल्क ऑनलाइन पाठ्यक्रम करने का सीधा अवसर मिलेगा। ई-क्लास प्लेटफॉर्म से जुड़ेंगे छात्र आईआईआरएस-इसरो के डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम के तहत संचालित होने वाले इन विशेष पाठ्यक्रमों के लिए विद्यार्थियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान इसरो के ई-क्लास प्लेटफॉर्म के माध्यम से विशेषज्ञ वैज्ञानिकों द्वारा लाइव इंटरैक्टिव कक्षाएं ली जाएंगी और उच्च स्तरीय अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी। वर्ष 2026 में संचालित होने वाले विभिन्न सत्रों और उनके शेड्यूल की विस्तृत जानकारी आईआईआरएस-इसरो के आधिकारिक कोर्स कैलेंडर पर जारी कर दी गई है। शोध और अंतर्विषयक शिक्षा को नई रफ्तार विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य छात्रों में तकनीकी कौशल विकसित करने के साथ-साथ अंतर्विषयक (इंटरडिसिप्लिनरी) शिक्षा और उच्च स्तरीय शोध को बढ़ावा देना है। पर्यावरण, भूगोल, इतिहास या मानविकी से जुड़े छात्र भी आधुनिक सैटेलाइट डेटा और भू-स्थानिक विश्लेषण का उपयोग अपने प्रोजेक्ट्स में कर सकेंगे। प्रो. दीपक कुमार बने समन्वयक नोडल सेंटर के जरिए पाठ्यक्रमों में पंजीकरण की मंजूरी और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं के समन्वय के लिए स्कूल ऑफ इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट स्टडीज के प्रोफेसर दीपक कुमार को कार्यक्रम समन्वयक नियुक्त किया गया है। इच्छुक विद्यार्थी पंजीकरण प्रक्रिया व कोर्स विवरण के लिए उनसे संपर्क कर सकते हैं। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इसे आधुनिक तकनीक के शैक्षणिक उपयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान में मील का पत्थर बताया है।  

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