कुरुक्षेत्र में स्थित हरियाणा के एकमात्र शक्तिपीठ श्री देवीकूप मां भद्रकाली मंदिर में नवरात्रि के पहले दिन मां की प्रतिमा को 2.25 किलो चांदी से बनी गोल्ड प्लेटेड पोशाक पहनाई गई। मंदिर के पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा की पुत्रवधू निकुंज शर्मा का दावा है कि गुजरात के एक मंदिर में भगवान को ऐसी पोशाक पहने देखने और उसी रात सपने में मां भद्रकाली को भी इसी रूप में देखने के बाद इसे बनवाने का विचार आया। निकुंज शर्मा ने परिवार की सहमति से यह पोशाक तैयार करवाई। गुजरात के तीन कारीगरों ने इसे 15 दिन में बनाया। पोशाक पर सोने जैसी चमक के साथ मां के आठ रूपों, श्याम रंग, त्रिशक्ति और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखकर डिजाइन बनाए गए हैं। परिवार ने रविवार को पहले नवरात्रि के अवसर पर ये ड्रेस मां को अर्पित की। बता दें कि श्री देवीकूप मां भद्रकाली मंदिर 52 शक्तिपीठों में शामिल है और मान्यता है कि यहां माता सती का दायां टखना गिरा था। चांदी की प्लेट पर ही उकेरे गए डिजाइन निकुंज शर्मा ने बताया कि पोशाक करीब 2.25 किलो चांदी से बनाई गई है। इस पर गोल्ड प्लेटिंग की गई है, जिससे यह सोने जैसी चमकती है। इसे तैयार करने के लिए पहले सांचा बनाया गया, फिर चांदी पर डिजाइन उकेरे गए और अंत में गोल्ड प्लेटिंग की गई। पोशाक को अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर बनाने के बजाय चांदी की प्लेट पर ही तराशा गया। इसमें पत्तियों के कई तरह के डिजाइन हैं, जो प्रकृति को दर्शाते हैं। इसे बनाने वाले कारीगर ओमान और दुबई जैसे देशों में भी कारीगरी सीख चुके हैं। आठ रूपों और त्रिशक्ति के प्रतीक जड़े निकुंज ने दावा किया कि उत्तर भारत में इस तरह की चांदी की गोल्ड प्लेटेड पोशाक पहली बार किसी मंदिर में अर्पित की गई है। इसके डिजाइन और नगों को मां के स्वरूप से जोड़कर तैयार किया गया है। मां भद्रकाली के श्याम रंग को ध्यान में रखते हुए पोशाक के ऊपर-नीचे, बेल्ट और घेरे में नीले नग लगाए गए हैं। वहीं, अलग-अलग हिस्सों में आठ-आठ लाल नग जड़े गए हैं, जिन्हें मां काली के आठ रूपों का प्रतीक बताया गया है। पोशाक में तीन मोती लगाए गए हैं, जो मां लक्ष्मी, मां सरस्वती और मां काली यानी त्रिशक्ति को दर्शाते हैं। मां के कुंडलों में भी लाल रंग का इस्तेमाल किया गया है। गले में 108 लाल नगों से बनी माला है। इसके अलावा पोशाक पर दो मोर और एक मोर पंख का डिजाइन भी बनाया गया है। मोर पंख के जरिए श्रीकृष्ण से जुड़ी मान्यता को जगह निकुंज ने बताया कि मां भद्रकाली को भगवान श्रीकृष्ण की कुलदेवी माना जाता है। इसी मान्यता को ध्यान में रखते हुए पोशाक में मोर और मोर पंख के आभूषण जैसे डिजाइन बनाए गए हैं। इस तरह पोशाक में मां के स्वरूप के साथ भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी धार्मिक मान्यता को भी शामिल किया गया है। 52 शक्तिपीठों में शामिल है मंदिर कुरुक्षेत्र स्थित श्री देवीकूप मां भद्रकाली मंदिर को 52 शक्तिपीठों में शामिल माना जाता है। मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, यहां माता सती का दायां टखना गिरा था। मंदिर परिसर में मां की प्रतिमा के सामने एक पवित्र कुआं है। माना जाता है कि यह वही स्थान है, जहां माता सती का टखना गिरा था। टखना गिरने के कारण यहां कुआं बनने की मान्यता है। मंदिर कमेटी ने सुरक्षा के लिहाज से इसे चारों ओर से कवर किया हुआ है। श्रद्धालु दूर से ही इसके दर्शन करते हैं। श्रीकृष्ण, बलराम और पांडवों से जुड़ी मान्यताएं मंदिर की मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण और बलराम का मुंडन संस्कार भी इसी स्थान पर हुआ था। महाभारत युद्ध से जुड़ी एक अन्य मान्यता के मुताबिक, पांडवों ने युद्ध में विजय की कामना से यहां हवन-यज्ञ किया था। उन्होंने जीत मिलने पर अपने युद्ध के घोड़े मां को अर्पित करने का संकल्प लिया था। युद्ध में विजय के बाद पांडवों ने यहां घोड़े अर्पित किए। इसी से मंदिर में घोड़े चढ़ाने की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। आज भी श्रद्धालु मंदिर में मन्नत का धागा बांधते हैं। मन्नत पूरी होने पर वे अपनी श्रद्धा के अनुसार मां के दरबार में चढ़ावा अर्पित करते हैं। थानेसर में चार कूपों का मिलता है वर्णन मंदिर के पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा ने बताया कि तीर्थांक पुराण में थानेसर के चार कूपों- चंद्र कूप, रुद्र कूप, विष्णु कूप और देवी कूप का वर्णन मिलता है। ब्रह्मसरोवर परिसर में स्थित चंद्र कूप को द्रौपदी कूप के नाम से भी जाना जाता है। स्थाण्वीश्वर महादेव मंदिर में रुद्र कूप और मां भद्रकाली मंदिर में देवी कूप का वर्णन मिलता है। उनके अनुसार, पिछले साल सन्निहित सरोवर के पास श्री लक्ष्मी-नारायण मंदिर में खुदाई के दौरान एक कूप मिला था। दावा किया जाता है कि यह विष्णु कूप है और इसकी गहराई करीब 100 फुट है। माना जाता है कि इसी कूप से सन्निहित सरोवर में जल आता होगा। फिलहाल इसे कवर कर दिया गया है, ताकि श्रद्धालु दूर से दर्शन कर सकें। झांसा रोड का नाम बदलकर होगा मां भद्रकाली शक्तिपीठ मार्ग कुरुक्षेत्र में पुराने बस अड्डे से श्री देवीकूप मां भद्रकाली मंदिर तक जाने वाली झांसा रोड का नाम बदलकर अब मां भद्रकाली शक्तिपीठ मार्ग किया जाएगा। पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा ने रविवार को शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां भद्रकाली की शोभायात्रा के दौरान यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि नाम बदलने से मंदिर तक जाने वाले मार्ग की पहचान शक्तिपीठ के नाम से होगी।

