नालंदा में क्रेडिटबी के फर्जी एजेंट बनकर ठगी:साइबर पुलिस ने 2 भाइयों को किया अरेस्ट; 6 मोबाइल और एटीएम बरामद

नालंदा में क्रेडिटबी के फर्जी एजेंट बनकर ठगी:साइबर पुलिस ने 2 भाइयों को किया अरेस्ट; 6 मोबाइल और एटीएम बरामद

नालंदा में साइबर पुलिस ने लोन दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। दो शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। जिसकी पहचान कतरीसराय थाना क्षेत्र के बजराचक गांव निवासी शंकर प्रसाद के पुत्र (23) सन्नी कुमार और (20) प्रिंस कुमार के रूप में की गई है। दोनों आपस में सहोदर भाई हैं। पुलिस ने दोनों के पास से ठगी के काम में इस्तेमाल होने वाले छह स्क्रीन टच मोबाइल और छह एटीएम कार्ड भी बरामद किए हैं। क्रेडिटबी का एजेंट बनकर देता था झांसा साइबर पुलिस पोर्टल से मिले संदिग्ध मोबाइल नंबरों की तकनीकी जांच और सर्विलांस के आधार पर साइबर थाना की पुलिस ने दोनों को रंगेहाथ दबोच लिया। पूछताछ और जांच में सामने आया कि आरोपी व्हाट्सएप के माध्यम से खुद को लोकप्रिय डिजिटल लोन प्लेटफॉर्म ‘क्रेडिटबी’ (KreditBee) का अधिकृत एजेंट बताता था। इसके बाद आसान शर्तों पर तत्काल लोन स्वीकृत कराने का झांसा देकर सीधे-सादे लोगों से संपर्क साधते थे। लोन दिलाने के नाम पर साइबर ठगी को अंजाम देते थे। न्यायिक हिरासत में भेजे गए दोनों आरोपी इस मामले में नालंदा साइबर थाना में कांड दर्ज करते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ विधिवत कानूनी कार्रवाई की गई है। गिरफ्तारी के बाद आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा कर दोनों को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया, जहां से अदालत के आदेश पर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। कार्रवाई करने वाली टीम में शामिल सदस्य छापेमारी टीम में नालंदा साइबर थाना के दरोगा कुंदन कुमार, तौकीर खान के साथ सिपाही चंदन कुमार, राजन कुमार मांझी, यश कुमार, ऋतु राज, रविनंदन कुमार, गृह रक्षक संदीप कुमार, करण कुमार सशस्त्र बल के साथ शामिल थे। मोबाइल ऐप से मिनटों में मिलता है पर्सनल लोन बदलती वित्तीय तकनीक के दौर में आम उपभोक्ताओं और युवा पेशेवरों के बीच मोबाइल आधारित इंस्टेंट पर्सनल लोन का चलन तेजी से बढ़ा है। इस कड़ी में प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘क्रेडिटबी’ (KreditBee) एक बड़ा माध्यम बनकर उभरा है, जिसके जरिए जरूरतमंद लोग बैंक के चक्कर लगाए बिना सीधे अपने स्मार्टफोन से व्यक्तिगत ऋण प्राप्त कर रहे हैं। यह प्लेटफॉर्म भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा पंजीकृत अपनी सहयोगी एनबीएफसी ‘क्रेजीबी सर्विसेज’ और अन्य साझेदार वित्तीय संस्थानों के जरिए यह सेवा उपलब्ध कराता है। 