मुजफ्फरपुर- जमानत के बाद भी बढ़ी मुसहरी सीओ की मुश्किलें:सदर और मुसहरी थाने में नए मामले दर्ज, एसएसपी बोले- बख्शे नहीं जाएंगे दोषी

मुजफ्फरपुर- जमानत के बाद भी बढ़ी मुसहरी सीओ की मुश्किलें:सदर और मुसहरी थाने में नए मामले दर्ज, एसएसपी बोले- बख्शे नहीं जाएंगे दोषी

मुजफ्फरपुर में फर्जी दाखिल-खारिज और भू-माफियाओं से साठगांठ के मामले में सीओ-आरओ को जमानत मिली। इसके बावजूद सीओ की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। कोर्ट के आदेश पर सदर और मुसहरी थाने में उनके खिलाफ नए मामले दर्ज हुए, जिनकी गहन जांच होगी। एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने बताया कि पुलिस सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कर रही है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि इस मामले में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। चाहे वह भू-माफिया हो, अपराधी हो या राजस्व विभाग का अधिकारी-कर्मचारी। कानून कड़ी कार्रवाई करेगा। दरअसल, 29 अगस्त 2026 को विजय कुमार ने अहियापुर थाने में फर्जी दस्तावेजों से जमीन की दाखिल-खारिज की एफआईआर दर्ज कराई थी। एसएसपी के निर्देश पर बनी एसआईटी ने पाया कि विजय कुमार की 70 डिसमिल पुश्तैनी जमीन का फर्जी केवाला बनाकर वैशाली के कृष्णनंदन पासवान ने दाखिल-खारिज कराया। बाद में जमीन सोनू कुमार उर्फ अभिनव, अरविन्द कुमार मेहता और तुषार सिंह के नाम रजिस्टर हुई। जांच के दौरान मुसहरी अंचल में पदस्थापित अंचल अधिकारी (सीओ) महेन्द्र शुक्ला, अनुज कुमार एवं राजस्व अधिकारी (आरओ) करूण करण की भूमिका अत्यंत संदिग्ध पाई गई। तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र का साक्ष्य मिला, जिसके बाद कोर्ट से निर्गत वारंट पर सीओ महेन्द्र शुक्ला और आरओ करूण करण को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। वहीं बिदुपुर थाना कांड के अभियुक्तों को भी रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने आम जनता से भू-माफियाओं और अवैध कब्जों की जानकारी जिला नियंत्रण कक्ष या पुलिस के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करने की अपील की है। जांच के आधार पर वारंट जारी किया गया था प्रभारी एसडीपीओ टाउन-2 हिमांशु कुमार ने बताया कि सहबाजपुर निवासी रिटायर्ड अवर सचिव विजय कुमार ने सीओ समेत आठ लोगों के खिलाफ अहियापुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामले की जांच के दौरान सीओ महेंद्र शुक्ला, आरओ करुण कुमार और राजस्व कर्मचारी अनुज कुमार के खिलाफ वारंट जारी किया गया था। यह वारंट केस के आईओ की अर्जी पर विशेष कोर्ट (एमपी-एमएलए मामले) ने जारी किया था। इनमें से सीओ और आरओ को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि राजस्व कर्मचारी अनुज कुमार फरार है। सदर अस्पताल में तीन घंटे निगरानी में रहे थे सीओ शुक्रवार शाम विशेष कोर्ट में पेशी से पहले पुलिस सीओ और आरओ को स्वास्थ्य जांच के लिए सदर अस्पताल ले गई थी। वहां बेचैनी और बीपी बढ़ने की शिकायत पर सीओ महेंद्र शुक्ला करीब तीन घंटे तक चिकित्सकों की निगरानी में रहे थे। इसके बाद दोनों को कोर्ट में पेश किया गया था। 