अम्बेडकरनगर के 20 पीएमश्री विद्यालयों में अब बच्चे किताबों के साथ प्रकृति से भी सीखेंगे। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और औषधीय पौधों का महत्व समझाने के लिए विद्यालयों में हर्बल एवं औषधीय उद्यान विकसित किए जाएंगे। इसके लिए शासन ने चार लाख रुपये का बजट जारी किया है। प्रत्येक विद्यालय को 20 हजार रुपये दिए गए हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को जल्द उद्यान विकसित कराने के निर्देश दिए हैं। सरकार परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर भी जोर दे रही है। इसी क्रम में पीएमश्री विद्यालयों में हर्बल गार्डन तैयार करने की पहल की गई है। इन उद्यानों के माध्यम से बच्चों को औषधीय और सुगंधित पौधों की पहचान, उनके महत्व और उपयोग की जानकारी दी जाएगी। साथ ही पौधों की देखभाल और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी रुचि बढ़ाई जाएगी। तुलसी, गिलोय और एलोवेरा समेत लगेंगे कई पौधे विद्यालयों में स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल औषधीय एवं उपयोगी पौधे लगाए जाएंगे। इनमें तुलसी, गिलोय, नीम, एलोवेरा, आंवला, हरड़ और अश्वगंधा प्रमुख हैं। इसके अलावा पुदीना, लेमनग्रास, हल्दी, अदरक, सहजन, शतावरी और गेंदा समेत अन्य पौधे भी लगाए जाएंगे। विद्यार्थियों को पौधों की पहचान और उनके उपयोग की जानकारी देने के लिए नेम प्लेट लगाई जाएंगी। पर्यावरण क्लब और बाल संसद करेंगे देखरेख हर्बल गार्डन के रखरखाव में विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए विद्यालयों में गठित पर्यावरण क्लब और बाल संसद की मदद ली जाएगी। उद्यानों को स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और पुनर्चक्रण की गतिविधियों से भी जोड़ा जाएगा। इससे बच्चों को पर्यावरण संरक्षण की व्यावहारिक जानकारी मिलेगी और वे अपने घरों व आसपास भी पौधरोपण के लिए प्रेरित होंगे। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. पूनम मिश्रा ने बताया कि हर्बल एवं औषधीय उद्यानों से विद्यार्थियों में पौधों की पहचान, उपयोग और संरक्षण की समझ विकसित होगी। उद्यान विकसित करने के लिए संबंधित विद्यालयों को धनराशि उपलब्ध करा दी गई है।

