Nagpur Graduate Constituency Election: महाराष्ट्र विधान परिषद की नागपुर स्नातक निर्वाचन सीट को लेकर भाजपा में चल रही बगावत फिलहाल थम गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता अनिल सोले ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में दाखिल अपना नामांकन वापस लेने का ऐलान किया है। भाजपा ने इस सीट से सुधाकर कोहले को आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है, जिससे नाराज होकर सोले ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया था। आखिरकार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस खुद नागपुर में सोले के घर पहुंचे और उनसे बातचीत कर उनकी नाराजगी दूर करने की कोशिश की। इस दौरान राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले समेत पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को अपने घर आया देखकर अनिल सोले भावुक हो गए। बातचीत के बाद उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा की और पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार को जिताने के लिए काम करने का भरोसा दिया।
फडणवीस के घर पहुंचने पर भावुक हुए अनिल सोले
अनिल सोले ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस खुद उनसे अनुरोध करने के लिए उनके घर आए, यह उनके लिए भावनात्मक क्षण था। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस खुद मुझसे अनुरोध करने के लिए यहां आए। किसी को इस बारे में क्या लगता है, यह अलग बात है, लेकिन मुझे यह सब बहुत अच्छा नहीं लगा।”
इस दौरान वहां मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें संभाला। सोले ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक पार्टी को मजबूत करने के लिए काम किया है और कभी ऐसा कदम नहीं उठाया जिससे पार्टी को नुकसान पहुंचे।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी उनसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ चर्चा कर मामले को सुलझाने का अनुरोध किया था। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी उनसे मुलाकात की।
किन मुद्दों पर नाराज थे अनिल सोले?
अनिल सोले ने स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी पार्टी से नहीं, बल्कि कामकाज के तरीके से थी। उनका कहना था कि जिस निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार उतारा जाता है, वहां के लोगों और कार्यकर्ताओं से संवाद करके निर्णय लेना चाहिए।
उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि कई पुराने कार्यकर्ताओं ने वर्षों तक पार्टी के लिए मेहनत की है, लेकिन उन्हें पर्याप्त जिम्मेदारी या काम नहीं मिल रहा है। ऐसे कार्यकर्ताओं को संगठन और सरकार में उचित अवसर मिलना चाहिए।
सोले के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना और कार्यप्रणाली में जरूरी बदलाव करने का भरोसा दिया। पुराने कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां देने के मुद्दे पर भी सकारात्मक चर्चा हुई।
‘मैं अपनी उम्मीदवारी वापस ले रहा हूं’
मुख्यमंत्री के साथ बातचीत के बाद अनिल सोले ने अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल करने से कुछ कार्यकर्ता नाराज हुए थे। इसके लिए उन्होंने उनसे माफी भी मांगी।
सोले ने कहा कि उनके साथ वर्षों से काम करने वाले कई सहयोगी इस दौरान उनके साथ खड़े रहे। उन्होंने उन सभी की मौजूदगी में उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा की।
उन्होंने यह भी कहा कि उनके नाम को उम्मीदवारों की सूची से हटाने की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने अपने समर्थकों से आधिकारिक उम्मीदवार के पक्ष में काम करने का संकेत देते हुए चुनाव में भाजपा की जीत सुनिश्चित करने का संकल्प जताया।
सुधाकर कोहले को जिताने की जिम्मेदारी अनिल सोले पर
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अनिल सोले के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सोले लंबे समय से पार्टी के लिए काम करते रहे हैं और नाराज कार्यकर्ताओं को समझाने की जिम्मेदारी भी अक्सर वही निभाते थे।
फडणवीस के मुताबिक, सोले ने पार्टी के सामने संगठन की कार्यप्रणाली में सुधार और पुराने कार्यकर्ताओं को उचित जिम्मेदारी देने जैसे मुद्दे रखे थे। सरकार और संगठन इन सुझावों पर काम करेंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार सुधाकर कोहले, अनिल सोले के ही विद्यार्थी रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि सोले अब अपने विद्यार्थी को चुनाव में जीत दिलाने के लिए पूरी ताकत लगाएंगे।
नागपुर स्नातक सीट पर भाजपा की राह आसान करने की कोशिश
नागपुर स्नातक निर्वाचन सीट पर अनिल सोले की बगावत से भाजपा के सामने चुनौती खड़ी हो गई थी। पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ वरिष्ठ नेता के निर्दलीय मैदान में उतरने से संगठन के भीतर असंतोष की चर्चा तेज हो गई थी।
अब सोले की उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा के बाद पार्टी ने राहत की सांस ली है। मुख्यमंत्री की पहल और वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप से नाराजगी दूर करने का प्रयास सफल होता दिखाई दे रहा है। हालांकि, चुनाव में भाजपा उम्मीदवार को कितनी सफलता मिलती है, यह नतीजों के बाद ही स्पष्ट होगा।