70 डिसमिल पुश्तैनी जमीन की हेराफेरी का आरोप पुलिस के अनुसार, मामले में विजय कुमार की 70 डिसमिल खातियानी और पुश्तैनी जमीन का कथित तौर पर फर्जी केवाला तैयार कर दाखिल-खारिज कराया गया था। जांच में वैशाली के कृष्णनंदन पासवान समेत अन्य लोगों की भूमिका सामने आई है। मुजफ्फरपुर में फर्जी दाखिल-खारिज और भू-माफियाओं से साठगांठ के मामले में सीओ-आरओ को जमानत मिली। इसके बावजूद सीओ की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। कोर्ट के आदेश पर सदर और मुसहरी थाने में उनके खिलाफ नए मामले दर्ज हुए, जिनकी गहन जांच होगी। एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने बताया कि पुलिस सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कर रही है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि इस मामले में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। चाहे वह भू-माफिया हो, अपराधी हो या राजस्व विभाग का अधिकारी-कर्मचारी। कानून कड़ी कार्रवाई करेगा। दरअसल, 29 अगस्त 2026 को विजय कुमार ने अहियापुर थाने में फर्जी दस्तावेजों से जमीन की दाखिल-खारिज की एफआईआर दर्ज कराई थी। एसएसपी के निर्देश पर बनी एसआईटी ने पाया कि विजय कुमार की 70 डिसमिल पुश्तैनी जमीन का फर्जी केवाला बनाकर वैशाली के कृष्णनंदन पासवान ने दाखिल-खारिज कराया। बाद में जमीन सोनू कुमार उर्फ अभिनव, अरविन्द कुमार मेहता और तुषार सिंह के नाम रजिस्टर हुई। जांच के दौरान मुसहरी अंचल में पदस्थापित अंचल अधिकारी (सीओ) महेन्द्र शुक्ला, अनुज कुमार एवं राजस्व अधिकारी (आरओ) करूण करण की भूमिका अत्यंत संदिग्ध पाई गई। तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र का साक्ष्य मिला, जिसके बाद कोर्ट से निर्गत वारंट पर सीओ महेन्द्र शुक्ला और आरओ करूण करण को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। वहीं बिदुपुर थाना कांड के अभियुक्तों को भी रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने आम जनता से भू-माफियाओं और अवैध कब्जों की जानकारी जिला नियंत्रण कक्ष या पुलिस के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करने की अपील की है। जांच के आधार पर वारंट जारी किया गया था प्रभारी एसडीपीओ टाउन-2 हिमांशु कुमार ने बताया कि सहबाजपुर निवासी रिटायर्ड अवर सचिव विजय कुमार ने सीओ समेत आठ लोगों के खिलाफ अहियापुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामले की जांच के दौरान सीओ महेंद्र शुक्ला, आरओ करुण कुमार और राजस्व कर्मचारी अनुज कुमार के खिलाफ वारंट जारी किया गया था। यह वारंट केस के आईओ की अर्जी पर विशेष कोर्ट (एमपी-एमएलए मामले) ने जारी किया था। इनमें से सीओ और आरओ को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि राजस्व कर्मचारी अनुज कुमार फरार है। सदर अस्पताल में तीन घंटे निगरानी में रहे थे सीओ शुक्रवार शाम विशेष कोर्ट में पेशी से पहले पुलिस सीओ और आरओ को स्वास्थ्य जांच के लिए सदर अस्पताल ले गई थी। वहां बेचैनी और बीपी बढ़ने की शिकायत पर सीओ महेंद्र शुक्ला करीब तीन घंटे तक चिकित्सकों की निगरानी में रहे थे। इसके बाद दोनों को कोर्ट में पेश किया गया था। 70 डिसमिल पुश्तैनी जमीन की हेराफेरी का आरोप पुलिस के अनुसार, मामले में विजय कुमार की 70 डिसमिल खातियानी और पुश्तैनी जमीन का कथित तौर पर फर्जी केवाला तैयार कर दाखिल-खारिज कराया गया था। जांच में वैशाली के कृष्णनंदन पासवान समेत अन्य लोगों की भूमिका सामने आई है।  

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