10 से 15 मिनट में खाते में पहुंचती है राशि इस पूरी व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसका पेपरलेस और तेज होना है। ऑनलाइन आवेदन स्वीकृत होने के महज 10 से 15 मिनट के भीतर स्वीकृत राशि सीधे आवेदक के बैंक खाते में भेज दी जाती है। प्लेटफॉर्म पर विभिन्न वर्गों के लिए अलग-अलग श्रेणियां तय हैं। छोटे और तात्कालिक खर्चों के लिए एक हजार से 10 हजार रुपए तक का फ्लेक्सी लोन उपलब्ध है। वहीं, नियमित वेतनभोगियों और छोटे कारोबारियों को पात्रता के आधार पर अधिकतम पांच लाख रुपए तक का लोन दिया जाता है, जिसे 3 से 36 महीने की आसान किस्तों में चुकाने का विकल्प मिलता है। आधार, पैन कार्ड और आय का स्रोत होना जरूरी लोन के लिए आवेदक का भारतीय नागरिक होना और आयु 21 से 58 वर्ष के बीच होना अनिवार्य है। साथ ही नियमित आय का निश्चित स्रोत होना चाहिए। आवश्यक दस्तावेजों में पैन कार्ड, आधार कार्ड और बैंक खाते का विवरण मुख्य रूप से शामिल हैं। पूरी सत्यापन प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से ही पूरी कर ली जाती है।
फर्जी रिकवरी-वेरिफिकेशन एजेंट बनकर लोगों को शिकार बना रहे साइबर ठग डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती लोकप्रियता के बीच साइबर अपराधियों ने ठगी का नया पैंतरा खोज निकाला है। जालसाज खुद को लोकप्रिय फिनटेक प्लेटफॉर्म ‘क्रेडिटबी’ (KreditBee) का अधिकृत लोन एजेंट, वेरिफिकेशन ऑफिसर या रिकवरी एग्जीक्यूटिव बताकर सीधे-सादे लोगों को निशाना बना रहे हैं। ठग आमतौर पर अनजान नंबरों से कॉल या व्हाट्सएप मैसेज भेजकर दावा करते हैं कि उपभोक्ता का प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन बिना किसी दस्तावेज और बेहद कम ब्याज दर पर पास हो गया है। प्रोसेसिंग फीस और फाइल चार्ज के नाम पर वसूली लोन का लालच देकर ठग पीड़ित को झांसे में लेते हैं और कहते हैं कि स्वीकृत राशि सीधे बैंक खाते में भेजने के लिए पहले कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इसके बाद ‘फाइल अप्रूवल चार्ज’, ‘जीएसटी’, ‘इंश्योरेंस फीस’ या ‘प्रोसेसिंग फीस’ के नाम पर 2,000 से 10,000 रुपए तक किसी निजी यूपीआई आईडी या खाते में ट्रांसफर करवा लेते हैं। एक बार पैसा ट्रांसफर होने के बाद तकनीकी खराबी का बहाना बनाकर और रकम ऐंठी जाती है, फिर कॉल ब्लॉक कर दी जाती है। मैलवेयर युक्त एपीके फाइल भेजकर मोबाइल हैक ठगी का दूसरा तरीका फर्जी मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए अपनाया जाता है। साइबर अपराधी आधिकारिक गूगल प्ले स्टोर के बजाय व्हाट्सएप या एसएमएस पर ‘KreditBee Update’ या ‘Loan Fast Approval’ नाम से एक एपीके (.apk) फाइल भेजते हैं। जैसे ही उपभोक्ता इसे अपने फोन में इंस्टॉल करता है, मोबाइल का पूरा एक्सेस ठगों के पास चला जाता है। इसके जरिए फोन पर आने वाले बैंक ओटीपी को सीधे पढ़कर बैंक खातों से पूरी जमा पूंजी उड़ा ली जाती है। कॉन्टैक्ट लिस्ट और तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेलिंग मैलवेयर ऐप्स इंस्टॉल होते ही फोन की गैलरी और कॉन्टैक्ट लिस्ट का डेटा चुरा लेते हैं। इसके बाद ठग खुद को रिकवरी एजेंट बताकर धमकी भरे कॉल करने लगते हैं। लोन न लेने के बावजूद पीड़ित से जबरन वसूली की जाती है। पैसे न देने पर फोन में मौजूद निजी तस्वीरों को मॉर्फ कर परिवार और रिश्तेदारों को भेजने की धमकी दी जाती है। बचाव: केवल आधिकारिक ऐप और वेबसाइट का ही करें इस्तेमाल नालंदा साइबर डीएसपी ऋषभ आनंद ने बताया कि क्रेडिटबी या कोई भी अधिकृत वित्तीय संस्थान कभी भी लोन जारी करने से पहले किसी निजी यूपीआई या खाते में