अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर सोमवार को समाहरणालय सभाकक्ष में बालिकाओं के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को उनके अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा के प्रति जागरूक करना और उनमें आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता का विकास करना रहा। कार्यक्रम के दौरान डीएम ने बालिकाओं से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं, पढ़ाई, स्वास्थ्य, पोषण तथा भविष्य की आकांक्षाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बाल विवाह और दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों के दुष्परिणामों पर चर्चा करते हुए बालिकाओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा बालिकाओं के सशक्तीकरण का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। शिक्षित होकर बालिकाएं न केवल अपना भविष्य संवार सकती हैं, बल्कि परिवार और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। डीएम ने कहा कि बालिकाओं को समान अवसर, सुरक्षित वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बालिकाओं को किसी भी प्रकार के भेदभाव और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ निर्भीक होकर आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया। शादी रुकवाकर पढ़ाई जारी रखने का लिया फैसला कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू मदनपुर प्रखंड की पांच बालिकाओं का सम्मान रहा। इन बालिकाओं ने बाल विवाह के खिलाफ साहसपूर्वक आवाज उठाई और सामाजिक दबावों का सामना करते हुए अपनी शादी रुकवाने में सफलता हासिल की। उन्होंने कम उम्र में विवाह करने के बजाय अपनी पढ़ाई जारी रखने और भविष्य में अपने पैरों पर खड़ा होने की इच्छा व्यक्त की। बालिकाओं के इस साहसिक कदम को सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना गया। जिला प्रशासन ने उनके निर्णय, शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ दृढ़ता को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें सम्मानित किया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बाल विवाह को रोकने के लिए बालिकाओं की जागरूकता के साथ परिवार और समाज का सहयोग भी आवश्यक है। बालिकाओं को अपनी पसंद, शिक्षा और भविष्य से जुड़े निर्णयों में उचित अवसर मिलना चाहिए। इस अवसर पर दीप ज्योति संस्था के कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। छात्राओं को मिला पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर आयोजित गतिविधियों के तहत 11 अक्टूबर को महिला एवं बाल विकास निगम और जिला प्रशासन के सौजन्य से अंबेडकर आवासीय विद्यालय, कुशी में विभिन्न रचनात्मक एवं खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित की गई थी। इनमें चित्रकला, निबंध लेखन, दौड़, कबड्डी और जलेबी दौड़ जैसी प्रतियोगिताएं शामिल थीं। प्रतियोगिताओं में प्रथम 3 स्थान प्राप्त करने वाली छात्राओं को मोमेंटो, स्कूल बैग, मासिक धर्म स्वच्छता (एमएचएम) किट और मेडल देकर सम्मानित किया गया। इन गतिविधियों का उद्देश्य छात्राओं की रचनात्मक प्रतिभा, खेल भावना और आत्मविश्वास को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त कुमारी अनुपम सिंह, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस), जिला कल्याण पदाधिकारी, महिला एवं बाल विकास निगम के पदाधिकारी और कर्मी उपस्थित रहे। जिला प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के माध्यम से बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा, बाल विवाह-दहेज प्रथा के उन्मूलन और शिक्षा के प्रसार का संदेश दिया। प्रशासन ने बालिकाओं के सर्वांगीण विकास, सुरक्षित भविष्य और समान अवसर करने की प्रतिबद्धता दोहराई। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर सोमवार को समाहरणालय सभाकक्ष में बालिकाओं के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को उनके अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा के प्रति जागरूक करना और उनमें आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता का विकास करना रहा। कार्यक्रम के दौरान डीएम ने बालिकाओं से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं, पढ़ाई, स्वास्थ्य, पोषण तथा भविष्य की आकांक्षाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बाल विवाह और दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों के दुष्परिणामों पर चर्चा करते हुए बालिकाओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा बालिकाओं के सशक्तीकरण का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। शिक्षित होकर बालिकाएं न केवल अपना भविष्य संवार सकती हैं, बल्कि परिवार और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। डीएम ने कहा कि बालिकाओं को समान अवसर, सुरक्षित वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बालिकाओं को किसी भी प्रकार के भेदभाव और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ निर्भीक होकर आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया। शादी रुकवाकर पढ़ाई जारी रखने का लिया फैसला कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू मदनपुर प्रखंड की पांच बालिकाओं का सम्मान रहा। इन बालिकाओं ने बाल विवाह के खिलाफ साहसपूर्वक आवाज उठाई और सामाजिक दबावों का सामना करते हुए अपनी शादी रुकवाने में सफलता हासिल की। उन्होंने कम उम्र में विवाह करने के बजाय अपनी पढ़ाई जारी रखने और भविष्य में अपने पैरों पर खड़ा होने की इच्छा व्यक्त की। बालिकाओं के इस साहसिक कदम को सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना गया। जिला प्रशासन ने उनके निर्णय, शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ दृढ़ता को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें सम्मानित किया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बाल विवाह को रोकने के लिए बालिकाओं की जागरूकता के साथ परिवार और समाज का सहयोग भी आवश्यक है। बालिकाओं को अपनी पसंद, शिक्षा और भविष्य से जुड़े निर्णयों में उचित अवसर मिलना चाहिए। इस अवसर पर दीप ज्योति संस्था के कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। छात्राओं को मिला पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर आयोजित गतिविधियों के तहत 11 अक्टूबर को महिला एवं बाल विकास निगम और जिला प्रशासन के सौजन्य से अंबेडकर आवासीय विद्यालय, कुशी में विभिन्न रचनात्मक एवं खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित की गई थी। इनमें चित्रकला, निबंध लेखन, दौड़, कबड्डी और जलेबी दौड़ जैसी प्रतियोगिताएं शामिल थीं। प्रतियोगिताओं में प्रथम 3 स्थान प्राप्त करने वाली छात्राओं को मोमेंटो, स्कूल बैग, मासिक धर्म स्वच्छता (एमएचएम) किट और मेडल देकर सम्मानित किया गया। इन गतिविधियों का उद्देश्य छात्राओं की रचनात्मक प्रतिभा, खेल भावना और आत्मविश्वास को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त कुमारी अनुपम सिंह, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस), जिला कल्याण पदाधिकारी, महिला एवं बाल विकास निगम के पदाधिकारी और कर्मी उपस्थित रहे। जिला प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के माध्यम से बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा, बाल विवाह-दहेज प्रथा के उन्मूलन और शिक्षा के प्रसार का संदेश दिया। प्रशासन ने बालिकाओं के सर्वांगीण विकास, सुरक्षित भविष्य और समान अवसर करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

