भास्कर न्यूज | हसनपुर प्रखंड अंतर्गत सकरपुरा गांव स्थित मनोकामना मंदिर में शारदीय नवरात्र में स्थापित किए जाने वाली माता दुर्गा की वैष्णवी शक्ति की महिमा की कुछ खास ख्याति है। इस मंदिर वाली माता की कृपा से कई घरों में चिराग जले हैं। भक्तों के मन में माता के प्रति ऐसी आस्था है कि माता के दरबार में आने से निःसंतान को संतान की प्राप्ति होती है। हर साल शारदीय नवरात्र में हसनपुर सहित समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, दरभंगा सहित दूर-दराज के जिले से श्रद्धालु संतान प्राप्ति के लिए माता की कृपा लेने पहुंचते हैं। निशा पूजा के बाद माता के नेत्र पट खुलने के बाद से लेकर विजयादशमी तक विसर्जन से पहले तक मंदिर में कृपा लेने वाले महिला व पुरुष श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। कुल मिलाकर शारदीय नवरात्र में यह दुर्गा मंदिर आस्था का केंद्र बना रहता है। अधिकतर मंदिरों में तो सप्तमी तिथि को ही मां का पट खुल जाता है। लेकिन इस मंदिर में निशा पूजा के बाद मां का पट खुलता है। पट खुलते ही माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगती है। सकरपुरा स्थित आसपास के गांवों से महिलाएं खौंयछा भरने के लिए मंदिर परिसर पहुंचती है। नेत्र पट खुलने से पहले ही खौंयछा भरने वाली महिलाएं मंदिर परिसर में जुटी रहती है। घंटों इंतजार के बाद नेत्र पट खुलने पर खौंयछा भरने का काम शुरू हो जाता है। शारदीय नवरात्र में गांव के लोग मन्नतें लेकर मंदिर पहुंचते हैं। मन्नतें पूरी होने पर प्रतिमा निर्माण करवाते हैं श्रद्धालु जिन श्रद्धालुओं की मन्नतें पूरी हो जाती है, वे मंदिर में प्रतिमा निर्माण करवाते हैं। अगले करीब 30 सालों तक प्रतिमा निर्माण करवाने के लिए श्रद्धालुओं ने अपना नाम दर्ज करवा लिया है। बताया जाता है कि इस मनोकामना दुर्गा मंदिर शारदीय नवरात्र में हर साल माता दुर्गा, माता लक्ष्मी, माता सरस्वती, प्रथम पूज्य भगवान गणेश, कार्तिकेय, त्रिनेत्र धारी भगवान शिव की मिट्टी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। मिट्टी की प्रतिमा के स्थापित किए जाने की इस मंदिर में पुरानी परंपरा है। क्षेत्र के नामचीन मूर्तिकारों द्वारा मां दुर्गा सहित अन्य देवी-देवताओं के मिट्टी की प्रतिमा का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। भास्कर न्यूज | हसनपुर प्रखंड अंतर्गत सकरपुरा गांव स्थित मनोकामना मंदिर में शारदीय नवरात्र में स्थापित किए जाने वाली माता दुर्गा की वैष्णवी शक्ति की महिमा की कुछ खास ख्याति है। इस मंदिर वाली माता की कृपा से कई घरों में चिराग जले हैं। भक्तों के मन में माता के प्रति ऐसी आस्था है कि माता के दरबार में आने से निःसंतान को संतान की प्राप्ति होती है। हर साल शारदीय नवरात्र में हसनपुर सहित समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, दरभंगा सहित दूर-दराज के जिले से श्रद्धालु संतान प्राप्ति के लिए माता की कृपा लेने पहुंचते हैं। निशा पूजा के बाद माता के नेत्र पट खुलने के बाद से लेकर विजयादशमी तक विसर्जन से पहले तक मंदिर में कृपा लेने वाले महिला व पुरुष श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। कुल मिलाकर शारदीय नवरात्र में यह दुर्गा मंदिर आस्था का केंद्र बना रहता है। अधिकतर मंदिरों में तो सप्तमी तिथि को ही मां का पट खुल जाता है। लेकिन इस मंदिर में निशा पूजा के बाद मां का पट खुलता है। पट खुलते ही माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगती है। सकरपुरा स्थित आसपास के गांवों से महिलाएं खौंयछा भरने के लिए मंदिर परिसर पहुंचती है। नेत्र पट खुलने से पहले ही खौंयछा भरने वाली महिलाएं मंदिर परिसर में जुटी रहती है। घंटों इंतजार के बाद नेत्र पट खुलने पर खौंयछा भरने का काम शुरू हो जाता है। शारदीय नवरात्र में गांव के लोग मन्नतें लेकर मंदिर पहुंचते हैं। मन्नतें पूरी होने पर प्रतिमा निर्माण करवाते हैं श्रद्धालु जिन श्रद्धालुओं की मन्नतें पूरी हो जाती है, वे मंदिर में प्रतिमा निर्माण करवाते हैं। अगले करीब 30 सालों तक प्रतिमा निर्माण करवाने के लिए श्रद्धालुओं ने अपना नाम दर्ज करवा लिया है। बताया जाता है कि इस मनोकामना दुर्गा मंदिर शारदीय नवरात्र में हर साल माता दुर्गा, माता लक्ष्मी, माता सरस्वती, प्रथम पूज्य भगवान गणेश, कार्तिकेय, त्रिनेत्र धारी भगवान शिव की मिट्टी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। मिट्टी की प्रतिमा के स्थापित किए जाने की इस मंदिर में पुरानी परंपरा है। क्षेत्र के नामचीन मूर्तिकारों द्वारा मां दुर्गा सहित अन्य देवी-देवताओं के मिट्टी की प्रतिमा का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।