अग्रिम शुल्क नहीं मांगता। पूरी प्रक्रिया केवल आधिकारिक ऐप के भीतर ही पूरी होती है। नालंदा में साइबर पुलिस ने लोन दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। दो शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। जिसकी पहचान कतरीसराय थाना क्षेत्र के बजराचक गांव निवासी शंकर प्रसाद के पुत्र (23) सन्नी कुमार और (20) प्रिंस कुमार के रूप में की गई है। दोनों आपस में सहोदर भाई हैं। पुलिस ने दोनों के पास से ठगी के काम में इस्तेमाल होने वाले छह स्क्रीन टच मोबाइल और छह एटीएम कार्ड भी बरामद किए हैं। क्रेडिटबी का एजेंट बनकर देता था झांसा साइबर पुलिस पोर्टल से मिले संदिग्ध मोबाइल नंबरों की तकनीकी जांच और सर्विलांस के आधार पर साइबर थाना की पुलिस ने दोनों को रंगेहाथ दबोच लिया। पूछताछ और जांच में सामने आया कि आरोपी व्हाट्सएप के माध्यम से खुद को लोकप्रिय डिजिटल लोन प्लेटफॉर्म ‘क्रेडिटबी’ (KreditBee) का अधिकृत एजेंट बताता था। इसके बाद आसान शर्तों पर तत्काल लोन स्वीकृत कराने का झांसा देकर सीधे-सादे लोगों से संपर्क साधते थे। लोन दिलाने के नाम पर साइबर ठगी को अंजाम देते थे। न्यायिक हिरासत में भेजे गए दोनों आरोपी इस मामले में नालंदा साइबर थाना में कांड दर्ज करते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ विधिवत कानूनी कार्रवाई की गई है। गिरफ्तारी के बाद आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा कर दोनों को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया, जहां से अदालत के आदेश पर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। कार्रवाई करने वाली टीम में शामिल सदस्य छापेमारी टीम में नालंदा साइबर थाना के दरोगा कुंदन कुमार, तौकीर खान के साथ सिपाही चंदन कुमार, राजन कुमार मांझी, यश कुमार, ऋतु राज, रविनंदन कुमार, गृह रक्षक संदीप कुमार, करण कुमार सशस्त्र बल के साथ शामिल थे। मोबाइल ऐप से मिनटों में मिलता है पर्सनल लोन बदलती वित्तीय तकनीक के दौर में आम उपभोक्ताओं और युवा पेशेवरों के बीच मोबाइल आधारित इंस्टेंट पर्सनल लोन का चलन तेजी से बढ़ा है। इस कड़ी में प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘क्रेडिटबी’ (KreditBee) एक बड़ा माध्यम बनकर उभरा है, जिसके जरिए जरूरतमंद लोग बैंक के चक्कर लगाए बिना सीधे अपने स्मार्टफोन से व्यक्तिगत ऋण प्राप्त कर रहे हैं। यह प्लेटफॉर्म भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा पंजीकृत अपनी सहयोगी एनबीएफसी ‘क्रेजीबी सर्विसेज’ और अन्य साझेदार वित्तीय संस्थानों के जरिए यह सेवा उपलब्ध कराता है। 10 से 15 मिनट में खाते में पहुंचती है राशि इस पूरी व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसका पेपरलेस और तेज होना है। ऑनलाइन आवेदन स्वीकृत होने के महज 10 से 15 मिनट के भीतर स्वीकृत राशि सीधे आवेदक के बैंक खाते में भेज दी जाती है। प्लेटफॉर्म पर विभिन्न वर्गों के लिए अलग-अलग श्रेणियां तय हैं। छोटे और तात्कालिक खर्चों के लिए एक हजार से 10 हजार रुपए तक का फ्लेक्सी लोन उपलब्ध है। वहीं, नियमित वेतनभोगियों और छोटे कारोबारियों को पात्रता के आधार पर अधिकतम पांच लाख रुपए तक का लोन दिया