Ahmedabad news: खुले सीवरेज में गिरी 9 साल की दृष्टिबाधित बच्ची, दूसरे दिन भी नहीं चला पता

Ahmedabad news: खुले सीवरेज में गिरी 9 साल की दृष्टिबाधित बच्ची,  दूसरे दिन भी नहीं चला पता

Ahmedabad: शहर में खुली सीवरेज लाइन और सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी एक बार फिर गंभीर हादसे की वजह बनी है। नारोल में पिराणा-पीपलज रोड पर शास्त्री ब्रिज के पास नौ वर्षीय दृष्टिबाधित मनीषा सलाट नामक बालिका खुली सीवरेज लाइन के गहरे गड्ढे में गिर गई। मां के साथ रिक्शा से उतरते समय शनिवार को हुए इस हादसे के बाद पुलिस और दमकल विभाग की टीमों ने तलाशी अभियान शुरू किया, लेकिन 24 घंटे बाद भी रविवार रात तक बच्ची का पता नहीं चल पाया है।

रिक्शा का किराया दे रही थी मां, तभी हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, पिराणा-पीपलज रोड क्षेत्र में मजदूरी करने वाले परिवार की बेटी मनीषा अपनी मां के साथ रिक्शा से उतरी थी। मां रिक्शा चालक को किराया चुकाने में व्यस्त थी। इसी दौरान बच्ची का पैर फिसला और वह सड़क किनारे स्थित गहरी खुली सीवरेज लाइन में जा गिरी। जानकारी मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और तलाश शुरू की। सीवरेज लाइन में गहरे पानी का बहाव और रात होने के कारण बचाव अभियान में कठिनाइयां सामने आईं। तलाश के दौरान साबरमती नदी के किनारे तक भी खोजबीन की गई। महापौर हितेश बारोट भी घटनास्थल पहुंचे।

संभावित सभी जगहों पर की जा रही तलाश

फायर ब्रिगेड के अनुसार घटना स्थल के अलावा भी बालिका की तलाश की जा रही है। टीम लगातार ढूंढने में लगी है, लेकिन बालिका नहीं मिली है। ट्रीटमेंट प्लांट व नदी के किनारे भी बालिका को ढूंढने के जतन किए जा रहे हैं। पुलिस टीम भी तैनात है।रासायनिक पानी छोड़ने के आरोपसीवरेज और ड्रैनेज लाइनों में रात के समय अवैध रूप से रासायनिक पानी छोड़ने के आरोप लग रहे हैं। हादसे के बाद क्षेत्र में खुली सीवरेज लाइनों पर ढक्कन लगाने का कार्य शुरू किया है। हादसे के बाद मनपा के जागने पर स्थानीय लोगों में रोष है। वे सवाल पूठ रहे हैं कि यदि ऐसे इंतजाम पहले किए जाते, तो इस तरह का हादसा ही नहीं होता। पहले कुबेरनगर और ओढव क्षेत्रों भी इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए।

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खुली सीवरेज लाइन में गिरी बालिका की तलाश करते फायर ब्रिगेड के कर्मचारी एवं मौके पर तैनात पुलिस की टीम व मौजूद लोग।2. घटना स्थल के आसपास खुली सीवरेज लाइन में ढक्कन लगाने का काम करते श्रमिक।

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