राजस्थान हाईकोर्ट ने दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की जांच, उपचार और पुनर्वास की सुविधाओं पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने दोनों सरकारों को तीन सप्ताह में विस्तृत शपथपत्र पेश करने का समय दिया है। मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायाधीश बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने स्वावलंबन फाउंडेशन की याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने पाया कि 21 नवंबर 2025 के आदेश के बावजूद बिंदुवार जवाब दाखिल नहीं किया गया है। याचिका में बताया गया कि राजस्थान में जीन टेस्टिंग की सुविधा कम है। मरीजों को निजी लैब पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे इलाज में देरी होती है। वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य ने बताया कि एम्स जोधपुर ही एकमात्र सेंटर ऑफ एक्सीलेंस है, जिससे दूर के मरीजों को परेशानी होती है। मुख्यमंत्री आयुष्मान बाल संबल योजना में भी सीमित दुर्लभ बीमारियां शामिल हैं और वयस्क मरीजों के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार से 1 अक्टूबर 2022 को तैयार एक्शन प्लान पर हुई प्रगति की जानकारी भी शपथपत्र में देने को कहा। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।