जाता है, जिसे 3 से 36 महीने की आसान किस्तों में चुकाने का विकल्प मिलता है। आधार, पैन कार्ड और आय का स्रोत होना जरूरी लोन के लिए आवेदक का भारतीय नागरिक होना और आयु 21 से 58 वर्ष के बीच होना अनिवार्य है। साथ ही नियमित आय का निश्चित स्रोत होना चाहिए। आवश्यक दस्तावेजों में पैन कार्ड, आधार कार्ड और बैंक खाते का विवरण मुख्य रूप से शामिल हैं। पूरी सत्यापन प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से ही पूरी कर ली जाती है।
फर्जी रिकवरी-वेरिफिकेशन एजेंट बनकर लोगों को शिकार बना रहे साइबर ठग डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती लोकप्रियता के बीच साइबर अपराधियों ने ठगी का नया पैंतरा खोज निकाला है। जालसाज खुद को लोकप्रिय फिनटेक प्लेटफॉर्म ‘क्रेडिटबी’ (KreditBee) का अधिकृत लोन एजेंट, वेरिफिकेशन ऑफिसर या रिकवरी एग्जीक्यूटिव बताकर सीधे-सादे लोगों को निशाना बना रहे हैं। ठग आमतौर पर अनजान नंबरों से कॉल या व्हाट्सएप मैसेज भेजकर दावा करते हैं कि उपभोक्ता का प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन बिना किसी दस्तावेज और बेहद कम ब्याज दर पर पास हो गया है। प्रोसेसिंग फीस और फाइल चार्ज के नाम पर वसूली लोन का लालच देकर ठग पीड़ित को झांसे में लेते हैं और कहते हैं कि स्वीकृत राशि सीधे बैंक खाते में भेजने के लिए पहले कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इसके बाद ‘फाइल अप्रूवल चार्ज’, ‘जीएसटी’, ‘इंश्योरेंस फीस’ या ‘प्रोसेसिंग फीस’ के नाम पर 2,000 से 10,000 रुपए तक किसी निजी यूपीआई आईडी या खाते में ट्रांसफर करवा लेते हैं। एक बार पैसा ट्रांसफर होने के बाद तकनीकी खराबी का बहाना बनाकर और रकम ऐंठी जाती है, फिर कॉल ब्लॉक कर दी जाती है। मैलवेयर युक्त एपीके फाइल भेजकर मोबाइल हैक ठगी का दूसरा तरीका फर्जी मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए अपनाया जाता है। साइबर अपराधी आधिकारिक गूगल प्ले स्टोर के बजाय व्हाट्सएप या एसएमएस पर ‘KreditBee Update’ या ‘Loan Fast Approval’ नाम से एक एपीके (.apk) फाइल भेजते हैं। जैसे ही उपभोक्ता इसे अपने फोन में इंस्टॉल करता है, मोबाइल का पूरा एक्सेस ठगों के पास चला जाता है। इसके जरिए फोन पर आने वाले बैंक ओटीपी को सीधे पढ़कर बैंक खातों से पूरी जमा पूंजी उड़ा ली जाती है। कॉन्टैक्ट लिस्ट और तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेलिंग मैलवेयर ऐप्स इंस्टॉल होते ही फोन की गैलरी और कॉन्टैक्ट लिस्ट का डेटा चुरा लेते हैं। इसके बाद ठग खुद को रिकवरी एजेंट बताकर धमकी भरे कॉल करने लगते हैं। लोन न लेने के बावजूद पीड़ित से जबरन वसूली की जाती है। पैसे न देने पर फोन में मौजूद निजी तस्वीरों को मॉर्फ कर परिवार और रिश्तेदारों को भेजने की धमकी दी जाती है। बचाव: केवल आधिकारिक ऐप और वेबसाइट का ही करें इस्तेमाल नालंदा साइबर डीएसपी ऋषभ आनंद ने बताया कि क्रेडिटबी या कोई भी अधिकृत वित्तीय संस्थान कभी भी लोन जारी करने से पहले किसी निजी यूपीआई या खाते में अग्रिम शुल्क नहीं मांगता। पूरी प्रक्रिया केवल आधिकारिक ऐप के भीतर ही पूरी होती है।  

​

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *