आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में मंगलवार को मार्कशीट को लेकर हंगामा हो गया। हेल्प डेस्क पर तैनात कर्मचारी विशाल दीप और पूर्व छात्र नेता र्निवेश शर्मा के बीच मार्कशीट देने को लेकर कहासुनी हो गई। देखते ही देखते मामला गाली-गलौज तक पहुंच गया। छात्र नेताओं का आरोप है कि विवाद के दौरान कर्मचारी विशाल दीप ने मारपीट के लिए फोन कर बाहर से बाउंसर बुला लिए। डेस्क पर बैठा कर्मचारी मनमानी करता
पूर्व छात्र नेता र्निवेश शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय का नियम है कि किसी भी छात्र की मार्कशीट हाथ में नहीं दी जाती, उसे डाक से भेजा जाता है। लेकिन हेल्प डेस्क पर बैठा कर्मचारी अपनी मनमानी करता है। जिसे चाहता है उसे हाथ में मार्कशीट दे देता है। अपने परिचितों को बुलाकर मार्कशीट और माइग्रेशन के टिकट दे देता है। इसकी कई बार शिकायत की गई है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता। मार्कशीट देने से मना कर दिया
आज एक छात्रा का फॉर्म भरना था, जिसके लिए मार्कशीट की जरूरत थी। डाक से मार्कशीट आने में दो दिन लग जाते, जिससे फॉर्म भरने में देरी होती। इसलिए उन्होंने कर्मचारी से मार्कशीट हाथ में देने की मांग की। जैसे वह अन्य लोगों को देता है, वैसे ही हमें भी दे दो। इसी बात पर वह गाली-गलौज करने लगा और मार्कशीट देने से मना कर दिया। वहीं छात्र नेता गौरव और अंकुश गौतम ने कहा कि इन दिनों कई सरकारी भर्तियां निकली हुई हैं। हर दिन सैकड़ों छात्र अपनी डिग्री और मार्कशीट लेने के लिए विश्वविद्यालय आ रहे हैं। विश्वविद्यालय ने कंप्यूटर प्रभारी को ही हेल्प डेस्क का प्रभारी बना रखा है, जो नियम के विरुद्ध है। वह अपनी मर्जी से काम करता है। मन करेगा तो मार्कशीट देगा, नहीं तो टरका देगा। उसने भ्रष्टाचार फैला रखा है। इसकी जांच होनी चाहिए। आरोप है कि वह हेल्प डेस्क पर आने वाली छात्राओं की वीडियो भी बनाता है। अगर कोई वीडियो गलत तरीके से वायरल हो गई तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। कर्मचारी ने छात्रनेताओं को बताया दलाल
दूसरी ओर कर्मचारी विशाल दीप ने सभी आरोपों को खारिज किया है। विशाल दीप ने कहा कि इन दिनों नौकरियां निकली हैं, इसलिए सभी छात्रों को मार्कशीट की जरूरत है। ये लोग जो खुद को छात्रनेता बताते हैं, असल में दलाल हैं। ये भोले-भाले छात्रों से पैसे लेकर ठगने का काम करते हैं। आज र्निवेश शर्मा मार्कशीट लेने आया था, लेकिन जिस छात्र की मार्कशीट थी वह उसके साथ नहीं था। नियम के अनुसार बिना छात्र के मार्कशीट नहीं दी जा सकती, इसलिए मैंने मना कर दिया तो वह गाली देने लगा।

