साइबर-अपराधों के हिसाब से थानों को 3 श्रेणियों में बांटा:55 प्रशिक्षित जवानों की तैनाती, ये दूसरे काम नहीं करेंगे

साइबर-अपराधों के हिसाब से थानों को 3 श्रेणियों में बांटा:55 प्रशिक्षित जवानों की तैनाती, ये दूसरे काम नहीं करेंगे

तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों से निपटने के लिए पुलिस ने अलग रणनीति तैयार की है। अपराधों की संख्या के आधार पर थानों की मैपिंग कर उन्हें तीन श्रेणियों में बांटा गया है। हॉट स्पॉट या ‘ए’ श्रेणी में 12 थाने हैं, जहां इस साल 500 से ज्यादा शिकायतें और एफआईआर हैं। यानी हर थाने में औसतन 40-42। इन थानों में कोलार, पिपलानी, बागसेवनिया, शाहपुरा और मिसरोद टॉप 5 में शामिल हैं। ‘बी’ श्रेणी में 23 थाने हैं, जहां 100 से 499 तक शिकायतें हैं। महिला और अजाक थाना ‘सी’ श्रेणी में हैं, जहां शिकायतों की संख्या 100 से कम है। साइबर अपराधों की जांच के लिए पिछले महीने तकनीकी पृष्ठभूमि से जुड़े 55 पुलिसकर्मियों को चयनित किया गया था। इन्हें विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिलाया गया। इसके बाद थानों में इनकी तैनाती की गई है। ‘ए’ श्रेणी के थानों में छह, ‘बी’श्रेणी में चार और ‘सी’ श्रेणी में दो अफसर-कर्मचारी साइबर हेल्प डेस्क में तैनात किए हैं। ‘ए’ श्रेणी के हॉट स्पॉट थाने…यहां इस साल 500 से ज्यादा शिकायतें/एफआईआर, ऐसे हर थाने में 6-6 प्रशिक्षित पुलिसकर्मी तैनात ‘बी’ श्रेणी में 23 थाने
ऐशबाग, जहांगीराबाद, टीटी नगर, रातीबड़, स्टेशन बजरिया, अयोध्या नगर, एमपी नगर, अरेरा हिल्स, कटारा हिल्स, कोतवाली, गौतम नगर, तलैया, शाहजहांनाबाद, मंगलवारा, हनुमानगंज, श्यामला हिल्स, टीला जमालपुरा, कजलीखेड़ा, गांधी नगर, चूना भट्टी, छोला मंदिर, खजूरी सड़क और बैरागढ़। क्षतिपूर्ति बॉन्ड… दूसरे राज्यों में फीस 10 रु., मप्र में 1000, इसलिए छोटी रकम वापस ही नहीं ले रहे
साइबर फ्राॅड की शिकायत एनसीआरपी पोर्टल और 1930 पर दर्ज की जा सकती है। ठगी की रकम 50 हजार तक है तो उसे वापस लेने के लिए कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। बैंकों द्वारा राशि फ्रीज करके फरियादी को सूचना दी जाती है। क्षतिपूर्ति बॉन्ड के जरिये मनी रेस्टोरेशन पोर्टल (एमआरएम) में फ्रीज राशि वापस ली जा सकती है। मध्य प्रदेश में इस बॉन्ड की फीस 1000 रुपए है। जबकि कई राज्यों ने यह फीस 10 रुपए तक कर दी है। फीस अधिक होने से छोटी रकम लोगों द्वारा वापस नहीं ली जा रही हैं, जिससे पोर्टल पर पेंडिंग मामले अधिक हैं। इस साल लगभग 20 लाख रुपए रिफंड हुए हैं। क्राइम ब्रांच ही करेगी इनका ट्रांसफर…
55 साइबर एक्सपर्ट केवल साइबर क्राइम की विवेचना करेंगे। उन्हें थाना प्रभारी दूसरे काम में नहीं लगा सकेंगे। उनके ट्रांसफर का अधिकार डीसीपी क्राइम को होगा। किसी दूसरे थाने में ट्रांसफर होने पर भी वे साइबर डेस्क में ही काम करेंगे।
साइबर क्राइम की विवेचना आसान होगी
शहर में बढ़ते साइबर क्राइम से निपटने की तैयारी के तहत उनकी विवेचना के लिए थानों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। 12 थानों में साइबर क्राइम अधिक है। इन थानों में छह-छह साइबर एक्सपर्ट तैनात किए हैं। यह केवल साइबर अपराधों की जांच करेंगे। इन्हें दूसरे कामों से दूर रखा जाएगा।
-संजय कुमार, पुलिस कमिश्नर, भोपाल … इस साल अब तक 760 एफआईआर दर्ज

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